8वां वेतन आयोग: कब से बढ़ेगी सैलरी, फिटमेंट फैक्टर पर सरकार ने क्या कहा — जानिए पूरी बात

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वां वेतन आयोग सबसे बड़ा इंतजार बना हुआ है, लेकिन इसके लागू होने में अभी एक साल से ज्यादा का वक्त लग सकता है। 10 अगस्त 2026 को वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने संसद में इस बारे में जानकारी दी, जिसके बाद यह अनुमान और मजबूत हुआ है।

गठन हो चुका है, लागू होने में क्यों लगेगा वक्त

8वें वेतन आयोग के गठन का नोटिफिकेशन 3 नवंबर 2025 को जारी हुआ था, जबकि 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को खत्म हुआ। वित्त मंत्रालय ने आयोग को अपनी सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का समय दिया है, यानी मई 2027 तक रिपोर्ट सौंपी जानी है। इसके बाद सरकार को सिफारिशों की समीक्षा और मंजूरी में औसतन 6 महीने और लगते हैं — जैसा 7वें वेतन आयोग के वक्त हुआ था, जब रिपोर्ट नवंबर 2015 में सौंपी गई लेकिन मंजूरी जून 2016 में मिली। इस ट्रेंड के हिसाब से 8वां वेतन आयोग 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत तक ही व्यवहारिक रूप से लागू हो सकता है।

फिटमेंट फैक्टर पर अभी कोई फैसला नहीं

कर्मचारी संगठनों की प्रतिनिधि संस्था नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने फिटमेंट फैक्टर 3.83 और न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹69,000 करने की मांग रखी है। यह मांग आयोग की पहली औपचारिक बैठक (28-30 अप्रैल 2026) में औपचारिक रूप से रखी गई थी। हालांकि, सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि अभी तक कोई फिटमेंट फैक्टर तय नहीं हुआ है और आयोग अपनी प्रक्रिया खुद तय करेगा — उसे प्रगति की जानकारी सरकार को समय-समय पर देने की कोई कानूनी बाध्यता भी नहीं है। इसलिए 3.83 का आंकड़ा फिलहाल सिर्फ कर्मचारी पक्ष की मांग है, अंतिम फैसला नहीं। विश्लेषकों के अनुमान बताते हैं कि फिटमेंट फैक्टर 1.8 से 2.86 के बीच रह सकता है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स 2.46 के आसपास होने का अनुमान लगा रही हैं — पर यह भी अटकलें ही हैं।
सरकार ने संसद में यह भी साफ किया है कि DA (महंगाई भत्ता) को बेसिक पे के साथ मर्ज करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है, भले ही DA 50% के पार जा चुका हो। योग्य कर्मचारी संगठन और यूनियन 18 अगस्त 2026 तक अपने मेमोरेंडम आयोग के सामने रख सकते हैं।

सैलरी में कितना बदलाव संभव

फिटमेंट फैक्टर के अलावा DA और HRA भी अंतिम सैलरी तय करते हैं। हर नए वेतन आयोग में DA फिर से शून्य से शुरू होता है, क्योंकि पुराना DA नई बेसिक सैलरी में जोड़ दिया जाता है। मौजूदा नियमों के तहत मेट्रो शहरों में DA के 25% से ज्यादा होने पर HRA बेसिक पे का 27% होता है। यानी टोटल सैलरी (बेसिक+DA+HRA) में बढ़ोतरी उतनी बड़ी नहीं दिखेगी, जितनी सिर्फ बेसिक पे में बढ़ोतरी देखकर लग सकती है।

कब से मिलेगी बढ़ी हुई सैलरी और एरियर

आयोग को 1 जनवरी 2026 से सैलरी रिवाइज करने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन असल में बढ़ी हुई सैलरी 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत में ही मिलनी शुरू होगी। इस बीच की अवधि का एरियर अलग से मिलेगा — यानी लागू होने की तारीख (1 जनवरी 2026) से लेकर सैलरी असल में बढ़ने तक की बकाया राशि एकमुश्त दी जाएगी। DA और HRA पर हालांकि कोई एरियर नहीं मिलेगा; ये सिर्फ नई सैलरी लागू होने की तारीख से ही प्रभावी होंगे।

पेंशनर्स को क्या फायदा

1 अप्रैल 2025 से लागू यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत जिन कर्मचारियों की नौकरी 25 साल पूरी होगी, उन्हें आखिरी 12 महीने की औसत बेसिक सैलरी का 50% पेंशन के तौर पर मिलेगा। चूंकि UPS 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों पर लागू है, इस हिसाब से पूरी 50% पेंशन पाने वाला पहला बैच 2029 में रिटायर होगा। कर्मचारी संगठनों ने पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) बहाल करने की मांग भी दोहराई है।

किसे मिलेगा फायदा, किसे नहीं

8वें वेतन आयोग का फायदा केंद्र सरकार के करीब 50 लाख कर्मचारियों और 70 लाख पेंशनर्स को मिलेगा — इसमें रक्षा कर्मी, रेलवे स्टाफ, केंद्रीय शिक्षक और सरकारी स्वामित्व वाले PSU कर्मचारी शामिल हैं। राज्य सरकार के कर्मचारी, सार्वजनिक बैंक कर्मचारी, RBI और बैंक पेंशनर्स इसके दायरे में नहीं आते, क्योंकि वेतन तय करना राज्य सूची का विषय है। ज्यादातर राज्य आमतौर पर केंद्रीय सिफारिशों को ही मामूली बदलाव के साथ अपना लेते हैं।

निष्कर्ष:

8वां वेतन आयोग केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीदों का केंद्र बना हुआ है, लेकिन फिलहाल स्थिति यह है कि गठन हो चुका है, सिफारिशें बननी बाकी हैं और सरकार ने संसद में साफ कर दिया है कि फिटमेंट फैक्टर या सैलरी हाइक को लेकर कोई भी आंकड़ा अभी अंतिम नहीं माना जा सकता। कर्मचारी संगठनों की 3.83 फिटमेंट फैक्टर और ₹69,000 न्यूनतम बेसिक सैलरी की मांग सिर्फ एक प्रस्ताव है, फैसला नहीं। असल तस्वीर आयोग की रिपोर्ट आने और सरकार की मंजूरी के बाद ही साफ होगी, जिसमें अभी करीब डेढ़ से दो साल का वक्त और लग सकता है। तब तक कर्मचारियों और पेंशनर्स को सटीक आंकड़ों के बजाय अनुमानों पर ही भरोसा करना होगा — और मीडिया की जिम्मेदारी है कि वह हर दावे को “अनुमान” या “मांग” बताकर ही पेश करे, न कि तय सच्चाई की तरह।

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