पटना में खाकी बनी हैवान! LIC एजेंट को थाने में 400 बार पीटा, 3 घंटे बर्बरता!

पटना। राजधानी पटना के रानीतालाब थाने की पुलिस पर एक LIC एजेंट को बेरहमी से पीटने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित का दावा है कि पुलिस ने उसे लोहे की रॉड और लाठी से 400 से ज्यादा बार पीटा, जिसके बाद उसकी हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे पेशाब के रास्ते खून आने लगा।

पीड़ित की पहचान उपेंद्र कुमार के रूप में हुई है, जो पतूत गांव के रहने वाले हैं। उनके शरीर पर चोट के कई निशान हैं और फिलहाल उनका इलाज PMCH में चल रहा है। उपेंद्र का आरोप है कि पुलिस उनके भाई नरेंद्र कुमार को ट्रक चोरी के एक मामले में तलाश रही थी, लेकिन भाई न मिलने पर पुलिस ने उन्हें ही पकड़ लिया और थाने ले जाकर बुरी तरह पीटा।

क्या है पूरा मामला?

उपेंद्र के मुताबिक, 21 सितंबर की रात करीब 1:30 बजे रानीतालाब थाने की पुलिस उनके घर पहुंची। खुद को निर्दोष बताने और भाई के मामले से अलग होने की बात कहने के बावजूद पुलिस उन्हें पूछताछ के बहाने थाने ले गई।

पीड़ित का आरोप है कि थाने में उन्हें रसोईघर के पास वाले एक कमरे में ले जाया गया — कथित तौर पर सीसीटीवी कैमरे की नजर से बचने के लिए। वहां करीब तीन घंटे तक उनकी छाती पर पैर रखकर लाठी-डंडे और लोहे की रॉड से पिटाई की गई।

पिटाई के बाद जब पेशाब के रास्ते खून आने लगा, तो पहले उन्हें बिक्रम PHC ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर देख PMCH रेफर कर दिया गया।

2 लाख रुपए लेकर छोड़ा जाने का आरोप

पीड़ित का दावा है कि 22 सितंबर की शाम 2 लाख रुपए लेने के बाद ही उन्हें PR बॉन्ड पर छोड़ा गया। परिवार का यह भी आरोप है कि उपेंद्र को झूठे केस में फंसाने और एनकाउंटर करने की धमकी भी दी गई।

महिलाओं से भी बदसलूकी का आरोप

पीड़ित परिवार ने रानीतालाब थानाध्यक्ष श्रवण कुमार, जीतन छपरा ओपी प्रभारी, एसआई अरुण कुमार, होमगार्ड जवान राजीव कुमार और चालक सोनू पर मारपीट का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि जब देर रात पुलिस टीम उपेंद्र को ले जाने पहुंची, तो घर की महिलाओं ने विरोध किया, जिस दौरान उनके साथ भी बदसलूकी की गई।

उच्च अधिकारियों तक पहुंचा मामला

पीड़ित ने न्याय की गुहार लगाते हुए गृह विभाग, DGP कार्यालय, मानवाधिकार आयोग और पटना SSP को ई-मेल भेजा है, जिसके बाद जांच में तेजी आई। पीड़ित परिवार ने पटना पश्चिम सिटी एसपी संकेत कुमार से मुलाकात कर पूरी जानकारी दी, जिसके बाद सिटी एसपी ने पालीगंज डीएसपी-2 पंकज शर्मा के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित करने का आदेश दिया है।

जांच में पुलिस की कार्रवाई, पीड़ित को थाने लाने की परिस्थितियों, कथित मारपीट और पैसे लेकर छोड़ने के आरोपों की गहराई से पड़ताल की जाएगी। थाने में लगे सीसीटीवी फुटेज को भी जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

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थानेदार बोले- सारे आरोप बेबुनियाद

रानीतालाब थानाध्यक्ष श्रवण कुमार ने पीड़ित और परिवार के आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि मामले की जांच सीनियर अधिकारी कर रहे हैं और जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।

कानून क्या कहता है?

  • रात में अवैध दबिश पर रोक: सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार, बिना दर्ज FIR और महिला पुलिस के किसी के घर रात 1:30 बजे छापेमारी पूरी तरह अवैध मानी जाती है।
  • थानों में अनिवार्य सीसीटीवी: सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश है कि थानों के हर कोने में सीसीटीवी कैमरे चालू हालत में हों। कैमरे से बचकर टॉर्चर करना सीधे अवमानना का मामला बनता है।
  • मानवाधिकार उल्लंघन: बिना कानूनी आधार हिरासत में रखना और थर्ड डिग्री देना मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।

निष्कर्ष

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की पिटाई का नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही और मानवाधिकारों की रक्षा का बड़ा सवाल खड़ा करता है। भाई के बदले भाई को निशाना बनाना, बिना FIR के आधी रात छापेमारी, और सीसीटीवी से बचकर कथित टॉर्चर — ये सभी बातें अगर जांच में सही साबित होती हैं, तो यह सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का सीधा उल्लंघन होगा। फिलहाल सिटी एसपी के आदेश पर गठित टीम जांच कर रही है, और असली सच्चाई सामने आने में अभी वक्त लगेगा। पीड़ित परिवार को न्याय मिलता है या आरोप बेबुनियाद साबित होते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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