बांकीपुर में भाजपा का 30 साल पुराना किला ढहा, प्रशांत किशोर ने दर्ज की बड़ी जीत

बिहार की राजनीति के लिए 3 अगस्त का दिन बेहद अहम साबित हुआ। पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपनी पहली ही चुनावी लड़ाई में शानदार जीत हासिल की। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी नीरज कुमार को लगभग 19,324 वोटों के भारी अंतर से हराया। इस जीत के साथ ही एक ऐसी सीट पर भाजपा का वर्चस्व टूट गया, जिस पर पार्टी वर्ष 1995 से लगातार काबिज रही थी।

चुनाव आयोग के अनुसार प्रशांत किशोर को कुल 64,151 वोट मिले, जबकि भाजपा के नीरज कुमार को 44,827 वोट के साथ संतोष करना पड़ा। राष्ट्रीय जनता दल की उम्मीदवार रेखा कुमारी 14,273 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं, जो जीत के अंतर से भी कम है। यह आंकड़ा साफ दिखाता है कि मुकाबला शुरू से ही जन सुराज के पक्ष में एकतरफा होता चला गया।

शुरुआत से ही आगे रहे प्रशांत किशोर

बांकीपुर सीट पर 32 राउंड में मतगणना हुई। सुबह मतगणना शुरू होते ही पहले राउंड से ही प्रशांत किशोर बढ़त बनाए हुए थे। बीच के राउंड में यह बढ़त लगातार बढ़ती गई और चुनाव आयोग की गिनती वेबसाइट पर राउंड की संख्या को लेकर कुछ देर तकनीकी गड़बड़ी भी देखने को मिली, हालांकि इससे अंतिम परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ा। बताया जा रहा है कि यह सीट नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देने की वजह से खाली हुई थी, जिसके चलते यहां उपचुनाव कराना पड़ा।

बांकीपुर में मतदान का प्रतिशत भी चर्चा में रहा। 30 जुलाई को हुए मतदान में महज करीब 34.30% वोटिंग हुई, जो 2025 के विधानसभा आम चुनाव के मुकाबले काफी कम रही। कम मतदान को लेकर भाजपा और जन सुराज, दोनों तरफ से अलग-अलग तर्क दिए गए। भाजपा इसे शहरी सीट की स्वाभाविक प्रवृत्ति बता रही थी, तो जन सुराज इसे बदलाव के पक्ष में शांत मतदान का संकेत मान रहा था।

प्रशांत किशोर बोले, अपराधी को मुख्यमंत्री न बनाएं

जीत के बाद प्रशांत किशोर ने इसे जनता का स्पष्ट संदेश बताया। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से अपील की कि बिहार में किसी ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री न बनाया जाए जिसकी छवि सवालों में हो, क्योंकि इससे राज्य की तरक्की प्रभावित होगी। उन्होंने बांकीपुर की जनता का आभार जताते हुए कहा कि जिन लोगों ने वोट नहीं दिया, उनका भरोसा जीतने के लिए पार्टी और मेहनत करेगी। जीत की खबर फैलते ही जन सुराज कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल देखा गया। पूर्णिया में पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह के समर्थक ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते नजर आए, तो दरभंगा के लहेरियासराय टावर परिसर में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी कर एक-दूसरे को गुलाल और मिठाई खिलाई। कुछ स्थानीय नेताओं ने इसे 2030 के विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर के मुख्यमंत्री बनने की दिशा में पहला कदम भी बता दिया।

मुख्यमंत्री समेत सभी दलों की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रशांत किशोर को जीत की बधाई दी और कहा कि लोकतंत्र के इस महापर्व में जनता के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि पार्टी बांकीपुर में मिली हार के कारणों की समीक्षा करेगी, हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि सीट पर पार्टी का विकास कार्य आगे भी जारी रहेगा।

राष्ट्रीय जनता दल की ओर से नेता शक्ति यादव ने कहा कि जनता के फैसले को स्वीकार करते हैं, लेकिन जो लोग यह दावा करते थे कि बांकीपुर से उन्हें कोई नहीं हरा सकता, जनता ने उनका वह घमंड तोड़ दिया है।                 समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया पर भाजपा पर तंज कसते हुए इस जीत को छात्रों की एकता और पेपर लीक को लेकर अभिभावकों के आक्रोश का सामूहिक परिणाम बताया।

एक ही दिन तीन राज्यों में उपचुनाव, तीन अलग नतीजे

गौरतलब है कि तीन अगस्त को सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश और गुजरात में भी एक-एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव के नतीजे आए। मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को हराकर पार्टी को बड़ी जीत दिलाई, जबकि गुजरात की मांजलपुर सीट पर भाजपा के सतेंद्रभाई पटेल ने कांग्रेस प्रत्याशी को तीस हजार से अधिक वोटों के भारी अंतर से पराजित कर अपना गढ़ बरकरार रखा। इस तरह तीनों राज्यों में तीन अलग-अलग दलों को जीत मिली, जिससे यह दिन राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक विश्लेषण का विषय बन गया।

निष्कर्ष

बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम बिहार की राजनीति के लिए एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा के तीन दशक पुराने गढ़ में मिली यह हार पार्टी के लिए आत्मचिंतन का विषय बन गई है, वहीं जन सुराज के लिए यह पहली विधानसभा जीत आगामी चुनावों से पहले एक बड़ा मनोवैज्ञानिक बढ़त साबित हो सकती है। हालांकि एक उपचुनाव के नतीजे से पूरे राज्य की राजनीतिक तस्वीर बदल जाने का दावा जल्दबाजी होगी, लेकिन कम मतदान के बावजूद मिली यह जीत आने वाले समय में बिहार की सियासी बिसात पर नए समीकरण जरूर बना सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा अपनी समीक्षा के आधार पर क्या रणनीतिक बदलाव करती है और जन सुराज इस जीत को कैसे आगे भुनाता है।

डिस्क्लेमर: इस खबर के आंकड़े विश्वसनीय समाचार स्रोतों और भारत निर्वाचन आयोग के उपलब्ध अपडेट्स पर आधारित हैं। अंतिम व आधिकारिक पुष्टि के लिए निर्वाचन आयोग की वेबसाइट अवश्य देखें। यह खबर तथ्यों पर आधारित है और किसी दल या व्यक्ति विशेष के पक्ष-विपक्ष में नहीं है।

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