बिहार सरकार के मंत्री और हम (से.) प्रमुख डॉ. संतोष कुमार सुमन ने पटना जिले के बख्तियारपुर का नाम बदलकर ‘नीतीशपुर’ करने की मांग की है। सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्होंने यह प्रस्ताव सीएम सम्राट चौधरी के सामने रखा, जिसके बाद बिहार की सियासत में यह मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है।
संतोष सुमन ने रखा नीतीशपुर नाम का प्रस्ताव
बिहार सरकार में लघु जल संसाधन मंत्री और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार सुमन ने बुधवार को पटना जिले के बख्तियारपुर का नाम बदलकर ‘नीतीशपुर’ किए जाने की मांग उठाई। उन्होंने यह प्रस्ताव सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के समक्ष रखा।
संतोष सुमन ने अपनी पोस्ट में कहा कि बख्तियारपुर सिर्फ एक भौगोलिक पहचान नहीं है, बल्कि यह पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जन्मभूमि है। उन्होंने लिखा कि नीतीश कुमार ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में बिहार की राजनीति, विकास और शासन को नई दिशा दी है, और उनकी जीवन-यात्रा से जुड़ी असंख्य स्मृतियां इसी धरती से जुड़ी हैं।
मंत्री का कहना है कि नीतीश कुमार की जन्मभूमि को उनके नाम से सम्मानित करना केवल स्थान का नाम बदलना नहीं, बल्कि उस मिट्टी के गौरव, इतिहास और उससे जुड़ी जनभावनाओं का सम्मान होगा। हालांकि यह अभी सिर्फ एक प्रस्ताव है — नाम बदलने पर सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक फैसला या घोषणा नहीं हुई है।
बख्तियारपुर की पहचान और भौगोलिक अहमियत
पटना जिले में स्थित बख्तियारपुर एक प्रमुख रेलवे जंक्शन और कस्बा है, जिसका मौजूदा नाम मध्यकालीन आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी के नाम पर पड़ा माना जाता है। यही वजह है कि दशकों से समय-समय पर इसका नाम बदलने की मांग उठती रही है।
यह इलाका इसलिए भी राजनीतिक रूप से संवेदनशील है क्योंकि बख्तियारपुर नीतीश कुमार की जन्मभूमि है। पटना से रेल मार्ग की तरफ से आगे बढ़ने पर यही रास्ता नीतीश कुमार के पैतृक गांव कल्याण बिगहा (हरनौत) की ओर जाता है, जो बख्तियारपुर से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसी वजह से स्थानीय लोग और नेता लंबे समय से इस इलाके की पहचान नीतीश कुमार के नाम से जोड़ने की मांग करते रहे हैं।

नाम बदलने की पुरानी मांग और सीएम सम्राट चौधरी का रुख
बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग नई नहीं है। पिछले ढाई-तीन दशकों में समय-समय पर इसे मगध द्वार, नालंदा, नीतीश नगर, फतेह विहार और शीलभद्र नगर जैसे नाम देने के प्रस्ताव आते रहे हैं। साल 2021 में जब पत्रकारों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस बारे में सवाल किया था, तो उन्होंने खुद स्पष्ट कर दिया था कि बख्तियारपुर उनकी जन्मभूमि है और इसका नाम नहीं बदला जाएगा।
इस साल नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनने के बाद से यह मुद्दा फिर सुर्खियों में है। हाल ही में एक पॉडकास्ट में सीएम सम्राट चौधरी ने भी इस पर अपना रुख साफ किया — उनका कहना था कि अभी नाम बदलने की कोई औपचारिक तैयारी नहीं है, लेकिन वे व्यक्तिगत रूप से चाहते हैं कि बख्तियारपुर का नाम बदला जाए। इसके पीछे तर्क देते हुए उन्होंने कहा कि बख्तियार खिलजी ने अराजकता फैलाई थी और इतिहासकारों के अनुसार उसी ने नालंदा विश्वविद्यालय को जलाया था, इसलिए उसके नाम पर किसी स्थान का नाम नहीं होना चाहिए।
संतोष सुमन का ताजा प्रस्ताव इसी माहौल में आया है, और सीएम के रुख को देखते हुए यह मांग पहले से ज्यादा वजनदार मानी जा रही है। हालांकि अंतिम फैसला सरकार को ही लेना है, फिलहाल इस पर सिर्फ सियासी बयानबाजी और चर्चा का दौर जारी है।
निष्कर्ष
बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने बख्तियारपुर का नाम बदलकर ‘नीतीशपुर’ करने का प्रस्ताव रखकर एक पुरानी मांग को फिर हवा दे दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निजी तौर पर नाम बदलाव के पक्ष में होने के बयान ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है। हालांकि नीतीश कुमार खुद पहले इस विचार को खारिज कर चुके हैं और सरकार की ओर से अभी कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं आया है, ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह मांग किसी ठोस फैसले में बदलती है या सियासी बयानबाजी तक सीमित रह जाती है।
