राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा है। पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना, SIR, कानून-व्यवस्था और जमुई की नाबालिग पीड़िता से जुड़े मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।
सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत छात्रों को मिलने वाली राशि में देरी हो रही है, जिसके कारण कुछ छात्रों की पढ़ाई, परीक्षा और रिजल्ट प्रभावित होने की स्थिति बन रही है। हालांकि, राज्य सरकार अगस्त में योजना को आगे जारी रखने और वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹950 करोड़ की स्वीकृति की जानकारी दे चुकी है। सरकार ने छात्रों को पहले की तरह ₹4 लाख तक का शिक्षा ऋण देने की व्यवस्था भी बहाल की थी।
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की राशि को लेकर सरकार पर सवाल
सुधाकर सिंह ने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में बिहार के छात्र स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की मदद से राज्य से बाहर जाकर उच्च और तकनीकी शिक्षा हासिल करते हैं। उनके मुताबिक, बिहार में उच्च और तकनीकी शिक्षा के पर्याप्त संस्थान तथा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं होने के कारण इस योजना की जरूरत महसूस हुई थी।
RJD सांसद का आरोप है कि वर्तमान में योजना के तहत कई छात्रों को राशि जारी नहीं हो रही है। उन्होंने दावा किया कि इससे कुछ छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं, जबकि परीक्षा दे चुके छात्रों के रिजल्ट पर भी असर पड़ रहा है।
उन्होंने सरकार से लंबित राशि जारी करने की मांग की। साथ ही कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि छात्रों की शिक्षा के लिए राशि उपलब्ध क्यों नहीं कराई जा रही है।
सरकार ने अगस्त में क्या कहा था?
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को लेकर अगस्त 2026 में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया था। सरकार ने योजना को आगे जारी रखने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में ₹950 करोड़ के व्यय की स्वीकृति दी थी। बाद में सरकार ने ₹4 लाख तक के शिक्षा ऋण की सुविधा को भी पहले की तरह जारी रखने की जानकारी दी।
इसलिए सुधाकर सिंह द्वारा भुगतान में देरी का आरोप लगाने और सरकार द्वारा योजना के लिए बजट स्वीकृत किए जाने के बीच वास्तविक लाभार्थियों को राशि मिलने की स्थिति अलग से स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है।
‘अडानी को जमीन मुफ्त, छात्रों के लिए पैसे नहीं’
सुधाकर सिंह ने सरकार की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ छात्रों की शिक्षा के लिए राशि जारी करने में परेशानी बताई जा रही है, जबकि दूसरी तरफ उद्योगों के लिए जमीन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने अडानी समूह को कथित तौर पर 600-700 करोड़ रुपये की जमीन मुफ्त में दिए जाने का आरोप लगाते हुए सरकार से अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करने को कहा।
यह आरोप सुधाकर सिंह के बयान का हिस्सा है। इसे सरकार या संबंधित कंपनी के पुष्ट तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि सांसद के दावे के रूप में देखा जाना चाहिए।
SIR को लेकर भी चुनाव आयोग पर हमला
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुधाकर सिंह ने SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर भी अपनी आपत्ति जाहिर की। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती।
SIR को लेकर विपक्ष की ओर से मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और प्रक्रिया की पारदर्शिता जैसे मुद्दे लगातार उठाए जा रहे हैं। वहीं चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग का अपना पक्ष है। इसलिए इस मामले में आरोपों और आधिकारिक आंकड़ों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
बिहार में वायरल वीडियो और पुलिस कार्रवाई पर सवाल
सुधाकर सिंह ने बिहार के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रहे वायरल वीडियो और आपराधिक घटनाओं को लेकर भी सरकार को घेरा।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई और कथित माफिया-पुलिस गठजोड़ पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल होगा।
उन्होंने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए सरकार से कानून-व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा।
जमुई मामले में CM के खिलाफ FIR की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुधाकर सिंह ने जमुई की नाबालिग पीड़िता से जुड़ी तस्वीर का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सोशल मीडिया अकाउंट से पीड़िता और उसके परिवार से जुड़ी तस्वीर साझा किए जाने से पहचान उजागर होने का खतरा पैदा हुआ।
इस मामले को लेकर विपक्ष के नेताओं ने भी मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद उनके आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर साझा की गई थी और बाद में तस्वीर को हटा दिया गया।
जमुई मामले में पुलिस की ओर से भी पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली सामग्री के खिलाफ कार्रवाई की गई है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने पहचान उजागर करने वाली सामग्री को लेकर करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर कार्रवाई की थी।
वहीं, 24 सितंबर को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पीड़िता और उसके परिजनों से मुलाकात की थी। रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने मामले में स्पीडी ट्रायल के जरिए जल्द सजा दिलाने का भरोसा दिया था।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई मुद्दों पर सरकार को घेरा
सुधाकर सिंह के बयान में शिक्षा से लेकर मतदाता सूची और कानून-व्यवस्था तक कई मुद्दे शामिल रहे। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में भुगतान, SIR की प्रक्रिया, पुलिस कार्रवाई और जमुई मामले में नाबालिग की पहचान से जुड़े सवाल अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गए हैं।
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के मामले में जहां सांसद ने लंबित भुगतान का आरोप लगाया है, वहीं सरकार पहले ही योजना के लिए ₹950 करोड़ की स्वीकृति और ₹4 लाख तक के शिक्षा ऋण की सुविधा जारी रखने की जानकारी दे चुकी है।
अब इन आरोपों पर सरकार और संबंधित विभाग की ओर से भुगतान की वास्तविक स्थिति तथा लंबित मामलों के आंकड़े सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
