पटना लोक अदालत में चालान के नाम पर अफरा-तफरी, हजारों लोग निराश लौटे

पटना के गांधी मैदान में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में चालान निपटारे के लिए उमड़ी भारी भीड़, मगर गलत वाहन नंबर, दस्तावेजों की कमी और सिर्फ 90 दिन पुराने चालान की शर्त ने हजारों लोगों को निराश लौटाया।

भीड़ तो उमड़ी, राहत नहीं मिली

पटना के गांधी मैदान में आयोजित तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत में हजारों लोग अपने ट्रैफिक चालान निपटाने की उम्मीद लेकर पहुंचे। “एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना-2026” के तहत मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं में 50% तक की छूट दी जा रही थी — जैसे बिना हेलमेट (₹1000 की जगह ₹500), बिना सीट बेल्ट (₹1000 की जगह ₹500), और तेज गति से वाहन चलाने पर हल्के वाहन के लिए ₹2000 की जगह ₹1000 तक की राहत।
इसके लिए 30 से ज्यादा काउंटर लगाए गए थे, लेकिन सुबह से लगी लंबी कतारों के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों का काम पूरे दिन नहीं हो सका। कई लोग 5 घंटे तक लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौटे।
सबसे बड़ी शर्त यह रही कि सिर्फ पिछले 90 दिनों के भीतर कटे चालान ही इस लोक अदालत में लिए जा रहे थे। इससे पुराने चालान लेकर पहुंचे लोगों को कोई राहत नहीं मिल सकी, जिससे कई लोग निराश होकर लौट गए।

दस्तावेजों की कमी और गलत वाहन डेटा ने बढ़ाई परेशानी

आवेदन जमा करने के लिए RC की फोटोकॉपी और चालान की फोटोकॉपी अनिवार्य दस्तावेज बताए गए थे। लेकिन मौके पर पहुंचे कई लोगों के पास ज़रूरी कागजात पूरे नहीं थे, जिस वजह से लंबी कतार में लगने के बाद भी उनका आवेदन निरस्त हो गया।
इससे भी बड़ी समस्या वाहन के गलत रिकॉर्ड की सामने आई। कुछ लोगों की स्कूटी के नंबर पर मोटरसाइकिल का चालान कटा मिला, तो किसी के मालवाहक पिकअप वाहन के नंबर पर बाइक का चालान दर्ज था। कई मामलों में गाड़ी किसी और के नाम पर होने के बावजूद चालान उसी व्यक्ति के नंबर पर भेजा गया था।
महिलाओं की भी अलग से लंबी कतार देखी गई, जिनमें से कई अपने बच्चों की गाड़ियों के चालान निपटाने पहुंची थीं। कुछ ने घंटों इंतजार के बाद भी समाधान न मिलने की शिकायत की, जबकि कुछ लोग 50% छूट के साथ अपना चालान निपटाकर संतुष्ट भी दिखे।

व्यवस्था पर सवाल, अगली लोक अदालत 12 दिसंबर को

गांधी मैदान से पहले यह लोक अदालत 7 से 11 तारीख तक DTO कार्यालय में भी चल रही थी। कार्यक्रम बिहार के कई जिलों और देश के अन्य राज्यों में भी आयोजित हुआ। मगर पटना में वाहन खड़े करने और लाइन प्रबंधन की माकूल व्यवस्था न होने से यह साफ दिखा कि प्रशासन को इतनी बड़ी भीड़ की उम्मीद नहीं थी।
अगली राष्ट्रीय लोक अदालत 12 दिसंबर को प्रस्तावित है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन दस्तावेज सत्यापन, वाहन डेटा में सुधार और भीड़ प्रबंधन को लेकर क्या नई तैयारी करता है, ताकि लोगों को वाकई राहत मिल सके।

निष्कर्ष

राष्ट्रीय लोक अदालत का मकसद जनता को ट्रैफिक चालान की झंझट से राहत देना था, लेकिन खराब दस्तावेज सत्यापन, वाहन डेटा की गड़बड़ियों और भीड़ प्रबंधन की कमी ने इस मकसद को अधूरा छोड़ दिया। समस्या बड़ी थी, समाधान छोटा साबित हुआ — और अब सबकी निगाहें 12 दिसंबर की अगली लोक अदालत पर टिकी हैं।

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