पटना में एक साथ दो जगह हिंसक हुआ छात्र प्रदर्शन, डाक बंगला से आर्यभट्ट यूनिवर्सिटी तक मचा हड़कंप

बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को छात्र प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया। शहर के दो अलग-अलग हिस्सों में एक ही दिन हुई इन घटनाओं ने पुलिस-प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए। एक तरफ डाक बंगला चौराहे पर बीपीएससी शिक्षक भर्ती से जुड़ी मांगों को लेकर छात्र सड़क पर उतरे, तो दूसरी तरफ आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी परिसर के पास नर्सिंग रिजल्ट में कथित गड़बड़ी को लेकर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। दोनों जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा से जुड़ी मांगों को लेकर बड़ी संख्या में छात्र डाक बंगला चौराहे पर जमा हुए और प्रदर्शन करने लगे। शुरुआत में शांतिपूर्ण दिख रहा प्रदर्शन कुछ ही देर में उग्र हो गया, जब छात्रों को नियंत्रित करने पहुंची पुलिस के साथ उनकी झड़प शुरू हो गई। इसी दौरान मौके पर मौजूद SDPO पर बस से हमला कर दिया गया, जिसमें वे घायल हो गए।
स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और पानी की बौछार का भी सहारा लिया। पुलिस की ओर से हल्के बल प्रयोग में कुछ छात्र भी घायल हुए, वहीं प्रदर्शन के दौरान दो छात्राएं बेहोश हो गईं। सड़क पर काफी देर तक अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही और सामान्य यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा।सीधी भिड़ंत हुई, जिसमें एक SDPO सहित आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी और कई छात्र घायल हो गए।

डाक बंगला चौराहे पर शिक्षक भर्ती को लेकर बवाल

बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा से जुड़ी मांगों को लेकर बड़ी संख्या में छात्र डाक बंगला चौराहे पर जमा हुए और प्रदर्शन करने लगे। शुरुआत में शांतिपूर्ण दिख रहा प्रदर्शन कुछ ही देर में उग्र हो गया, जब छात्रों को नियंत्रित करने पहुंची पुलिस के साथ उनकी झड़प शुरू हो गई। इसी दौरान मौके पर मौजूद SDPO पर बस से हमला कर दिया गया, जिसमें वे घायल हो गए।
स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और पानी की बौछार का भी सहारा लिया। पुलिस की ओर से हल्के बल प्रयोग में कुछ छात्र भी घायल हुए, वहीं प्रदर्शन के दौरान दो छात्राएं बेहोश हो गईं। सड़क पर काफी देर तक अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही और सामान्य यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा।

आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी के पास नर्सिंग छात्रों का हंगामा

राजधानी में दूसरी घटना आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी परिसर के पास घटी, जहां बीएससी नर्सिंग के छात्र-छात्राएं रिजल्ट में कथित गड़बड़ी को लेकर लामबंद हुए। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप था कि सेशन लगातार लेट चल रहा है, कॉपियों में गलत तरीके से निगेटिव मार्क्स दिए गए हैं, और करीब 70 प्रतिशत से ज्यादा छात्रों को फेल कर दिया गया है। छात्रों ने कॉलेज प्रशासन पर अनियमित तरीके से पैसे वसूलने का भी आरोप लगाया।
घंटों तक विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों को समझाने की कोशिश करता रहा और भरोसा दिलाता रहा कि उनकी बात विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचाई जाएगी, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे और प्रदर्शन उग्र होता चला गया। छात्रों और पुलिसकर्मियों के बीच पहले हाथापाई हुई, जो बाद में सीधी भिड़ंत में बदल गई। इस झड़प में एक थानेदार समेत तीन पुलिसकर्मी घायल हुए। आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों को घेरकर बेरहमी से लात-घूंसों से पिटाई की, जिसके बाद पुलिसकर्मी जान बचाते हुए इधर-उधर छिपते नजर आए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को यहां भी लाठीचार्ज करना पड़ा।
आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट समेत कई दरवाजे तोड़ डाले और परिसर के भीतर घुसकर तोड़फोड़ की। हालांकि सड़क पर जाम में फंसी आम जनता के वाहनों को छात्रों ने कोई नुकसान नहीं पहुंचाया।

प्रशासन सतर्क, कार्रवाई की तैयारी

एक ही दिन में शहर के दो अलग-अलग इलाकों में हुई इन हिंसक घटनाओं से पटना पुलिस-प्रशासन में हड़कंप मच गया। डाक बंगला और आर्यभट्ट यूनिवर्सिटी, दोनों ही इलाकों में काफी देर तक तनाव और अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही, जिसे पुलिस ने बल प्रयोग कर नियंत्रित किया। प्रशासन की ओर से पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी गई है और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। दोनों घटनाओं को लेकर छात्रों की मांगों और पुलिस कार्रवाई पर अलग-अलग पक्ष सामने आ रहे हैं, जिन पर प्रशासन की जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

निष्कर्ष

पटना में मंगलवार को हुई ये दोनों घटनाएं बिहार में लंबित भर्ती परीक्षाओं और विश्वविद्यालय परिणामों को लेकर छात्रों के भीतर पनप रहे गहरे असंतोष को दर्शाती हैं। एक तरफ जहां शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में देरी और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नर्सिंग जैसे तकनीकी पाठ्यक्रमों में रिजल्ट और फीस वसूली को लेकर छात्रों का भरोसा डगमगाता दिख रहा है। प्रशासन के लिए जरूरी है कि वह छात्रों की मांगों पर गंभीरता से गौर करे और पारदर्शी जांच के जरिए स्थिति को जल्द सामान्य बनाए, ताकि आगे इस तरह की हिंसक घटनाओं को रोका जा सके।

(यह रिपोर्ट संवाददाता की ग्राउंड रिपोर्टिंग पर आधारित है।)

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