पटना: बिहार की राजधानी पटना के कदमकुआं स्थित राजकीय तिब्बी कॉलेज अस्पताल में यूनानी चिकित्सा पद्धति से इलाज कराने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, यहां रोजाना लगभग 500 से 600 मरीजों का इलाज किया जाता है। मरीजों को मुफ्त परामर्श, दवाएं और कई तरह की जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा भी किया जाता है। लेकिन अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की मानें तो यहां कुछ जरूरी सुविधाओं की कमी अब भी उनकी परेशानी बढ़ा रही है। इनमें इमरजेंसी वार्ड का शुरू नहीं होना और बड़ी जांच सुविधाओं के लिए बाहर जाना प्रमुख हैं।

IndBihar की टीम ने अस्पताल पहुंचकर अधीक्षक शाहनवाज, इंटर्न डॉक्टरों और मरीजों से बातचीत की। इस दौरान यूनानी चिकित्सा पद्धति, अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं, एंबुलेंस के इस्तेमाल और मरीजों को हो रही परेशानियों की जानकारी ली गई। मरीजों ने अस्पताल में उपलब्ध कुछ सुविधाओं को संतोषजनक बताया, लेकिन साथ ही कहा कि इमरजेंसी और जांच की बेहतर व्यवस्था होने से उन्हें काफी राहत मिल सकती है।
रोजाना 500–600 मरीज, 120 बेड का अस्पताल
अस्पताल के अधीक्षक शाहनवाज ने बताया कि राजकीय तिब्बी कॉलेज अस्पताल 120 बेड का अस्पताल है। यहां लगभग 17 से 18 ओपीडी संचालित होती हैं। इनमें छह विशेष ओपीडी हैं, जबकि अन्य विभागों में अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित मरीजों को देखा जाता है।
अधीक्षक के अनुसार, यहां प्रतिदिन करीब 500 से 600 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें नए मरीजों के साथ पहले से इलाज करा रहे मरीज भी शामिल हैं।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों के पंजीकरण, चिकित्सकीय परामर्श और दवाओं के लिए शुल्क नहीं लिया जाता। इसके अलावा अस्पताल में लगभग 42 से 44 प्रकार की जांच किए जाने का दावा किया गया है। मसाज, कपिंग और अन्य रेजिमल उपचार प्रक्रियाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
हालांकि, मरीजों के अनुभव बताते हैं कि अस्पताल में उपलब्ध जांच सुविधाओं और उनकी जरूरतों के बीच अभी भी अंतर हो सकता है।
मरीज बोले- इमरजेंसी वार्ड होता तो काफी राहत मिलती
अस्पताल में लंबे समय से इलाज करा रहे फुलवारी शरीफ निवासी जावेद आलम ने बताया कि यहां की कई व्यवस्थाएं ठीक हैं और मरीजों को इलाज का लाभ मिलता है। लेकिन कुछ जरूरी सुविधाएं ऐसी हैं, जिनकी कमी मरीजों को परेशान करती है।

जावेद आलम के मुताबिक, अस्पताल में एंबुलेंस तो मौजूद है, लेकिन इमरजेंसी वार्ड नहीं होने से मरीजों को जरूरत के समय परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उनका कहना है कि यदि अस्पताल में इमरजेंसी की सुविधा शुरू हो जाए तो मरीजों को काफी सहूलियत मिलेगी और अस्पताल में उपलब्ध एंबुलेंस का इस्तेमाल भी जरूरत के अनुरूप अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।
उन्होंने जांच सुविधाओं को लेकर भी अपनी परेशानी बताई। जावेद आलम के अनुसार, कुछ छोटी जांच अस्पताल में हो जाती हैं, लेकिन बड़ी जांचों के लिए बाहर जाना पड़ता है। उन्हें भी कई बार बाहर से जांच करानी पड़ी, जिससे अतिरिक्त पैसे खर्च हुए और परेशानी बढ़ी।
जावेद आलम ने कहा कि बाहर जांच कराने का खर्च हर मरीज के लिए उठाना आसान नहीं होता। आर्थिक रूप से कमजोर कुछ मरीजों के लिए यह अतिरिक्त खर्च इलाज में बाधा बन सकता है। ऐसे में अस्पताल में जरूरी जांच सुविधाओं का विस्तार होने से मरीजों को राहत मिल सकती है।
मोहम्मद अफरोज ने भी उठाया इमरजेंसी सुविधा का मुद्दा
अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे दूसरे मरीज मोहम्मद अफरोज ने भी इमरजेंसी वार्ड की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि अस्पताल में कुछ सुविधाएं बेहतर हैं, लेकिन इमरजेंसी व्यवस्था नहीं होने से मरीजों को परेशानी होती है।
उनके मुताबिक, यदि अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड और जरूरी उपचार की व्यवस्था उपलब्ध हो जाए तो मरीजों को काफी सहूलियत मिलेगी। इससे उन्हें जरूरत पड़ने पर इलाज के लिए दूसरी जगह जाने की परेशानी भी कम हो सकती है।
मरीजों की इन बातों से स्पष्ट है कि अस्पताल में नियमित ओपीडी के माध्यम से इलाज मिलना एक महत्वपूर्ण सुविधा है, लेकिन मरीजों की जरूरतें केवल ओपीडी तक सीमित नहीं हैं। आपातकालीन उपचार और जरूरी जांच की उपलब्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
एंबुलेंस पर उठे सवाल, अधीक्षक ने बताया- 3,600 किलोमीटर चली गाड़ी
राजकीय तिब्बी कॉलेज अस्पताल की एंबुलेंस को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। आरोप था कि सरकारी स्तर पर उपलब्ध कराई गई एंबुलेंस लंबे समय से खड़ी है और उसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

इस संबंध में अस्पताल के अधीक्षक शाहनवाज ने इन आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि एंबुलेंस उन्हें मिले लगभग एक साल और एक महीने हुए हैं। इसलिए इसे ढाई साल से खड़ा रहने की बात सही नहीं है।
अधीक्षक के अनुसार, एंबुलेंस अब तक लगभग 3,600 किलोमीटर चल चुकी है। उन्होंने बताया कि यह गाड़ी जिला प्रशासन के नियंत्रण में भी रहती है और जरूरत के अनुसार इसका इस्तेमाल मरीजों को ले जाने के लिए किया जाता है।
शाहनवाज ने एंबुलेंस के चालू हालत में होने की बात कही। हालांकि, अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड नहीं होने को लेकर मरीजों का सवाल है कि एंबुलेंस उपलब्ध रहने के बावजूद आपातकालीन उपचार की पूरी व्यवस्था कब तक शुरू होगी।
एंबुलेंस का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में हुआ है और कितने मरीजों को इससे सहायता मिली है, इसकी स्पष्ट जानकारी के लिए वाहन के लॉगबुक और मरीजों के परिवहन संबंधी रिकॉर्ड की जांच जरूरी होगी।
जगह की कमी के कारण इमरजेंसी सेवा शुरू नहीं होने का दावा
अस्पताल में इमरजेंसी सेवा शुरू नहीं होने के सवाल पर अधीक्षक शाहनवाज ने जगह की कमी को प्रमुख वजह बताया। उन्होंने कहा कि कॉलेज और अस्पताल के बीच कमरों के आवंटन से जुड़ा मामला लंबे समय से लंबित है।

अधीक्षक के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की निरीक्षण टीम ने कॉलेज और अस्पताल के लिए जगह की जरूरत का आकलन किया था। इसके बाद 27 अगस्त 2025 को पत्र संख्या 1251 के माध्यम से कमरों के आवंटन से संबंधित आदेश जारी किया गया।
शाहनवाज ने बताया कि आदेश के अनुसार अस्पताल की ओर से कुछ कमरे कॉलेज को उपलब्ध करा दिए गए, लेकिन उनके मुताबिक कॉलेज की ओर से अस्पताल को मिलने वाले कमरे अब तक नहीं मिले हैं। इसके कारण अस्पताल में जगह की कमी बनी हुई है और इमरजेंसी सेवा शुरू करने में परेशानी हो रही है।
उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग के सचिव और अपर सचिव सहित संबंधित अधिकारियों को कई पत्र लिखे गए हैं। अधीक्षक का दावा है कि जगह उपलब्ध होने पर इमरजेंसी सेवा शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
हालांकि, कमरों के आवंटन से संबंधित विवाद पर कॉलेज प्रशासन का पक्ष इस रिपोर्ट के लिए प्राप्त नहीं हो सका। इसलिए इस मामले में दोनों पक्षों की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
42–44 प्रकार की जांच का दावा, फिर भी मरीजों को बाहर क्यों जाना पड़ता है?
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, यहां लगभग 42 से 44 प्रकार की जांच की जाती हैं और मरीजों को इन सुविधाओं का लाभ मुफ्त मिलता है। दूसरी ओर, मरीज जावेद आलम ने बताया कि कुछ जांचों के लिए उन्हें बाहर जाना पड़ा और इसके लिए पैसे खर्च करने पड़े।

यहां महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अस्पताल में किन-किन जांचों की सुविधा उपलब्ध है और किन जांचों के लिए मरीजों को बाहर भेजा जाता है। कुल जांचों की संख्या के साथ-साथ उनकी सूची, उपकरणों की उपलब्धता और जांच सेवाओं के नियमित संचालन की स्थिति भी मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है।
यदि कुछ जरूरी जांच अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं, तो उनके कारण मरीजों को होने वाले अतिरिक्त खर्च और परेशानी को समझना जरूरी है। वहीं, उपलब्ध सुविधाओं का पूरा लाभ मरीजों तक पहुंचाने के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से स्पष्ट जानकारी भी दी जानी चाहिए।
इस संबंध में जांच सुविधाओं की विभागवार सूची और बाहर से जांच कराने की जरूरत पड़ने वाले मामलों का विवरण मिलने पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
यूनानी चिकित्सा क्या है? छात्रों ने बताई इलाज और पढ़ाई की प्रक्रिया
अस्पताल में इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टर ईसार अहमद और डॉक्टर दानिश रशीद ने यूनानी चिकित्सा पद्धति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस पद्धति में औषधीय उपचार के साथ रेजिमल थेरेपी का भी उपयोग किया जाता है। इसमें कपिंग और अन्य निर्धारित उपचार प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं।

छात्र इजाज अहमद ने बताया कि यूनानी चिकित्सा की पढ़ाई में दवाओं, जड़ी-बूटियों से तैयार औषधियों और विभिन्न उपचार विधियों का अध्ययन किया जाता है। कॉलेज में अलग-अलग विभागों की ओपीडी हैं, जहां मरीजों की स्वास्थ्य समस्याओं के अनुसार उपचार किया जाता है।
इंटर्न डॉक्टरों ने कहा कि लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान कुछ मरीज भी यूनानी चिकित्सा के लिए यहां आते हैं। उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर कुछ मरीजों में उपचार के दौरान सुधार होने की बात कही।
हालांकि, यूनानी चिकित्सा सहित किसी भी पद्धति में इलाज का परिणाम बीमारी, मरीज की स्थिति और उपचार पर निर्भर करता है। गंभीर या आपातकालीन स्थिति में उचित चिकित्सकीय मूल्यांकन और आवश्यक आपातकालीन देखभाल में देरी नहीं होनी चाहिए।
यूनानी चिकित्सा में रोजगार की संभावनाएं
इंटर्न डॉक्टरों ने यूनानी चिकित्सा की पढ़ाई के बाद रोजगार के अवसरों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, निर्धारित स्नातक पाठ्यक्रम और इंटर्नशिप पूरी करने के बाद पात्रता के अनुसार मेडिकल ऑफिसर सहित विभिन्न पदों पर अवसर मिल सकते हैं। आगे स्नातकोत्तर की पढ़ाई का विकल्प भी मौजूद है।
उन्होंने कहा कि आयुष चिकित्सा पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ने से इस क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए संभावनाएं बन सकती हैं। हालांकि, सरकारी पदों पर नियुक्ति संबंधित भर्ती नियमों, रिक्तियों और निर्धारित योग्यताओं पर निर्भर करती है।
नए परिसर से बेहतर सुविधाओं की उम्मीद
इंटर्न डॉक्टरों ने बताया कि कॉलेज और अस्पताल के लिए लगभग 10 एकड़ के नए परिसर में सुविधाएं विकसित करने की योजना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए परिसर में अस्पताल की जगह की समस्या दूर होगी और इमरजेंसी सहित दूसरी सुविधाओं को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
छात्रों ने वर्ष 2027 तक नई व्यवस्था को लेकर उम्मीद जताई, लेकिन नए परिसर के निर्माण और सभी सुविधाओं के शुरू होने की आधिकारिक समयसीमा की पुष्टि संबंधित विभाग से की जानी बाकी है।

मुफ्त इलाज के साथ जरूरी सुविधाओं का विस्तार भी जरूरी
राजकीय तिब्बी कॉलेज अस्पताल में रोजाना 500 से 600 मरीजों का पहुंचना इसकी ओपीडी सेवाओं की अहमियत को दर्शाता है। अस्पताल प्रशासन मुफ्त परामर्श, दवाओं और जांच सुविधाओं की बात कहता है। वहीं, मरीजों ने इमरजेंसी वार्ड और कुछ बड़ी जांच सुविधाओं की कमी को अपनी परेशानी का कारण बताया है।
फुलवारी शरीफ निवासी जावेद आलम और मोहम्मद अफरोज के अनुभव बताते हैं कि मरीजों के लिए इलाज की उपलब्धता के साथ समय पर जरूरी जांच और आपातकालीन सुविधा भी महत्वपूर्ण है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए बाहर जांच कराने का खर्च अतिरिक्त बोझ बन सकता है।
अब सवाल यह है कि अस्पताल और कॉलेज के बीच जगह के आवंटन से जुड़ी समस्या कब तक दूर होगी, इमरजेंसी सेवा शुरू करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे और जांच सुविधाओं का विस्तार कैसे होगा।
अस्पताल में यूनानी चिकित्सा की उपलब्ध सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ मरीजों की इन समस्याओं का समाधान भी जरूरी है, ताकि इलाज के लिए पहुंचने वाले लोगों को अधिक सहूलियत मिल सके।
नोट: इस रिपोर्ट में अस्पताल प्रशासन, इंटर्न डॉक्टरों और मरीजों के बयानों को शामिल किया गया है। कमरों के आवंटन से संबंधित मामले में कॉलेज प्रशासन का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
