पटना में तिरंगा यात्रा: सड़कें बंद, सुरक्षा तगड़ी, जनता वैकल्पिक रास्तों पर

बिहार में स्वतंत्रता दिवस से पहले ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के तहत राज्यस्तरीय तिरंगा यात्रा की शुरुआत आज, 10 अगस्त को पटना से हुई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद हाथों में तिरंगा थामकर जेपी गोलंबर से कारगिल चौक तक करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल यात्रा की। इस राज्यस्तरीय कार्यक्रम की शुरुआत से पहले सीएम गांधी मैदान पहुंचे, जहां उन्होंने बापू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस मौके पर मंत्री दिलीप जायसवाल और मिथिलेश तिवारी भी मौजूद रहे।
लेकिन जिस कार्यक्रम का मकसद ‘जन-जन तक भागीदारी’ पहुंचाना बताया गया, उसकी शुरुआत में ही भागीदारी की परिभाषा उलझती नज़र आई। सीएम का काफिला जैसे ही गांधी मैदान के गेट नंबर 12 से भीतर दाखिल हुआ, गेट तुरंत बंद कर दिया गया। सुरक्षा में तैनात जवानों ने साफ कह दिया कि सीएम एस्कॉर्ट के अलावा कोई गाड़ी अंदर नहीं जाएगी

यह नियम अपने ही दल के मंत्रियों पर भी लागू हुआ। मंत्री दिलीप जायसवाल और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के स्टाफ को गेट पर खड़े होकर यह दोहराना पड़ा कि “मंत्री जी हैं, गेट खोलिए” — और करीब पांच मिनट के इंतज़ार के बाद ही गेट खुला।
गांधी मैदान की चौखट पर मंत्रियों को मिली यह “एंट्री-फी” आज की सबसे दिलचस्प तस्वीर बन गई, जब पूरा आयोजन ही जनभागीदारी और देशभक्ति की भावना को आगे बढ़ाने के नाम पर रखा गया था।

ट्रैफिक पर असर, आम जनता की मुश्किलें

यात्रा को देखते हुए सुबह 7 बजे से कार्यक्रम खत्म होने तक गांधी मैदान, डाकबंगला चौराहा और बुद्धमार्ग से जुड़े कई रास्तों पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद रही। हालांकि एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं की गाड़ियों को इस पाबंदी से बाहर रखा गया। पटना जंक्शन की तरफ से आने वाले वाहनों को डाकबंगला चौराहे से भट्टाचार्या चौक और पीरमुहानी होते हुए नाला रोड भेजा गया, वहीं एग्जीबिशन रोड की तरफ आने वाले वाहनों को बिग बाजार के पास से भट्टाचार्या चौक की ओर डायवर्ट किया गया। ट्रैफिक पुलिस ने आम लोगों से अपील की कि वे इन रास्तों से बचें और वैकल्पिक रास्ता अपनाएं। यानी जिस अभियान का नारा “हर घर” तक पहुंचने का था, उस दिन आम आदमी को अपने ही घर तक पहुंचने के लिए रास्ता बदलना पड़ा।
अभियान के तहत आज की मुख्य यात्रा के बाद 14 अगस्त तक राज्य के सभी प्रखंडों और जिलों में अलग-अलग तिरंगा यात्राएं निकाली जाएंगी, ताकि यह अभियान सिर्फ राजधानी तक सीमित न रहकर हर मंडल तक पहुंच सके।

निष्कर्ष

तिरंगा यात्रा का मकसद तिरंगे के प्रति गर्व और जनभागीदारी जगाना है, और इसमें कोई दो राय नहीं कि इसकी भावना सराहनीय है। लेकिन पटना की सड़कों पर आज जो नज़ारा दिखा, वो इस भावना से थोड़ा अलग था। VIP काफिले के लिए बंद गेट, अपने ही मंत्रियों का इंतज़ार, और आम जनता के लिए डायवर्ट की गई सड़कें। सवाल यह उठता है कि क्या “हर घर तिरंगा” के जोश में “हर आदमी की सहूलियत” पीछे छूट गई? आयोजन भव्य रहा, नीयत भी शायद अच्छी रही होगी — लेकिन जमीनी अमल और भाषण के बीच का फासला एक बार फिर सामने आ गया।

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