बिहार MLC चुनाव में महागठबंधन के दल आमने-सामने, 8 में से 6 सीटों पर गठबंधन के भीतर मुकाबला

पटना: बिहार में विधान परिषद की 8 सीटों पर होने वाले MLC चुनाव को लेकर महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे और उम्मीदवारों को लेकर खींचतान खुलकर सामने आ गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस और वाम दलों के उम्मीदवार कई सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं। ऐसे में जिन सीटों पर एनडीए के खिलाफ विपक्षी दलों को एकजुट होकर चुनाव लड़ने की स्थिति बन सकती थी, वहां अब गठबंधन के घटक दलों के बीच ही मुकाबला देखने को मिल रहा है।

दिए गए उम्मीदवारों के विवरण के मुताबिक, RJD ने 8 में से 6 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं, जबकि कांग्रेस ने 5 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए हैं। इनमें कोसी स्नातक, दरभंगा स्नातक, पटना शिक्षक और पटना स्नातक सीटों पर RJD और कांग्रेस के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। इसके अलावा सारण शिक्षक सीट पर RJD और CPI तथा दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस और CPM के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है।

सारण शिक्षक सीट पर RJD और CPI आमने-सामने

सारण शिक्षक सीट पर CPI ने पहले ही उम्मीदवार घोषित कर दिया था। पार्टी का कहना था कि महागठबंधन के किसी अन्य घटक को इस सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारना चाहिए। इसके बावजूद RJD ने यहां से प्रो. जयराम यादव को मैदान में उतारा है।

इस सीट पर CPI ने विद्यासागर विद्यार्थी को उम्मीदवार बनाया है। वहीं JD(U) ने आनंद पुष्कर और जनसुराज ने सीटिंग MLC अफाक अहमद को मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने इस सीट पर उम्मीदवार नहीं दिया है।

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दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस बनाम CPM

दरभंगा शिक्षक सीट पर भी महागठबंधन के दो घटक दल आमने-सामने हैं। कांग्रेस ने सीटिंग MLC और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा को दोबारा उम्मीदवार बनाया है। वहीं CPM ने रामदेव राय को मैदान में उतारा है।

इस सीट पर JD(U) ने घनश्याम राय और जनसुराज ने सुरेश प्रसाद राय को उम्मीदवार बनाया है।

कोसी स्नातक सीट पर RJD ने नितेश कुमार को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने मनोज कुमार जायसवाल को उम्मीदवार बनाया है। मनोज जायसवाल NSUI से जुड़े रहे हैं और कांग्रेस नेता तारिक अनवर के करीबी बताए जाते हैं।

इस सीट को लेकर शिक्षक नेता अमित विक्रम का नाम भी चर्चा में रहा है। उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता इस उम्मीद के साथ ली थी कि उन्हें यहां से चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा। टिकट नहीं मिलने के बाद अमित विक्रम ने चुनाव लड़ने की बात कही है और इसे दलगत राजनीति से अलग चुनाव बताया है।

इस सीट पर बीजेपी के सीटिंग MLC डॉ. एनके यादव हैं। जनसुराज ने डॉ. रजनीश रंजन को उम्मीदवार बनाया है।

दरभंगा स्नातक सीट पर भी RJD-कांग्रेस आमने-सामने

दरभंगा स्नातक सीट पर RJD ने अनिल कुमार झा को प्रत्याशी बनाया है। वहीं कांग्रेस ने रजनीकांत पाठक को टिकट दिया है। रजनीकांत पाठक लंबे समय से मिथिलांचल की राजनीति में सक्रिय रहे हैं।

बीजेपी ने निर्दलीय सीटिंग MLC सर्वेश कुमार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि जनसुराज ने मो. इम्तेयाज नूरानी को मैदान में उतारा है।

पटना शिक्षक सीट पर RJD और कांग्रेस की फाइट

पटना शिक्षक सीट पर भी महागठबंधन के दोनों प्रमुख दलों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। RJD ने डॉ. संजीव कुमार सिंह को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने संजय कुमार यादव को उम्मीदवार बनाया है।

संजय कुमार यादव क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और वित्त रहित शिक्षकों के मुद्दे पर आंदोलन भी कर चुके हैं। बीजेपी ने सीटिंग MLC प्रो. नवल किशोर यादव को फिर से मैदान में उतारा है। जनसुराज ने डॉ. दिव्या ज्योति को उम्मीदवार बनाया है।

पटना स्नातक सीट पर RJD-कांग्रेस मुकाबला

पटना स्नातक सीट पर RJD ने दिलीप कुमार को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने डॉ. असदुल्लाह खान को टिकट दिया है। वे कांग्रेस सेवा दल से जुड़े रहे हैं और नवादा से विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं।

JD(U) ने नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि जनसुराज ने डॉ. अनुज सिंह को मैदान में उतारा है। इस सीट पर NDA के भीतर भी राजनीतिक गतिविधियां चर्चा में हैं। दिए गए विवरण के अनुसार, JD(U) विधायक अनंत सिंह जनसुराज उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं।

तिरहुत शिक्षक सीट पर महागठबंधन ने दिखाई एकजुटता

महागठबंधन के भीतर सभी सीटों पर अलग-अलग उम्मीदवार उतारने की स्थिति नहीं है। तिरहुत शिक्षक सीट इसका उदाहरण है। यहां कांग्रेस और RJD ने उम्मीदवार नहीं उतारा है और CPI के सीटिंग MLC प्रो. संजय कुमार सिंह को समर्थन मिलता दिख रहा है।

कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौर यहां सक्रिय हैं, लेकिन उन्हें कांग्रेस का टिकट नहीं मिला है। उनके निर्दलीय चुनाव लड़ने की संभावित स्थिति को लेकर भी राजनीतिक चर्चा है। हालांकि, अंतिम स्थिति नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

बीजेपी ने इस सीट पर नरेंद्र प्रसाद सिंह को उम्मीदवार बनाया है। जनसुराज ने पहले भूषण झा के नाम की घोषणा की थी, जिसे बाद में बदलकर श्याम नंदन यादव को उम्मीदवार बनाया गया।

तिरहुत स्नातक सीट पर RJD का उम्मीदवार

तिरहुत स्नातक सीट पर RJD ने डॉ. रश्मि विनायक गौतम को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस, CPI और CPM ने इस सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारा है।

इस सीट से निर्दलीय सीटिंग MLC बंशीधर बृजवासी फिर चुनाव मैदान में हैं। JD(U) ने अभिषेक झा को दोबारा मौका दिया है, जबकि जनसुराज ने डॉ. विमोहन को उम्मीदवार बनाया है।

कांग्रेस ने इन पांच सीटों पर उतारे उम्मीदवार

कांग्रेस के उम्मीदवारों के तौर पर दिए गए विवरण के अनुसार:

  • दरभंगा शिक्षक: डॉ. मदन मोहन झा
  • पटना स्नातक: डॉ. असदुल्लाह खान
  • पटना शिक्षक: संजय कुमार यादव
  • कोसी स्नातक: मनोज कुमार जायसवाल
  • दरभंगा स्नातक: रजनीकांत पाठक

वहीं RJD की घोषित सूची में

  • पटना शिक्षक से डॉ. संजीव कुमार सिंह,
  • पटना स्नातक से दिलीप कुमार,
  • कोसी स्नातक से नितेश कुमार,
  • दरभंगा स्नातक से अनिल कुमार झा,
  • सारण शिक्षक से प्रो. जयराम यादव
  • तिरहुत स्नातक से डॉ. रश्मि विनायक गौतम

चुनाव कार्यक्रम

MLC चुनाव की प्रक्रिया इस प्रकार है—

  • 29 सितंबर: अधिसूचना जारी
  • 6 अक्टूबर: नामांकन की अंतिम तारीख
  • 7 अक्टूबर: नामांकन पत्रों की जांच
  • 9 अक्टूबर: नाम वापसी की अंतिम तारीख
  • 23 अक्टूबर: मतदान
  • 27 अक्टूबर: मतगणना
  • 31 अक्टूबर: चुनाव प्रक्रिया पूरी होने की निर्धारित समयसीमा

अंतिम चुनाव कार्यक्रम और उम्मीदवारों की स्थिति के लिए निर्वाचन आयोग की आधिकारिक अधिसूचना को आधार माना जाना चाहिए। निर्वाचन आयोग विधान परिषद समेत चुनाव प्रक्रियाओं का आधिकारिक प्राधिकरण है।

क्या महागठबंधन के भीतर बढ़ रही है दूरी?

MLC चुनाव में RJD, कांग्रेस और वाम दलों के अलग-अलग उम्मीदवार मैदान में आने से महागठबंधन के भीतर समन्वय का सवाल एक बार फिर सामने आया है। यह स्थिति खास तौर पर उन सीटों पर महत्वपूर्ण है जहां गठबंधन के दो या अधिक घटक एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।

मार्च 2026 के बिहार राज्यसभा चुनाव के दौरान भी विपक्षी दलों के सामने एकजुटता और संख्या जुटाने की चुनौती की रिपोर्ट सामने आई थी। उस चुनाव में RJD नेतृत्व विपक्षी समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा था, जबकि चुनावी गणित में NDA की स्थिति मजबूत बताई गई थी।

हालांकि MLC चुनाव का मतदाता आधार विधानसभा चुनाव से अलग होता है और शिक्षक तथा स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की अपनी अलग चुनावी संरचना है। इसलिए इन चुनावों के परिणाम को सीधे विधानसभा चुनाव के जनादेश से जोड़ना उचित नहीं होगा।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि महागठबंधन के घटक दलों के बीच अलग-अलग उम्मीदवार उतारने से इन सीटों पर चुनावी समीकरण किस तरह बदलते हैं और क्या मतदान के अंतिम चरण तक किसी सीट पर आपसी समझ बनती है।

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