दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने IRCTC होटल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत कई आरोपियों पर आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि दोनों के पास अपराध से अर्जित संपत्ति होने का मजबूत संदेह है।
IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग केस: लालू, राबड़ी और तेजस्वी पर आरोप तय
लालू परिवार की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को IRCTC होटल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत कुल 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए। यह फैसला कई बार टलने के बाद आज सुनाया गया — पिछली सुनवाई 29 अगस्त को हुई थी, जब कोर्ट ने आरोप तय करने पर फैसला सुरक्षित रखा था। इसके बाद विशेष न्यायाधीश के तबादले के चलते मामला 7 सितंबर तक और फिर 10 सितंबर तक टलता रहा।
गौरतलब है कि यह प्रवर्तन निदेशालय (ED) का मनी लॉन्ड्रिंग केस है, जो उसी IRCTC होटल टेंडर घोटाले से जुड़ा है जिसमें CBI के मामले में अक्टूबर 2025 में ही लालू, राबड़ी और तेजस्वी पर आरोप तय किए जा चुके हैं। यानी अब दोनों जांच एजेंसियों के मामलों में परिवार के खिलाफ मुकदमा चलना तय हो गया है।
कोर्ट ने क्या कहा — पद के दुरुपयोग का संदेह
आरोप तय करते हुए कोर्ट ने कहा कि राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के पास अपराध से अर्जित आय (proceeds of crime) होने और पद के दुरुपयोग का मजबूत संदेह है। कोर्ट के मुताबिक, दोनों पटना की उस जमीन का लाभ उठा रहे हैं जिसे कथित तौर पर 2005 से 2014 के बीच — जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे — उनके प्रभाव में उनके पक्ष में हस्तांतरित किया गया था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच की प्रकृति, समय और प्रक्रिया राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित नहीं थी।
ED ने इस मामले में कुल 16 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिनमें से कोर्ट ने सुनवाई के बाद 7 आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया है। बताया जा रहा है कि मामले की अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी।
इससे पहले लालू परिवार ने निचली अदालत के अक्टूबर 2025 के उस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें CBI केस में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप तय किए गए थे। CBI ने इस याचिका का विरोध करते हुए अदालत में दावा किया कि जांच के दौरान सामने आए दस्तावेज और साक्ष्य आरोपों को मजबूत करते हैं।

क्या है IRCTC होटल घोटाला — पूरी टाइमलाइन
यह मामला उस दौर का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान IRCTC के अंतर्गत आने वाले रांची और पुरी स्थित दो होटलों के टेंडर में अनियमितताएं बरती गईं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इन होटलों और इनसे जुड़ी जमीनों को नियमों की अनदेखी करते हुए निजी कंपनियों को पट्टे पर दे दिया गया, जिससे कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचा।
- 25 फरवरी 2005: रेल मंत्री रहते लालू यादव पर आरोप — कोचर बंधुओं को रांची और पुरी के 2 होटल लीज पर दिलवाए गए, बदले में पटना में 3 एकड़ जमीन ली गई।
- 2010-2014: कोचर ने बेली रोड की जमीन DMCL को 1.47 करोड़ रुपये में बेची, जबकि इसकी कीमत 1.93 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
- 7 जुलाई 2017: वही जमीन लालू परिवार की कंपनी लारा प्रोजेक्ट्स को महज 65 लाख रुपये में ट्रांसफर कर दी गई, जबकि इसकी वास्तविक कीमत करोड़ों में थी।
- 16 अप्रैल 2018: CBI ने लालू समेत 5 आरोपियों पर FIR दर्ज कर 12 ठिकानों पर छापेमारी की।
- इसके बाद: लालू, राबड़ी और तेजस्वी समेत कई लोगों और कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।
इस मामले में M/s Lara Projects LLP, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद यादव, सरला गुप्ता, प्रेम चंद गुप्ता, गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, M/s Sujata Hotels, विनय कोचर, विजय कोचर, राजीव कुमार रेलन और M/s Abhishek Finance Private Limited को आरोपी बनाया गया था। इनमें से कोर्ट ने 7 लोगों को आरोपों से मुक्त कर दिया है।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने अक्टूबर 2025 के अपने आदेश में यह भी कहा था कि पूरे टेंडर घोटाले की साजिश लालू यादव की जानकारी में रची गई और टेंडर प्रक्रिया में उनके हस्तक्षेप से उनके परिवार को आर्थिक फायदा हुआ।
लालू परिवार का पक्ष
दूसरी ओर, लालू प्रसाद यादव ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह मामला राजनीतिक साजिश के तहत उन्हें और उनके परिवार को फंसाने के लिए गढ़ा गया है। परिवार ने अदालत में भी अपनी बेगुनाही का दावा किया है।
निष्कर्ष
IRCTC होटल घोटाले से जुड़े ED के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आज आरोप तय होने के साथ ही लालू परिवार की कानूनी लड़ाई एक और अहम मोड़ पर पहुंच गई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह CBI के भ्रष्टाचार वाले मामले से अलग, ED का प्रॉपर्टी-लॉन्ड्रिंग वाला केस है, और दोनों मामलों में अब परिवार पर मुकदमा चलना तय हो चुका है। हालांकि आरोप तय होने का मतलब दोष सिद्ध होना नहीं है। असली फैसला ट्रायल के बाद ही आएगा। अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होनी है, जिस पर सबकी नजर रहेगी।
