बिहार में खनन विभाग का राजस्व 35.85% बढ़ा, 5 महीने में ₹984.99 करोड़ वसूली; 316 गिरफ्तारियां, 3,043 वाहन जब्त

पटना: बिहार के खान एवं भूतत्व विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में राजस्व वसूली के मामले में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की है। विभाग के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक ₹984.99 करोड़ का राजस्व संग्रह किया गया है। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में इसी अवधि तक विभाग ने ₹725.05 करोड़ राजस्व वसूला था। इस तरह इस साल अब तक ₹259.94 करोड़ अधिक राजस्व प्राप्त हुआ है, जो करीब 35.85 प्रतिशत की वृद्धि है।
विभाग की ओर से राजस्व बढ़ोतरी के पीछे खनन क्षेत्र में डिजिटल निगरानी, परिवहन व्यवस्था में तकनीकी बदलाव और अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई को प्रमुख कारणों में बताया गया है। विभाग का कहना है कि खनिजों के अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर नियंत्रण के लिए निगरानी व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई तेज, 316 गिरफ्तारियां

राजस्व वसूली के साथ-साथ अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन के खिलाफ भी कार्रवाई तेज की गई है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त तक 316 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 3,043 वाहनों को जब्त किया गया।
पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में इसी अवधि तक 233 गिरफ्तारियां और 2,425 वाहनों की जब्ती हुई थी। इस तरह इस साल गिरफ्तारियों और जब्त वाहनों, दोनों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
दंड वसूली में भी वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि में जहां करीब ₹35.71 करोड़ का दंड वसूला गया था, वहीं चालू वित्तीय वर्ष में अगस्त तक यह राशि बढ़कर ₹42.01 करोड़ हो गई है।
नई व्यवस्था के तहत अवैध परिवहन में इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों पर कार्रवाई के प्रावधानों को भी सख्त किया गया है। विभाग के अनुसार, कुछ मामलों में शमन शुल्क की अधिकतम राशि ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख तक की गई है। इसके अलावा खनिज के मूल्य के आधार पर भी वसूली का प्रावधान किया गया है।

डिजिटल निगरानी से खनन और परिवहन पर नजर

खनन क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए विभाग की ओर से कई तकनीकी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें VLTS (व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम), GPS, जियो-फेंसिंग, GIS मैपिंग और खनन सॉफ्ट जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
इन तकनीकों के जरिए खनिज लदे वाहनों की आवाजाही और खनन गतिविधियों की निगरानी को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग का मानना है कि डिजिटल निगरानी से खनिज परिवहन में होने वाली अनियमितताओं को रोकने और राजस्व संग्रह को बढ़ाने में मदद मिल रही है।
अवैध बालू खनन और परिवहन के खिलाफ कार्रवाई में STF यानी स्पेशल टास्क फोर्स का भी सहयोग लिया जा रहा है। इसके अलावा जिलों में खान निरीक्षकों की तैनाती और चेक-पोस्ट पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की बात कही गई है।

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ISTP से अब तक ₹58.14 करोड़ राजस्व

बिहार में दूसरे राज्यों से आने वाले खनिजों के परिवहन की निगरानी के लिए इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (ISTP) व्यवस्था लागू की गई है। यह व्यवस्था 10 जून 2026 से प्रभावी हुई है।
ISTP व्यवस्था के तहत दूसरे राज्यों से बालू, पत्थर और अन्य लघु खनिज लेकर बिहार आने वाले वाहनों के लिए ऑनलाइन ट्रांजिट पास की व्यवस्था की गई है। विभाग के अनुसार अब तक 22,203 वाहनों का पंजीकरण हो चुका है।
इस व्यवस्था से अब तक करीब ₹58.14 करोड़ का राजस्व प्राप्त होने की जानकारी दी गई है। विभाग ने ISTP व्यवस्था से सालाना करीब ₹250 करोड़ राजस्व प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है।
खनिज परिवहन के लिए वजन के आधार पर ₹60 प्रति मीट्रिक टन और आयतन के आधार पर ₹85 प्रति घनमीटर की दर निर्धारित की गई है। डिजिटल पास व्यवस्था का उद्देश्य खनिज परिवहन को ट्रैक करना और एक ही चालान पर दोबारा खनिज परिवहन जैसी गड़बड़ियों पर रोक लगाना है।

पत्थर खनन और खनिज ब्लॉकों की नीलामी पर जोर

बिहार में पत्थर खनन और अन्य खनिज संसाधनों के विकास के लिए भी विभाग की ओर से नीलामी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। नवादा, शेखपुरा, औरंगाबाद, बांका, गया और रोहतास समेत कई जिलों में पत्थर खनन ब्लॉकों से जुड़े जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन यानी DSR तैयार किए गए हैं।
विभाग के अनुसार कई ब्लॉकों की ई-नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। इसके लिए MSTC के साथ भी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। रोहतास में कुछ खनन क्षेत्रों के लिए आवश्यक पर्यावरण और वन संबंधी मंजूरी की प्रक्रिया भी जारी है।
इसके अलावा महत्वपूर्ण और सामरिक खनिजों के ब्लॉकों की नीलामी को लेकर भी राज्य में गतिविधियां बढ़ी हैं। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए पटना में रोड-शो और कार्यशालाओं का आयोजन किया गया है।

15 अक्टूबर के बाद बालू खनन शुरू करने की तैयारी

मानसून अवधि के कारण बालू खनन पर लगी रोक के बाद अब राज्य में दोबारा खनन गतिविधियां शुरू करने की तैयारी की जा रही है। विभाग की ओर से 15 अक्टूबर के बाद बालू खनन शुरू करने की तैयारी की जानकारी दी गई है।
बालू खनन दोबारा शुरू होने के साथ ही विभाग के सामने एक तरफ राजस्व बढ़ाने और दूसरी तरफ अवैध खनन पर नियंत्रण रखने की चुनौती रहेगी।
नदियों की गाद से निपटने की भी तैयारी
राज्य की कई नदियों में जमा होने वाली गाद यानी सिल्ट की समस्या को लेकर भी विभाग की ओर से जिला स्तर पर सर्वेक्षण कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके लिए जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन तैयार करने को कहा गया है।
विभाग की योजना है कि उपयुक्त क्षेत्रों की पहचान के बाद नियमानुसार खनिज सामग्री की नीलामी की जा सके। इससे एक तरफ नदियों में जमा गाद को हटाने में मदद मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ सरकार को राजस्व भी प्राप्त हो सकता है।

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GPS और ‘खनन सिपाही’ पर भी फोकस

दूसरे राज्यों से बिहार आने वाले खनिज लदे वाहनों की निगरानी के लिए GPS व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी है। इसका उद्देश्य वाहनों की वास्तविक समय में लोकेशन की निगरानी करना और निर्धारित मार्ग से होने वाले विचलन पर नजर रखना है।
इसके साथ ही विभाग की ओर से जमीनी स्तर पर निगरानी के लिए ‘खनन सिपाही’ नाम से नए पद के सृजन की दिशा में भी काम किए जाने की जानकारी सामने आई है।

राजस्व बढ़ोतरी के साथ अवैध खनन रोकना बड़ी चुनौती

खनन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि चालू वित्तीय वर्ष में राजस्व संग्रह में पिछले साल की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 31 अगस्त तक ₹984.99 करोड़ की वसूली और 35.85 प्रतिशत की वृद्धि विभाग के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
वहीं, अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ 316 गिरफ्तारियां तथा 3,043 वाहनों की जब्ती यह दिखाती है कि प्रवर्तन पर भी जोर दिया जा रहा है। हालांकि आगे बड़ी चुनौती यह होगी कि डिजिटल निगरानी, GPS, ISTP और सख्त दंड के प्रावधानों को जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।
बालू और पत्थर जैसे खनिजों की मांग लगातार बनी रहने के कारण सरकार के सामने राजस्व बढ़ाने और अवैध खनन पर नियंत्रण—दोनों लक्ष्यों को साथ लेकर चलने की चुनौती रहेगी।

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