आरक्षण पर बवाल: चिराग पासवान ने मांगा मांझी-सुमन का इस्तीफा, जानें पूरा विवाद

बिहार सरकार में मंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के नेता संतोष कुमार सुमन ने आरक्षण को लेकर एक बड़ा बयान देकर सियासी हलचल मचा दी है। उन्होंने साफ किया कि वे आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनकी मांग है कि आरक्षित श्रेणी में शामिल जिन जातियों और लोगों तक अब तक इसका लाभ नहीं पहुंचा है, उन तक भी यह पहुंचे। इसके लिए उन्होंने महादलित आयोग के पुराने मॉडल का उदाहरण देते हुए अलग व्यवस्था बनाने की वकालत की।
संतोष सुमन ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर आरक्षण की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि वास्तविक रूप से वंचित लोगों तक इसका लाभ पहुंच सके। उन्होंने ओबीसी के भीतर ईबीसी जैसी श्रेणियों का हवाला देकर आगे भी इसी तरह के वर्गीकरण पर विचार करने की बात कही। उनका कहना था कि आरक्षण को बचाना है तो उसका लाभ सबसे वंचित लोगों तक पहुंचाना ही असली सामाजिक न्याय है।
मंत्री ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि आरक्षित श्रेणी के भीतर जिन लोगों तक अब तक पर्याप्त लाभ नहीं पहुंचा है, उनके लिए अलग कैटेगरी बनाई जाए। उन्होंने संविधान में समय-समय पर हुए संशोधनों और 50 प्रतिशत की सीमा का जिक्र करते हुए कहा कि जरूरत के हिसाब से नई व्यवस्था पर विचार संभव है।

चिराग पासवान का पलटवार, मांगा मांझी-सुमन का इस्तीफा

संतोष सुमन के इस बयान के बाद केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब संविधान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण का आधार आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक है, तो फिर ऐसी बातें क्यों की जा रही हैं। चिराग ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और उनके पुत्र संतोष कुमार सुमन दोनों से इस्तीफे की मांग कर दी।
चिराग पासवान ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर पिता-पुत्र इतने ही मुखर हैं तो पहले मंत्री पद से इस्तीफा दें, उसके बाद संसद में इस विषय पर खुली चर्चा करें। उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई में अगर राजनीतिक स्तर पर वर्गों में विभाजन बढ़ाया गया तो इस संघर्ष का उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाएगा। क्रीमी लेयर और उप-वर्गीकरण के मुद्दे पर भी चिराग ने मांझी को सीधे निशाने पर लिया।

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जीतन राम मांझी का करारा जवाब, पीछे हटने से इनकार

गयाजी में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के एक कार्यक्रम में जीतन राम मांझी ने चिराग पासवान की इस्तीफे की मांग का जवाब दिया। मांझी ने कहा कि उनकी पार्टी आरक्षण के लाभ के बंटवारे के मुद्दे से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने यह भी कहा कि चिराग पासवान मंत्री संतोष कुमार सुमन की बात को ठीक से समझ नहीं पाए हैं, इसीलिए वे इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
मांझी के मुताबिक, आरक्षण का मकसद सामाजिक और आर्थिक रूप से पीछे रह गए लोगों को आगे बढ़ने का मौका देना है, लेकिन अगर इसका लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचता तो कई लोग इससे वंचित रह जाते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि संतोष सुमन ने कोई नई बात नहीं कही, बल्कि सामाजिक न्याय की मूल भावना को ही दोहराया है।
इस बीच संतोष सुमन ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल X पर कई सवाल उठाए, जिनका इशारा साफ तौर पर चिराग पासवान की ओर था। संतोष सुमन के मुताबिक उन्होंने आरक्षण के असली हकदारों तक लाभ पहुंचाने की अपनी मांग दोहराई और इसे बाबा साहब आंबेडकर के दिए संवैधानिक अधिकार से जोड़ा।

Santosh Manjhi का X पोस्ट देखें :–

निष्कर्ष

बिहार की सियासत में आरक्षण सुधार को लेकर छिड़ा यह विवाद अब NDA गठबंधन के भीतर की दरार को भी सामने ला रहा है। एक तरफ संतोष सुमन और जीतन राम मांझी आरक्षण के भीतर वर्गीकरण और वंचितों तक लाभ पहुंचाने की मांग पर अड़े हैं, तो दूसरी तरफ चिराग पासवान इसे संविधान की सामाजिक भावना के खिलाफ बताते हुए इस्तीफे तक की मांग कर चुके हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह विवाद गठबंधन की एकता पर असर डालता है, या फिर सियासी बयानबाजी तक ही सीमित रहता है।

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