बैंक हड़ताल: गांधी मैदान में बैंककर्मियों का हल्लाबोल, PLI और फाइव-डे वीक पर सरकार को दी चेतावनी

देशभर में शुक्रवार, 11 सितंबर को बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर अखिल भारतीय हड़ताल की, जिसके चलते विभिन्न स्थानों पर सामान्य बैंकिंग कामकाज प्रभावित रहा। पटना के गांधी मैदान में भी विभिन्न बैंकों और UFBU के घटक संगठनों से जुड़े कर्मचारी-अधिकारी स्थानीय कार्यक्रम में शामिल हुए। यूनियन प्रतिनिधियों ने हड़ताल को देशव्यापी स्तर पर व्यापक और सफल बताया।

पाँच दिवसीय कार्य सप्ताह — मुख्य मांग और उसका आधार

गांधी मैदान में मौजूद बैंककर्मियों ने बताया कि उनकी सबसे बड़ी मांग पाँच दिवसीय बैंकिंग की है, जिस पर मार्च 2024 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और बैंक यूनियनों के बीच औपचारिक समझौता हो चुका है। ढाई वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद यह सहमत व्यवस्था अब तक लागू नहीं हुई है।
यूनियन नेताओं ने यह भी बताया कि इस समझौते के तहत बैंककर्मियों ने खुद प्रत्येक कार्यदिवस में काम और बैंकिंग व्यवसाय के समय को 40 मिनट बढ़ाने पर सहमति दी थी, ताकि शेष शनिवारों को अवकाश घोषित करने के बावजूद ग्राहकों के लिए कुल उपलब्ध बैंकिंग समय में कोई कमी न आए। नेताओं ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार के कार्यालयों में वर्ष 1985 से ही पाँच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है, और राज्य सरकारों, जिला कार्यालयों, न्यायालयों, आयकर विभाग, शेयर बाजार, भारतीय रिजर्व बैंक तथा LIC में भी यही व्यवस्था है — जबकि इनमें से अधिकांश संस्थानों के उलट बैंक ATM, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और UPI के जरिए ग्राहकों को 24 घंटे, सातों दिन सेवाएं उपलब्ध कराते हैं।

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PLI और अन्य लंबित मुद्दे

पाँच दिवसीय बैंकिंग के अलावा UFBU ने एकतरफा और भेदभावपूर्ण PLI (परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव) व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई है। यूनियन की मांग है कि PLI में किसी भी बदलाव या क्रियान्वयन से पहले यूनियनों-एसोसिएशनों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की जाए, साथ ही बैंकिंग उद्योग के शेष लंबित मुद्दों का भी समाधान किया जाए।
गांधी मैदान में मौजूद कर्मचारियों ने कहा कि द्विपक्षीय बैठक में तमाम मुद्दों पर सहमति बनने के बावजूद फैसले लागू न होने से उनमें गहरा आक्रोश है।

एक दिन के वेतन का त्याग

हड़ताल का एक अहम पक्ष बैंककर्मियों का आर्थिक त्याग भी रहा। हड़ताल में भाग लेने वाले हर कर्मचारी और अधिकारी का उस दिन का वेतन काटा जाता है — यानी शुक्रवार की हड़ताल में शामिल हर बैंककर्मी ने अपनी सामूहिक मांग के समर्थन में एक दिन के वेतन का त्याग किया। यूनियन नेताओं का कहना है कि यह तथ्य खुद मुद्दे की गंभीरता और लंबे विलंब से उपजे असंतोष को दर्शाता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपस्थित नेताओं ने कहा कि हड़ताल की सफलता ने साबित कर दिया है कि बैंक कर्मचारी इन मुद्दों पर एकजुट हैं और वे कोई अनुचित रियायत नहीं, बल्कि पहले से हुए समझौते के क्रियान्वयन की मांग कर रहे हैं।

आगे क्या — 28-30 सितंबर और अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

UFBU ने साफ किया है कि अगर मुद्दों का समाधान नहीं हुआ, तो 28, 29 और 30 सितंबर 2026 को आगे की अखिल भारतीय हड़तालें होंगी, और उसके बाद भी बात नहीं बनी तो 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होगी। हालांकि यूनियन नेताओं ने यह भी कहा कि सरकार और IBA के पास अभी भी सार्थक वार्ता के जरिए आगे की औद्योगिक कार्रवाई टालने का मौका है।

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बिहार में बैंकिंग सेवाओं पर असर

हड़ताल के चलते बिहार के सरकारी बैंकों की शाखाएं शुक्रवार को बंद रहीं। 12 सितंबर को दूसरा शनिवार और 13 सितंबर को रविवार होने के कारण लगातार तीन दिन बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहेंगी, और बैंक अब सीधे सोमवार, 14 सितंबर को खुलेंगे। निजी बैंकों जैसे HDFC, ICICI और Axis पर हड़ताल का असर नहीं पड़ा।

निष्कर्ष

पटना के गांधी मैदान में जुटे बैंककर्मियों का प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि पाँच दिवसीय कार्य सप्ताह और PLI जैसे मुद्दों पर कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। मार्च 2024 के IBA-यूनियन समझौते के ढाई वर्ष बाद भी लागू न होने से कर्मचारियों में सरकार और प्रबंधन के प्रति गहरा अविश्वास है — और इसे जताने के लिए उन्होंने एक दिन का वेतन तक त्याग दिया। यूनियनों ने साफ कर दिया है कि अगर जल्द सार्थक वार्ता नहीं हुई, तो 28-30 सितंबर और 26 अक्टूबर से प्रस्तावित बड़े आंदोलन देश की बैंकिंग व्यवस्था को और गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

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