बिहार में बाढ़ का कहर: सोन नदी रिकॉर्ड स्तर पर, इंद्रपुरी बराज के सभी 69 गेट खोले गए

बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है। गंगा और गंडक के उफान के बाद अब सोन नदी ने भी रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। मंगलवार को सोन नदी का जलप्रवाह इस साल के सबसे ऊंचे स्तर करीब 5.25 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया था, लेकिन बुधवार शाम तक यह बढ़कर 5.59 लाख क्यूसेक हो गया। बढ़ते दबाव को देखते हुए इंद्रपुरी बराज के सभी 69 गेट खोल दिए गए हैं।
जलस्तर में इस बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह बाणसागर बांध से छोड़ा गया पानी बताई जा रही है। रविवार को बाणसागर से छोड़ा गया पानी मंगलवार को सोन नदी में पहुंचा, जिसके बाद नदी किनारे बसे इलाकों में दबाव तेजी से बढ़ गया। मनेर में भी सोन नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, और कोईलवर प्रखंड के बिंदगावा गांव समेत आसपास के दियारा इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने की आशंका जताई जा रही है।
राज्य में करीब 10 स्थानों पर अलग-अलग नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे दक्षिण और पूर्वी बिहार के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा और गंभीर हो गया है।

राघोपुर में गंगा का भयावह कटाव, तटबंध का बड़ा हिस्सा नदी में समाया

भागलपुर के नवगछिया स्थित राघोपुर में गंगा नदी का कटाव बेहद खतरनाक रूप ले चुका है। राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध के सी-नोज के पास अचानक तेज कटाव शुरू हुआ, और देखते ही देखते तटबंध का 100 मीटर से अधिक हिस्सा गंगा में समा गया। अब तक कुल मिलाकर 350 मीटर से ज्यादा लंबाई में तटबंध क्षतिग्रस्त हो चुका है। इसी दौरान रेलवे लाइन के किनारे बने मां चैती दुर्गा मंदिर और बाबा बजरंगबली मंदिर भी नदी में विलीन हो गए।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह नई दिल्ली की एक अहम बैठक बीच में छोड़कर पटना लौटे। इसके बाद विभाग के सचिव सीधे भागलपुर पहुंचे और तटबंध सुरक्षा कार्यों का जायजा लिया। उपमुख्यमंत्री ने दावा किया कि बांध की सुरक्षा और आगे के कटाव को रोकने के लिए सभी जरूरी उपाय किए जा रहे हैं, और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई भी जारी है।
वहीं गंडक नदी में भी नेपाल में आई बाढ़ के बाद से उतार-चढ़ाव जारी है। वाल्मीकिनगर बराज से करीब 1.25 से 1.77 लाख क्यूसेक के बीच पानी छोड़ा गया है। डुमरिया घाट में गंडक खतरे के निशान से 56 सेंटीमीटर और मंगराघाट के पास 24 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।

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कोसी और बूढ़ी गंडक भी उफान पर, मुख्यमंत्री ने जताई चिंता

कोसी नदी का जलस्तर भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है — बलतरा में 1.11 मीटर और कुरसेला में 41 सेंटीमीटर ऊपर। वीरपुर कोसी बराज से 2.29 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। खगड़िया में बूढ़ी गंडक नदी भी खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
मोतिहारी में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी राज्य में बाढ़ की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गंडक, कोसी, बागमती और गंगा के जलस्तर में वृद्धि से कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी है, और सरकार बाढ़ व जल प्रबंधन को लेकर लगातार काम कर रही है। प्रभावित इलाकों में जरूरी कदम उठाने के निर्देश प्रशासन को दिए गए हैं।

निष्कर्ष

गंगा, गंडक, सोन और कोसी — बिहार की चारों प्रमुख नदियां एक साथ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, और सोन नदी में सभी 69 गेट खुलने के बाद स्थिति और नाजुक हो गई है। राघोपुर में तटबंध का टूटना बताता है कि खतरा अब सिर्फ चेतावनी तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने लगा है। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की सलाह मानते हुए तुरंत सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की जरूरत है।

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