बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट पर चुनाव से पहले जेडीयू खेमे में सियासी घमासान शुरू हो गया है। मोकामा से जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और मौजूदा MLC नीरज कुमार के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। अनंत सिंह ने आगामी MLC चुनाव में डॉ. अनुज सिंह का समर्थन करने का ऐलान करते हुए साफ कह दिया कि वे नीरज कुमार का साथ नहीं देंगे।
अनंत सिंह के इस बयान ने न सिर्फ पटना स्नातक सीट के चुनावी समीकरण को बदल दिया है, बल्कि जेडीयू के भीतर आंतरिक खींचतान को भी सतह पर ला दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर से ही उठी यह बगावत नीतीश कुमार के लिए नई सिरदर्दी बन सकती है।
बाढ़ के शराबकांड पीड़ितों से मिलने पहुंचे अनंत सिंह, फिर दिया राजनीतिक बयान
अनंत सिंह गुरुवार को बाढ़ के बेड़ना गांव पहुंचे, जहां जहरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत हो गई थी। यह चार दिनों में दूसरा मौका था जब अनंत सिंह पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे। उनके साथ डॉ. अनुज सिंह और बाढ़ से विधायक डॉ. सियाराम सिंह भी मौजूद थे। अनंत सिंह ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर आर्थिक मदद दी।
पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में अनंत सिंह ने आगामी एमएलसी चुनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दे दिया। उन्होंने दो टूक कहा, “जो मेरे साथ रहेगा, हम उसका साथ देंगे।” इसी के साथ उन्होंने साफ कर दिया कि पटना स्नातक सीट पर वे डॉ. अनुज सिंह का पूरा समर्थन करेंगे और नीरज कुमार के साथ नहीं जाएंगे।
अनंत सिंह ने यह भी दावा किया कि पटना स्नातक सीट के अंतर्गत आने वाले सभी 26 विधानसभा क्षेत्रों में उनके समर्थक डॉ. अनुज सिंह के पक्ष में खड़े होंगे। इस मौके पर मौजूद डॉ. अनुज सिंह ने भी कहा कि जब अनंत सिंह जैसे बड़े नेता का समर्थन मिल गया है तो अब सोचने की जरूरत नहीं है।
नीरज कुमार का कार्यकाल खत्म, तीन बार जीत चुकी सीट पर नई चुनौती
बिहार विधान परिषद के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, नीरज कुमार पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जेडीयू के मौजूदा MLC हैं और उनका कार्यकाल 16 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। चुनाव आयोग ने 2026 में होने वाली नियमित रिक्तियों में पटना स्नातक सीट को भी शामिल किया है। नीरज कुमार इस सीट से लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके हैं, ऐसे में इस बार उनके सामने जीत की हैट्रिक को चौके में बदलने की चुनौती होगी। हालांकि जेडीयू ने अभी तक 2026 चुनाव के लिए उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की है।
गौरतलब है कि यह चुनाव सामान्य विधानसभा मतदाताओं से अलग होता है। इसमें संबंधित क्षेत्र के पात्र स्नातक मतदाता ही वोट डालते हैं, यानी वे लोग जो उस क्षेत्र के सामान्य निवासी हों और निर्धारित अवधि से पहले कम से कम तीन साल से स्नातक हों।
अनंत सिंह और नीरज कुमार, दोनों जेडीयू से जुड़े प्रमुख चेहरे रहे हैं, लेकिन दोनों के बीच राजनीतिक मतभेद की चर्चा पहले भी सामने आती रही है। अनंत सिंह के ताजा बयान के बाद यह मतभेद अब खुलकर सामने आ गया है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि डॉ. अनुज सिंह किस पार्टी के समर्थन से या निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगे। अगर वे निर्दलीय मैदान में उतरते हैं और अनंत सिंह सक्रिय रूप से उनके समर्थन में जुटते हैं, तो पटना स्नातक सीट का मुकाबला बेहद दिलचस्प हो सकता है।

नवंबर में खाली होंगी बिहार विधान परिषद की 8 सीटें, जन सुराज भी मैदान में उतरने को तैयार
बिहार में 2026 में विधान परिषद की कुल 8 सीटों पर चुनाव होने हैं, जिनमें चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र – पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी तथा चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र – पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण शामिल हैं। इन सभी सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त हो रहा है।
फिलहाल चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है, लेकिन सितंबर 2026 में ही चुनाव कार्यक्रम घोषित होने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी और मतदान की तारीखें स्पष्ट होंगी। इन आठ सीटों पर जन सुराज पार्टी भी अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है, और जल्द ही इसकी घोषणा होने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
पटना स्नातक सीट पर अनंत सिंह के इस सियासी दांव ने जेडीयू के भीतर की गुटबाजी को सार्वजनिक कर दिया है। नीरज कुमार जैसे अनुभवी और तीन बार के विजेता नेता के सामने अब पार्टी के भीतर से ही चुनौती खड़ी हो गई है। आने वाले दिनों में जेडीयू का आधिकारिक रुख, डॉ. अनुज सिंह की उम्मीदवारी की दिशा, और चुनाव आयोग की अधिसूचना ये तीनों कारक तय करेंगे कि यह सियासी घमासान किस मोड़ पर पहुंचता है। इंड बिहार आपको इस चुनाव से जुड़ी हर अपडेट सबसे पहले देता रहेगा।
