पटना: बिहार में एक भोजपुरी गीत में कथित जातिसूचक और अश्लील शब्दों के इस्तेमाल को लेकर विवाद सामने आया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए बिहार के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने साइबर आईजी और साइबर एसपी को निष्पक्ष जांच कर विधि-सम्मत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने गीत के बोल, वीडियो और उससे जुड़ी डिजिटल सामग्री की जांच करने के साथ साक्ष्यों को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया है।
कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से 6 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, संबंधित गीत YouTube सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने के बाद आपत्तियों के घेरे में आया। हालांकि, मामले में किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई से पहले संबंधित सामग्री की जांच की जाएगी।
नाई और सैन समाज ने सौंपा ज्ञापन
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, नाई और सैन समाज की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने संबंधित वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने और गायक के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में संदीप ठाकुर, कृष्ण ठाकुर, अखिलेश शर्मा, देव किशन ठाकुर और सतीश ठाकुर सहित अन्य लोग शामिल थे।
गीत के बोल और वीडियो की होगी जांच
मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने साइबर पुलिस को उपलब्ध डिजिटल सामग्री की निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया है। जांच में गीत के बोल (Lyrics), वीडियो, ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति और उससे जुड़े डिजिटल संदर्भों की पड़ताल की जाएगी।
निर्देश के अनुसार, यदि जांच में किसी जाति, समुदाय या व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक, मानहानिकारक, अश्लील अथवा सामाजिक वैमनस्य पैदा करने वाली सामग्री सामने आती है, तो लागू कानूनी प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए भी कहा गया है, ताकि संभावित कानूनी प्रक्रिया में उनका इस्तेमाल किया जा सके। डिजिटल सामग्री को हटाने या उस पर रोक लगाने की कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार की जाएगी।
लोकगीतों की आड़ में अपमानजनक सामग्री स्वीकार नहीं: मंत्री
मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि लोकगीत और लोकसंगीत बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके माध्यम से समाज और संस्कृति की सकारात्मक अभिव्यक्ति होनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकगीत-संगीत के नाम पर अश्लीलता, फूहड़ता, जातिसूचक टिप्पणी या किसी समुदाय, व्यक्ति अथवा महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री स्वीकार नहीं की जाएगी।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक सौहार्द पर जोर
मंत्री ने कहा कि मामले में कार्रवाई का उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बाधित करना नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द, नागरिकों की गरिमा और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जिम्मेदार इस्तेमाल को सुनिश्चित करना है।
फिलहाल, विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार साइबर पुलिस को जांच और विधि-सम्मत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जांच के निष्कर्ष और किसी संभावित कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही मामले में आगे की जानकारी सामने आएगी।
