बिहार में महीनों से चल रहे छात्र आंदोलन के बाद 27 अगस्त 2026 को शिक्षा विभाग की सचिव की अध्यक्षता में छात्र प्रतिनिधि मंडल के साथ हुई बैठक में कई अहम फैसले लिखित रूप में दर्ज किए गए। बैठक में शिक्षा विभाग के सचिव के अलावा आर्थिक अपराध इकाई के पुलिस उप महानिरीक्षक, विशेष सचिव, पटना के जिला पदाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक मौजूद रहे, और सभी पक्षों के हस्ताक्षर वाले दस्तावेज़ पर सहमति बनी।
छात्र नेताओं का कहना है कि इस बार बातचीत सिर्फ मौखिक आश्वासन नहीं बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों के हस्ताक्षर सहित लिखित रूप में हुई है, इसलिए इसे पहले से ज्यादा गंभीरता से लिया जा रहा है। इसी बैठक के दौरान शिक्षा विभाग के 24 अगस्त के पुराने पत्रांक-162 को सर्वसम्मति से तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का निर्णय भी लिया गया।
जाँच में यह बात सामने आई कि 24 अगस्त 2026 को शिक्षा विभाग के सचिव द्वारा बीपीएससी को भेजे गए पत्र में छात्र संघों की ओर से रखी गई मांगों पर आगे कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया था, जिसे बाद में 27 अगस्त की बैठक में औपचारिक रूप से नए निर्णयों से प्रतिस्थापित कर दिया गया।
TRE-4, लाइब्रेरियन बहाली और दरोगा भर्ती — किन मांगों पर बनी सहमति
सबसे बड़ी राहत BPSC TRE-4 शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर मिली। स्वतंत्र स्रोतों से पुष्टि होती है कि 27 अगस्त की बैठक में TRE-4 परीक्षा को दो चरणों की बजाय एक ही चरण में कराने की मांग स्वीकार कर ली गई और एक अभ्यर्थी-एक परिणाम के सिद्धांत पर नियमानुसार आगे कार्रवाई करने का फैसला हुआ। इसके अलावा सरकार ने परीक्षा सुधार से जुड़े मुद्दों पर पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का भी ऐलान किया है।
पुस्तकालयाध्यक्ष (लाइब्रेरियन) की बहाली, जो छात्रों के अनुसार करीब 18 साल से लंबित थी, अब रिक्ति के अनुरूप शुरू करने पर सहमति बनी है। संविदा कर्मियों को भर्ती प्रक्रियाओं में दिए जाने वाले अतिरिक्त अंक व वेटेज को लेकर उच्च-स्तरीय कमिटी बनाने और बिहार की सभी भर्ती प्रक्रियाओं में अधिकतम डोमिसाइल नीति लागू करने पर भी सहमति दर्ज हुई है, जिसे लेकर सरकार न्यायविद की राय ले चुकी है।
1799 पदों की दरोगा भर्ती परीक्षा में हुए कथित पेपर लीक और गड़बड़ी की जांच पहले से ही आर्थिक अपराध इकाई (EOU) कर रही है। खबरों के अनुसार EOU ने इस मामले की गहराई से जांच के लिए एसपी (प्रशासन) की अगुवाई में आठ सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया है और पूर्णिया व गया में दर्ज दोनों प्राथमिकियां अपने हाथ में ले ली हैं। इसी वजह से भर्ती की अगली प्रक्रिया — फिजिकल टेस्ट — को फिलहाल रोक दिया गया है, और सहायक प्राध्यापक बहाली से पहले बिहार पात्रता परीक्षा (BET) कराने की मांग को भी उसी हाईकोर्ट-कमिटी के सामने रखा जाएगा।
BPSC और BSSC द्वारा आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र, OMR शीट और उत्तर पुस्तिका की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी वही हाईकोर्ट-कमिटी प्रस्ताव पर विचार करेगी। सरकार ने आगे की सभी भर्ती परीक्षाओं का कैलेंडर जल्द जारी करने और उसका सख्ती से पालन करने पर भी सहमति जताई है।

15 सितंबर की डेडलाइन और आगे की रणनीति
लिखित समझौते के बावजूद छात्र नेताओं ने सरकार को महज मोहलत दी है, स्थायी भरोसा नहीं। उनका कहना है कि कुछ मांगों पर तुरंत पहल हुई है जबकि बाकी मांगों पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं दिखी। इसीलिए वे अब सभी संबंधित आयोगों और विभागीय कार्यालयों का दौरा कर यह पता लगाने में जुटे हैं कि हर मांग को पूरा करने में कितना और समय लगेगा।
छात्र नेताओं ने साफ किया है कि अगर 15 सितंबर तक शेष मांगों पर सुनवाई नहीं हुई, तो वे दोबारा पटना के गर्दनीबाग में आंदोलन शुरू करेंगे। उनका तर्क है कि बिना बातचीत और जांच-पड़ताल के आंदोलन का ऐलान करने से सरकार को यह कहने का मौका मिल जाएगा कि छात्र नेता जानबूझकर आंदोलन खड़ा कर रहे हैं, इसलिए वे पहले हर मोर्चे पर बातचीत का पूरा मौका देना चाहते हैं।
आंदोलन को लेकर छात्र नेताओं पर कुछ नेताओं की ओर से लगाए गए आरोपों — कि वे छात्रों को भटका रहे हैं और राजनीति कर रहे हैं — पर पलटवार करते हुए छात्र नेताओं ने कहा कि अगर जनप्रतिनिधि समय पर छात्रों की समस्याएं सुनते तो छात्र नेताओं को सड़क पर उतरने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने यह भी कहा कि वे मांगों के लिए जेल जाने और लाठी खाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
निष्कर्ष
बिहार में शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर छात्र आंदोलन का असर अब लिखित प्रशासनिक फैसलों के रूप में सामने आ रहा है — TRE-4 की एकल परीक्षा, लाइब्रेरियन बहाली, डोमिसाइल नीति और परीक्षा-सुधार कमिटी जैसे फैसले इसका प्रमाण हैं। लेकिन 1799 दरोगा भर्ती पेपर लीक जैसी जांच अभी जारी है और संविदा वेटेज, बीएसएससी की लंबित वैकेंसी जैसे मुद्दे अनिर्णीत हैं। छात्र नेताओं ने 15 सितंबर की डेडलाइन तय कर सरकार पर दबाव बनाए रखा है — आने वाले दिनों में यही तय करेगा कि आंदोलन का अगला अध्याय बातचीत से सुलझेगा या फिर सड़कों पर लौटेगा।
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