मध्य एशिया में भारत की कूटनीतिक पकड़ को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम सामने आया है। उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियोर सईदोव फिलहाल चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं। इसी क्रम में सोमवार को उनकी मुलाकात विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हुई। सूत्रों के मुताबिक इन बैठकों में व्यापार, माइनिंग, रेयर अर्थ मिनरल्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
अब माइनिंग सेक्टर पर टिकी हैं निगाहें
बैठक के बाद जयशंकर ने साफ किया कि भारत, उज्बेकिस्तान को अपने विस्तारित पड़ोस का अहम हिस्सा मानता है। उनका कहना था कि दोनों देशों के बीच लोगों, विचारों और व्यापार का रिश्ता सदियों पुराना है, लेकिन अब यह रिश्ता नए दौर में प्रवेश कर रहा है। निर्माण, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा में सहयोग के बाद अब दोनों देशों की नजर माइनिंग सेक्टर, खासतौर पर रेयर अर्थ मिनरल्स पर है। जो आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
जयशंकर के मुताबिक, भारत-उज्बेकिस्तान के बीच मौजूदा व्यापार करीब एक अरब डॉलर का है, लेकिन दोनों देशों की असल क्षमता इससे कहीं ज्यादा है। यही वजह है कि अब व्यापार और निवेश को नई रफ्तार देने पर जोर दिया जा रहा है।
राष्ट्रपति मुर्मू बोलीं- संभावनाएं अपार हैं
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी उज्बेक विदेश मंत्री से मुलाकात के दौरान रेयर अर्थ मिनरल्स, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी और माइनिंग में सहयोग की अपार संभावनाओं की बात कही। उन्होंने भारत-उज्बेकिस्तान बिजनेस फोरम को भी सराहा और कहा कि इससे दोनों देशों के निवेशकों और उद्योग जगत को नई दिशा मिलेगी।
राष्ट्रपति के मुताबिक, भारत के ITEC और स्कॉलरशिप कार्यक्रमों के जरिए अब तक तीन हजार से ज्यादा उज्बेक अधिकारी, पेशेवर और छात्र प्रशिक्षण ले चुके हैं। वहीं दूसरी ओर, 16,000 से अधिक भारतीय छात्र इस वक्त उज्बेकिस्तान में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’, NAM पर भारत का साथ
इस मुलाकात में एक और बड़ा ऐलान हुआ। जयशंकर ने 2027-29 के लिए गुटनिरपेक्ष आंदोलन यानी NAM की अध्यक्षता के लिए उज्बेकिस्तान को भारत के समर्थन की घोषणा की। साथ ही, BRICS में साझेदार देश के तौर पर भारत की अध्यक्षता के दौरान सहयोग के लिए उज्बेकिस्तान का आभार भी जताया गया।
जयशंकर ने यह भी कहा कि आतंकवाद, उग्रवाद और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे मुद्दों पर भारत और उज्बेकिस्तान की सोच एक जैसी है। उन्होंने उज्बेकिस्तान के आतंकवाद-विरोधी सख्त रुख की तारीफ करते हुए कहा कि दोनों देशों ने हर तरह के आतंकवाद और सीमापार आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई हुई है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, उज्बेक विदेश मंत्री की इस यात्रा को भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों में एक नया मोड़ माना जा रहा है। व्यापार और शिक्षा जैसे परंपरागत क्षेत्रों से आगे बढ़कर अब माइनिंग और रेयर अर्थ मिनरल्स जैसे रणनीतिक सेक्टरों में सहयोग की पहल, भारत की मध्य एशिया नीति के लिए एक बड़ा संकेत है। आतंकवाद पर साझा रुख और NAM अध्यक्षता में समर्थन जैसे कदम बताते हैं कि यह रिश्ता अब सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी नई ऊंचाइयां छू रहा है। आने वाले दिनों में इस साझेदारी के ठोस नतीजों में बदलने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
