श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर पटना के इस्कॉन मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना को देखते हुए यातायात पुलिस ने शुक्रवार को मंदिर और आसपास के इलाकों में वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी है। बुद्ध मार्ग और इस्कॉन मंदिर की ओर निजी वाहनों के साथ-साथ व्यावसायिक वाहनों को भी जाने की अनुमति नहीं होगी। यह व्यवस्था शुक्रवार सुबह से जन्माष्टमी कार्यक्रम की समाप्ति तक लागू रहेगी।
यातायात SP सागर कुमार के मुताबिक, जीपीओ फ्लाईओवर से बुद्ध मार्ग की ओर आने वाले वाहनों पर रोक रहेगी, वहीं अदालतगंज मार्ग पर दोनों तरफ से वाहनों का आवागमन बंद रहेगा। कोतवाली की ओर से आने वाले वाहनों को डाकबंगला चौराहा होते हुए पटना जंक्शन भेजा जाएगा, जबकि जीपीओ के नीचे से इस्कॉन मंदिर जाने वाले वाहन आर-ब्लॉक की तरफ मोड़े जाएंगे। फ्रेजर रोड, श्रीनिवास पथ और बंदर बगीचा से बुद्ध मार्ग की ओर आने वाले रास्ते भी बंद रहेंगे।
पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था
पुलिस ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि प्रतिबंधित इलाके में वाहन लेकर न जाएं, बल्कि निर्धारित पार्किंग स्थलों का इस्तेमाल करें। इसके लिए मौर्यालोक, बुद्ध स्मृति पार्क, जीपीओ, मल्टी-मोडल हब और मिलर हाईस्कूल में पार्किंग की व्यवस्था की गई है।
भीड़ को नियंत्रित करने और जेबकतरी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए तीन डीएसपी, 50 पुलिस अधिकारी और 150 जवानों की तैनाती की गई है। सादे कपड़ों में भी पुलिसकर्मी इलाके में निगरानी रखेंगे, ताकि भीड़ का फायदा उठाकर कोई पर्स, मोबाइल या गहने न चुरा सके।
जन्माष्टमी 2026: तारीख और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार इस साल जन्माष्टमी शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में मध्यरात्रि को हुआ था, इसीलिए मुख्य पूजा निशीथ काल यानी रात 12 बजे के आसपास की जाती है। स्मार्त परंपरा (गृहस्थ परिवार) के लोग 4 सितंबर को ही व्रत रखेंगे, जबकि इस्कॉन मंदिर और वैष्णव समुदाय इसे अगले दिन 5 सितंबर, शनिवार को भी मना सकते हैं।
निशीथ काल पूजा मुहूर्त को लेकर पंचांगों में मामूली अंतर है — कुछ पंचांगों के अनुसार यह रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक (करीब 45 मिनट) रहेगा, तो कुछ के अनुसार रात 12:45 से 1:30 बजे तक। इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:30 बजे से 5:15 बजे तक रहेगा, जिसमें व्रत रखने वाले श्रद्धालु स्नान कर संकल्प ले सकते हैं। चूंकि स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए पूजा से पहले अपने क्षेत्र का पंचांग जरूर देख लें।
पूजा विधि और व्रत के नियम
जन्माष्टमी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। मध्यरात्रि पूजा से पहले लड्डू गोपाल को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं, फिर नए वस्त्र, मुकुट, मोरपंख, वैजयंती माला और बांसुरी से श्रृंगार करें। चंदन, अक्षत, फूल और तुलसी दल अर्पित करने के बाद माखन-मिश्री का भोग लगाएं।
रात 12 बजे धूप-दीप जलाकर आरती करें, शंख बजाएं और जन्माष्टमी कथा या श्रीकृष्ण मंत्रों का पाठ करें। पूजा-आरती के बाद पंचामृत व प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण किया जा सकता है, या फिर अगले दिन नवमी तिथि पर सूर्योदय के बाद पारण करने की भी परंपरा है — यह परिवार और स्थानीय परंपरा के अनुसार तय होता है।
व्रत में फलाहार: क्या खाएं, क्या नहीं
जो श्रद्धालु दिनभर उपवास रखते हैं, वे फलाहार में केला, सेब, पपीता, अनार, संतरा जैसे मौसमी फल और उनका जूस ले सकते हैं, जो शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ ऊर्जा भी देते हैं। इसके अलावा दूध, दही, घी में भुना मखाना या मखाने की खीर, कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन, साबूदाना और बादाम-काजू-किशमिश जैसे सूखे मेवे भी व्रत में लिए जा सकते हैं। नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है।
व्रत तोड़ते समय (पारण) एक साथ भारी भोजन करने से बचना चाहिए — हल्के और सात्विक फलाहार से ही व्रत खोलना बेहतर माना जाता है, ताकि लंबे उपवास के बाद शरीर पर अचानक बोझ न पड़े।
निष्कर्ष
पटना में जन्माष्टमी पर इस्कॉन मंदिर के आसपास यातायात पुलिस की सख्ती श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के मकसद से है, इसलिए तय पार्किंग स्थलों का इस्तेमाल करना ही समझदारी होगी। वहीं धार्मिक दृष्टि से इस बार जन्माष्टमी का मुख्य पूजा मुहूर्त मध्यरात्रि के आसपास है — व्रत, पूजा विधि और फलाहार के नियमों का पालन करते हुए श्रद्धालु कान्हा के जन्मोत्सव को विधि-विधान से मना सकते हैं।
