पटना: बिहार में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़े निवेश की तैयारी है। डेटा सेंटर संचालित करने वाली कंपनी CtrlS Datacenters Ltd बोधगया में 150 मेगावाट क्षमता वाली हाइपरस्केल AI फैक्ट्री स्थापित करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस परियोजना को लेकर कंपनी ने बिहार सरकार के साथ आशय पत्र (LOI) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही पटना में 400 करोड़ रुपये की लागत से तैयार नए डेटा सेंटर का उद्घाटन किया गया है।
13 अक्टूबर 2026 को पटना में हुए इस उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मौजूद रहे। कंपनी का दावा है कि ये परियोजनाएं बिहार में डिजिटल सेवाओं की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ राज्य में प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों के विस्तार में मदद करेंगी।
पटना में 12 मेगावाट IT क्षमता वाला डेटा सेंटर
CtrlS का नया ग्रीनफील्ड डेटा सेंटर पटना के पाटलिपुत्र औद्योगिक क्षेत्र में स्थित है। इसे AI और क्लाउड आधारित सेवाओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। फिलहाल यहां 12 मेगावाट का IT लोड उपलब्ध है, जिसे भविष्य में मांग के अनुसार बढ़ाया जा सकता है।

यह केंद्र सरकारी संस्थानों, बड़ी कंपनियों, हाइपरस्केलर्स और प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़ी इकाइयों को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने में मदद करेगा। कंपनी के मुताबिक, डेटा सेंटर को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा, आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था और ऊर्जा दक्षता को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
बोधगया में AI फैक्ट्री पर 10,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना
बिहार में कंपनी की सबसे बड़ी प्रस्तावित परियोजना बोधगया में 150 मेगावाट क्षमता वाली हाइपरस्केल AI फैक्ट्री है। इसके लिए बिहार सरकार और CtrlS के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं। प्रस्तावित निवेश 10,000 करोड़ रुपये का है।
AI फैक्ट्री का उद्देश्य बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराना है, जिसका इस्तेमाल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्रोसेसिंग और क्लाउड सेवाओं जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। हालांकि, परियोजना की निर्माण समयसीमा, चरणबद्ध निवेश और रोजगार सृजन से जुड़ी विस्तृत जानकारी कंपनी की ओर से जारी विवरण में नहीं दी गई है।
इस परियोजना के आगे बढ़ने पर बिहार में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े निवेश और तकनीकी गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बन सकती हैं।

रोजगार और निवेश के लिहाज से क्यों अहम है यह पहल?
डेटा सेंटर आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऑनलाइन सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और AI एप्लिकेशन के संचालन के लिए बड़ी कंप्यूटिंग क्षमता और सुरक्षित डेटा स्टोरेज की जरूरत होती है। स्थानीय स्तर पर ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होने से कंपनियों को डिजिटल सेवाएं संचालित करने में मदद मिल सकती है।
CtrlS के संस्थापक एवं CEO श्रीधर पिन्नापुरेड्डी के अनुसार, कंपनी बिहार में मजबूत IT इकोसिस्टम विकसित करने और भविष्य की डिजिटल जरूरतों के अनुरूप इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों, कारोबारी माहौल और प्रोत्साहनों को निवेश के लिए सहायक बताया।
कंपनी का कहना है कि अपने इकोसिस्टम साझेदारों के साथ मिलकर बिहार में बड़े निवेश लाने से रोजगार के अवसर पैदा करने और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। हालांकि, इन परियोजनाओं से कितनी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी, इसका आंकड़ा फिलहाल सामने नहीं आया है।
टियर-2 और टियर-3 शहरों में 20 से अधिक एज डेटा सेंटर बनाने की योजना
CtrlS Datacenters भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में 20 से अधिक एज डेटा सेंटर स्थापित करने की योजना पर भी काम कर रही है। इन केंद्रों के जरिए कंप्यूटिंग क्षमता और कनेक्टिविटी को ग्राहकों के करीब लाने का लक्ष्य है।
एज डेटा सेंटर स्थानीय स्तर पर डेटा प्रोसेसिंग की सुविधा उपलब्ध कराते हैं। इससे कुछ डिजिटल सेवाओं में डेटा भेजने और परिणाम प्राप्त करने में लगने वाला समय यानी लेटेंसी कम हो सकता है। AI आधारित एप्लिकेशन और रियल-टाइम डिजिटल सेवाओं के विस्तार में भी ऐसी सुविधाएं उपयोगी हो सकती हैं।
कंपनी भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपने डेटा सेंटर नेटवर्क का विस्तार करना चाहती है। थाईलैंड को उसका पहला अंतरराष्ट्रीय बाजार बनाने की योजना है।
2030 तक 4.4 गीगावाट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य
CtrlS Datacenters के अनुसार, कंपनी ने 2007 में परिचालन शुरू किया था और फिलहाल भारत के नौ प्रमुख बाजारों में 19 डेटा सेंटर संचालित कर रही है। कंपनी ने 2030 तक 4.4 गीगावाट से अधिक डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है।
कंपनी नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने और दक्षिण-पूर्व एशिया तथा मध्य पूर्व के नए बाजारों में विस्तार की संभावनाओं पर भी काम कर रही है।
कुल मिलाकर, पटना में नए डेटा सेंटर का उद्घाटन और बोधगया में प्रस्तावित AI फैक्ट्री बिहार के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण घोषणाएं हैं। अब इन योजनाओं का वास्तविक असर निवेश के क्रियान्वयन, परियोजनाओं की समयसीमा, स्थानीय रोजगार और राज्य में तकनीकी उद्योगों की भागीदारी पर निर्भर करेगा।
