बिहार के कला, संस्कृति एवं युवा कार्य मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि बिहार में लंबे समय से लंबित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) के कैंपस को केंद्र सरकार की सहमति मिल गई है। उन्होंने कहा कि यह मांग वर्षों से बिहार के कलाकार उठाते रहे हैं, और उनके मंत्री बनने के बाद यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया, जिसे बाद में केंद्र को भेजा गया।
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल की योजना कैंपस को पटना और उसके 20-25 किलोमीटर के दायरे में स्थापित करने की है, हालांकि अंतिम स्थान जमीन की उपलब्धता और मांग को देखते हुए तय होगा। यह जानकारी उस वक्त और पुख्ता हो गई जब खुद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस मंजूरी के लिए सार्वजनिक रूप से आभार जताया। राज्य सरकार निर्माण लागत का आधा हिस्सा वहन करेगी।
आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र और मिथिला पेंटिंग का विश्व रिकॉर्ड
मंत्री ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों के लिए आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत 38 जिलों में शास्त्रीय गायन, भरतनाट्यम, कथक, तबला, ढोलक और हारमोनियम वादन जैसी विधाओं में करीब 3,000 बच्चों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, ललित कला अकादमी, भारतीय नृत्य कला मंदिर और मिथिला चित्रकला संस्थान जैसी संस्थाओं के जरिए कार्यशालाओं में 1,000 से अधिक बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं।
मंत्री ने मिथिला चित्रकला संस्थान, मधुबनी की एक उपलब्धि का विशेष उल्लेख किया — रामचरितमानस पर आधारित 108 मीटर लंबी मिथिला पेंटिंग, जिसे उन्होंने वर्ल्ड रिकॉर्ड बताया। इसी क्रम में, दिल्ली में आयोजित होने वाले वृक्ष सम्मेलन में नेशनल क्राफ्ट म्यूजियम की ओर से मिथिला चित्रकला संस्थान को स्टॉल लगाने का न्योता मिला है।
पेंशन, सोमनाथ दर्शन और सांस्कृतिक कैलेंडर
विभाग की ओर से बताया गया कि ‘मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना’ के तहत 50 वर्ष से अधिक उम्र के करीब 411 कलाकारों को ₹3,000 प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है। एक अधिकारी ने आगे स्पष्ट किया कि जिलाधिकारी स्तर पर करीब 99% आवेदन स्वीकृत होते हैं और विभाग स्तर पर लंबित मामलों का निपटारा एक महीने के भीतर कर दिया जाता है।
बिहार और केंद्र सरकार की सहमति से आर्थिक रूप से कमजोर करीब 1,100 ग्रामीण श्रद्धालुओं को सोमनाथ मंदिर दर्शन कराया गया, जिसे मंत्री ने सरदार पटेल द्वारा मंदिर के जीर्णोद्धार के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जोड़ा। इसके अलावा, राज्यभर में करीब 240 सांस्कृतिक कैलेंडर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें प्रवेश निःशुल्क है। हर महीने के दूसरे शुक्रवार को ‘शुक्र गुलजार‘ और चौथे शनिवार को ‘शनि बहार‘ जैसे नियमित कार्यक्रम पटना में होते हैं। ‘हर घर तिरंगा यात्रा’ के तहत 9 से 17 अगस्त तक मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में जेपी स्टैच्यू से कारगिल चौक तक करीब 10,000 लोगों के साथ यात्रा निकाली गई, जो ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष रही। संत रविदास जी के 650वें जन्मवर्ष पर बापू सभागार में भी एक बड़ा आयोजन किया गया।
फिल्म नीति, कलाकार पंजीकरण पोर्टल और स्कॉलरशिप
विभाग ने कलाकार पंजीकरण पोर्टल बनाया है, जिसके जरिए कलाकार रजिस्ट्रेशन कराकर स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भागीदारी के लिए चयनित होते हैं — इसका अंतिम फैसला जिला अधिकारी स्तर पर लिया जाता है। फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए बिहार फिल्म पोर्टल पर अब तक 862 कलाकार, 148 निर्माता और 29 सेवा प्रदाता ऑनबोर्ड हो चुके हैं, और 46 फिल्मों, 2 वेब सीरीज तथा 11 डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग को अनुमति दी जा चुकी है। एक अधिकारी ने यह भी बताया कि अभिनेता सुनील शेट्टी के साथ अक्टूबर से एक नई फिल्म परियोजना को लेकर प्रारंभिक बातचीत चल रही है।
फिल्म प्रोत्साहन नीति के तहत अधिकतम ₹4 करोड़ तक की सब्सिडी दी जाती है — बिहार से संबंधित भाषा की फिल्मों पर लागत का 50% और अन्य पर 25%, जिसकी कोई न्यूनतम सीमा नहीं है। इसके अलावा कला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 47 मेधावी छात्रों को ₹30,46,000 की छात्रवृत्ति दी जा रही है, जिसमें कोलकाता और पुणे में फिल्म अध्ययन कर रहे छात्रों की पूरी ट्यूशन फीस राज्य सरकार वहन कर रही है। ‘मुख्यमंत्री गुरु-शिष्य परंपरा‘ योजना के तहत विलुप्त होती पारंपरिक कलाओं के गुरुओं को ₹15,000, सहायकों को ₹7,500 और शिष्यों को ₹3,000 मासिक अनुदान दिया जाता है।

अटल कला भवन, गोलघर जीर्णोद्धार और पुरातात्विक धरोहर
बिहार के 38 जिलों में ‘अटल कला भवन‘ बनाए जा रहे हैं, जो पूरी तरह गैर-राजनीतिक सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए आरक्षित रहेंगे। बेतिया, मोतिहारी और मुजफ्फरपुर में 2,200 क्षमता वाले बड़े ऑडिटोरियम बन रहे हैं, जबकि शेष जिलों में 620 क्षमता वाले भवन बनाए जा रहे हैं। इसी क्रम में पटना के ऐतिहासिक गोलघर के जीर्णोद्धार की योजना को अंतिम रूप दिया जा चुका है और भवन निर्माण विभाग अगले दो महीनों में इसका टेंडर जारी करेगा; सीढ़ियों को आम पर्यटकों के लिए खोलने का फैसला उनकी मजबूती के आकलन के बाद लिया जाएगा।
लाल पहाड़ी के संरक्षण के लिए ₹29.28 करोड़ की परियोजना शुरू की जा रही है, वहीं वैशाली में बुद्ध सम्यक दर्शन सह स्मृति स्तूप के संग्रहालय सुदृढ़ीकरण के लिए 35 पद संविदा आधार पर भरे जा रहे हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के साथ भी विभाग ने MOU किया है ताकि केंद्र सरकार के अधीन पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण में राज्य सहयोग कर सके।
ज्ञान भारतम मिशन: 8 लाख पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण
मंत्री ने बताया कि बिहार में अब तक करीब 8 लाख पांडुलिपियां चिह्नित की जा चुकी हैं — जो सरकारी संस्थानों के साथ-साथ दरभंगा-मधुबनी जैसे इलाकों में निजी संग्रहकर्ताओं के पास भी मौजूद हैं। इसके लिए केंद्र सरकार के ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत लगभग ₹6.24 करोड़ की प्रशासनिक राशि खर्च की जा रही है, जिसे बाद में केंद्र सरकार वापस करेगी।
एक अधिकारी ने विस्तार से बताया कि अभी पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटाइजेशन का कार्य चल रहा है — फटे पन्नों की मरम्मत के साथ-साथ स्कैनिंग की जा रही है। ब्राह्मी, कैथी और प्राचीन संस्कृत जैसी लिपियों में लिखी पांडुलिपियों को AI के जरिए हिंदी और अंग्रेजी में लिप्यंतरित किया जाएगा, और इनका सारांश (जिस्ट) भी निकाला जा सकेगा। पूरा डेटा ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा ताकि देश-विदेश के शोधार्थी इसे देख सकें। जननायक कर्पूरी ठाकुर की स्मृति में एक लाइब्रेरी भी बनाई गई है, जहां सभी वर्गों के छात्र अध्ययन कर सकते हैं।
पत्रकारों के तीखे सवाल — पारदर्शिता और जवाबदेही पर विभाग का जवाब
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों ने कई तीखे सवाल भी उठाए। एक पत्रकार ने पटना की दीवारों पर बनाई गई पेंटिंग्स की साफ-सफाई पर सवाल उठाया, जिस पर अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह काम स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत होता है, कला-संस्कृति विभाग के तहत नहीं। सोमनाथ दर्शन यात्रा में पत्रकारों की भागीदारी और सूची को लेकर भी सवाल उठे, जिस पर मंत्री ने संक्षिप्त जवाब दिया।
महोत्सवों में 60-70% राशि स्थानीय कलाकारों पर खर्च होने के नियम के पालन को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने कहा कि वे स्थानीय कलाकारों को 70% और बाहरी कलाकारों को 30% राशि देने की व्यवस्था तय करने वाले हैं। बिचौलियों के जरिए कलाकारों के चयन की शिकायत पर अधिकारी ने कहा कि विभाग स्तर पर ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं है, लेकिन जिला स्तर पर शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी। बजट के कम आवंटन और अखर्चित राशि (अनस्पेंड फंड) को लेकर भी सवाल हुआ, जिस पर अधिकारी ने बताया कि कल्चर डायरेक्टरेट का बजट लगभग पूरी तरह खर्च होता है, जबकि पुरातत्व और संग्रहालय से जुड़ी निर्माण योजनाओं में समय लगना स्वाभाविक है। एक पत्रकार ने गोस्वामी तुलसीदास जयंती को भी रविदास जयंती जितना महत्व देने का सुझाव दिया, जिसे मंत्री ने सकारात्मक रूप से स्वीकार किया और आगे इस पर ध्यान देने की बात कही।
निष्कर्ष
बिहार के कला, संस्कृति एवं युवा कार्य विभाग ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए NSD कैंपस की मंजूरी जैसी बड़ी उपलब्धि के साथ-साथ पेंशन, स्कॉलरशिप, फिल्म नीति, पांडुलिपि संरक्षण और सांस्कृतिक भवनों के निर्माण जैसी कई योजनाओं की जानकारी सार्वजनिक की। साथ ही, पत्रकारों के सवालों ने पारदर्शिता, स्थानीय कलाकारों की भागीदारी और बजट खर्च जैसे मुद्दों पर विभाग को जवाबदेह बनाने की कोशिश की। आने वाले महीनों में गोलघर जीर्णोद्धार, अटल कला भवन निर्माण और NSD कैंपस की स्थापना जैसी परियोजनाओं की प्रगति पर सबकी नजर रहेगी।
