शराबबंदी पर फिर भड़के जीतन राम मांझी, सम्राट को दी नसीहत! प्रशांत को कहा — हीरो ना बने

पटना: हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) की युवा इकाई की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एक बार फिर बिहार की शराबबंदी नीति पर तीखे सवाल खड़े किए। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि नशाबंदी का कानून अपने आप में सही है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में भारी गड़बड़ियां हो रही हैं, जिसका खामियाजा गरीब तबके को भुगतना पड़ रहा है।

गुजरात मॉडल लागू करने की मांग

मांझी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सीधी अपील करते हुए कहा कि जिस तरह महात्मा गांधी के जन्मस्थान गुजरात में शराबबंदी लागू है और वहां लोगों में इसे लेकर निराशा नहीं है, उसी तर्ज पर बिहार में भी शराबबंदी लागू होनी चाहिए। यह पहला मौका नहीं है जब मांझी ने गुजरात मॉडल की वकालत की हो — इससे पहले भी वे कई मंचों से इस मांग को दोहरा चुके हैं।
उनका आरोप है कि शराबबंदी कानून की आड़ में कुछ पदाधिकारी पैसा कमाने के लिए गरीबों को फंसाते हैं। मांझी का दावा है कि वर्तमान में करीब 11-12 लाख लोगों पर शराबबंदी से जुड़े केस दर्ज हैं, जिनमें से 6-7 लाख मामले गरीब तबके के लोगों से जुड़े बताए जा रहे हैं। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
मांझी ने प्रशासन को “चुस्त-दुरुस्त” रखने की मांग करते हुए कहा कि कानून का पालन तो हो, लेकिन निर्दोष लोगों का उत्पीड़न न हो।

NDA के भीतर एक और बार असहमति के सुर

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि बिहार में शराबबंदी खत्म नहीं होगी और राज्य में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू रहेगा। ऐसे में मांझी का यह बयान NDA गठबंधन के भीतर शराबबंदी को लेकर मतभेदों को एक बार फिर उजागर करता है। सदन के पिछले सत्र में भी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद सहित कई विधायकों ने सदन के भीतर इस मुद्दे पर चर्चा की थी, जबकि जदयू के कुछ नेता समय-समय पर समीक्षा की बात कहते रहे हैं।

बाकीपुर पर भी बोले मांझी

पत्रकारों के एक अन्य सवाल पर मांझी ने बाकीपुर उपचुनाव में जन सुराज की जीत को “अस्थायी” (टेम्परेरी) करार दिया। उन्होंने कहा कि यह परंपरागत रूप से उनकी सीट रही है और जातीय समीकरण के हिसाब से भी जीत तय थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर समन्वय की कमी और मतदाताओं को उत्प्रेरित न कर पाने के कारण नतीजे प्रभावित हुए।
मांझी ने प्रशांत किशोर पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जन सुराज ने पिछले चुनाव में 200 से अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें अधिकांश की जमानत जब्त हो गई थी। उनके अनुसार, प्रशांत किशोर सामाजिक स्तर पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं रखते और सिर्फ “ख्याली पुलाव” बना रहे हैं।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, जीतन राम मांझी का यह बयान इस बात का साफ संकेत है कि एनडीए गठबंधन के भीतर शराबबंदी कानून को लेकर मतभेद अब भी बरकरार हैं। केंद्रीय मंत्री रहते हुए भी वे लगातार इस नीति की समीक्षा की मांग उठाते रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शराबबंदी को पूरी तरह बरकरार रखने के पक्ष में हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा गठबंधन के भीतर राजनीतिक बहस का विषय बना रह सकता है। वहीं बाकीपुर उपचुनाव को लेकर मांझी की टिप्पणी यह दिखाती है कि हार के बावजूद एनडीए खेमा जन सुराज और प्रशांत किशोर को बड़ी चुनौती के तौर पर स्वीकार करने से बच रहा है।

डिस्क्लेमर:

इस आर्टिकल में शामिल बयान और आंकड़े जीतन राम मांझी द्वारा प्रेस वार्ता/सार्वजनिक मंच से दिए गए बयानों पर आधारित हैं। शराबबंदी से जुड़े मुकदमों की संख्या (11-12 लाख / 6-7 लाख) मांझी का दावा है, जिसकी स्वतंत्र रूप से सरकारी आंकड़ों से पुष्टि नहीं की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इसे आधिकारिक तथ्य न मानकर एक राजनीतिक बयान के रूप में देखें। IND Bihar किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति विशेष के पक्ष अथवा विपक्ष में नहीं है और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के सिद्धांत का पालन करता है।

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