पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर सत्ता परिवर्तन की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है। इस बार वजह बने हैं खुद शहबाज शरीफ सरकार में गृह मंत्री मोहसिन नकवी, जिन्हें सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का करीबी माना जाता है। नकवी ने सार्वजनिक मंच से ऐसा बयान दे दिया है, जिसने पड़ोसी मुल्क की सियासत में भूचाल ला दिया है।
क्या कहा मोहसिन नकवी ने? मीडिया से बातचीत में गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने दावा किया कि पाकिस्तान की प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि देश की व्यवस्था में भ्रष्टाचार इस कदर जड़ जमा चुका है कि इसमें न्यायपालिका, नौकरशाही, नेता और बैंकर, सभी समान रूप से शामिल हैं।
नकवी के अनुसार, “मुझे नहीं लगता कि पाकिस्तान के इतिहास में कभी इतना बड़ा घोटाला हुआ है, जिसमें जज, नौकरशाह, राजनेता और बैंकर सभी शामिल रहे हों। इक्कीस सालों से पैसे का अवैध लेन-देन चलता रहा और लोग इसे लेते रहे। हम इसके लिए जिम्मेदार हर एक व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।”
गृह मंत्री का यह बयान इस्लामाबाद में आयोजित एक आर्थिक समिट के दौरान आया, जहां उन्होंने माना कि मौजूदा ढर्रे पर देश को आगे चलाना अब नामुमकिन हो गया है।मीडिया से बातचीत में गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने दावा किया कि पाकिस्तान की प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि देश की व्यवस्था में भ्रष्टाचार इस कदर जड़ जमा चुका है कि इसमें न्यायपालिका, नौकरशाही, नेता और बैंकर, सभी समान रूप से शामिल हैं।
नकवी के अनुसार, “मुझे नहीं लगता कि पाकिस्तान के इतिहास में कभी इतना बड़ा घोटाला हुआ है, जिसमें जज, नौकरशाह, राजनेता और बैंकर सभी शामिल रहे हों। इक्कीस सालों से पैसे का अवैध लेन-देन चलता रहा और लोग इसे लेते रहे। हम इसके लिए जिम्मेदार हर एक व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।”
गृह मंत्री का यह बयान इस्लामाबाद में आयोजित एक आर्थिक समिट के दौरान आया, जहां उन्होंने माना कि मौजूदा ढर्रे पर देश को आगे चलाना अब नामुमकिन हो गया है।
अपनी ही सरकार पर सवाल क्यों? गौरतलब है कि मोहसिन नकवी खुद शहबाज शरीफ सरकार का हिस्सा हैं, ऐसे में उनके इस बयान को अपनी ही सरकार की पोल खोलने वाला माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नकवी तेजी से एक मीडिया प्रमुख से एक ताकतवर राजनीतिक चेहरे के रूप में उभरे हैं और लंबे समय से उनकी महत्वाकांक्षाएं भी चर्चा में रही हैं। कहा जा रहा है कि सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की उन्हें करीबी सरपरस्ती हासिल है, जिसके चलते यह अटकलें और तेज हो गई हैं कि पाकिस्तान में सत्ता समीकरण बदलने वाले हैं। हालांकि पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि यह मोहसिन नकवी का निजी बयान है और इसका सेना से कोई सीधा संबंध नहीं है।
आर्थिक संकट भी बड़ी वजह नकवी का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब पाकिस्तान अपने इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। देश पर कुल विदेशी कर्ज का बोझ करीब 137 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसमें अकेले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ का हिस्सा 8.8 अरब डॉलर है। कुल सरकारी कर्ज देश की जीडीपी के करीब 70 से 80 प्रतिशत तक जा पहुंचा है, जो किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक स्तर माना जाता है।
पाकिस्तान में तख्तापलट का इतिहास
पाकिस्तान का इतिहास सैन्य हस्तक्षेप और तख्तापलट की घटनाओं से भरा रहा है। आइए जानते हैं अब तक हुए बड़े तख्तापलट के बारे में:
पहला तख्तापलट (1958): तत्कालीन राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा ने संविधान भंग कर मार्शल लॉ लागू किया और जनरल अय्यूब खान को मुख्य मार्शल लॉ प्रशासक नियुक्त किया। लेकिन तेरह दिन बाद ही अय्यूब खान ने इस्कंदर मिर्जा को देश से निर्वासित कर स्वयं सत्ता संभाल ली। अय्यूब खान 1958 से 1969 तक सत्ता में रहे।
दूसरा तख्तापलट (1977): जनरल जिया-उल-हक ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की चुनी हुई सरकार का तख्तापलट किया। भुट्टो को गिरफ्तार किया गया और 1979 में उन्हें फांसी दे दी गई। जिया-उल-हक 1977 से 1988 तक सत्ता में रहे और बाद में एक विमान दुर्घटना में उनकी मौत हो गई।
तीसरा तख्तापलट (1999): कारगिल युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ को बर्खास्त करने की कोशिश की। इसके जवाब में सेना ने नवाज शरीफ सरकार को उखाड़ फेंका और मुशर्रफ ने देश की कमान संभाल ली। मुशर्रफ 1999 से 2008 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे।
निष्कर्ष
मोहसिन नकवी के इस बयान ने पाकिस्तान की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां गृह मंत्री होने के नाते उनका यह कबूलनामा व्यवस्था की गहरी नाकामी को उजागर करता है, वहीं दूसरी तरफ इसे सेना और नकवी की बढ़ती राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पाकिस्तान पहले भी तीन बार सैन्य तख्तापलट झेल चुका है, ऐसे में मौजूदा आर्थिक संकट और सत्ता के भीतर मची उठापटक ने एक बार फिर उन्हीं आशंकाओं को हवा दे दी है। हालांकि सेना ने फिलहाल इस बयान से खुद को अलग बताया है, लेकिन आने वाले दिनों में पाकिस्तान की सियासी हलचल पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी। स्थिति साफ होने तक इसे अटकलों के दायरे में ही देखा जाना उचित होगा, क्योंकि आधिकारिक तौर पर किसी सत्ता परिवर्तन की पुष्टि नहीं हुई है।
