शेख हसीना का बड़ा ऐलान: दिसंबर में लौटूंगी बांग्लादेश, चाहे जेल हो या मौत

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दो साल बाद बुधवार शाम दिल्ली से लोगों को वर्चुअली संबोधित किया। फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCCSA) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में उनका कैमरा पूरे समय बंद रहा, यानी सिर्फ ऑडियो के जरिए ही उनकी बात लोगों तक पहुंची। यह आयोजन दिल्ली के सर मार्क टली ऑडिटोरियम में शाम छह बजे से साढ़े सात बजे तक चला।

लगभग 25 मिनट के भाषण में हसीना ने कहा कि उन्हें जेल भेजा जाए या मार भी दिया जाए, फिर भी वे दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी। उन्होंने कहा कि लोगों का समर्थन उनके लिए सबसे जरूरी चीज है और मौत की सजा, झूठे मुकदमे तथा दिखावटी सुनवाई उन्हें डरा नहीं सकती। उनके मुताबिक उनके खिलाफ चल रही पूरी कानूनी कार्रवाई गैरकानूनी, असंवैधानिक और राजनीति से प्रेरित है।

पांच अगस्त की तारीख का मतलब
गौर करने वाली बात यह है कि हसीना ने अपनी दो साल बाद की पहली सार्वजनिक पेशी के लिए ठीक वही तारीख चुनी, जिस दिन 2024 में प्रदर्शनकारियों के दबाव में उन्हें प्रधानमंत्री आवास छोड़कर देश से बाहर जाना पड़ा था। माना जा रहा है कि इसके जरिए वे अपनी राजनीतिक वापसी का संदेश देना चाहती थीं।

हसीना ने दावा किया कि उन्होंने अपनी मर्जी से देश नहीं छोड़ा था। प्रदर्शनकारियों के प्रधानमंत्री आवास की तरफ बढ़ने पर उनके पास निकलने के लिए सिर्फ 30-40 मिनट का समय बचा था, और उस वक्त उन्हें खुद नहीं पता था कि वे देश छोड़कर जा रही हैं। उनका कहना था कि वे अपने पैतृक गांव तुंगीपाड़ा जाने की तैयारी कर रही थीं, लेकिन हालात ऐसे बने कि देश ही छोड़ना पड़ा।

पुलिसकर्मियों की मौत और आगजनी का आरोप
हसीना ने आंदोलन के दौरान हुई हिंसा पर भी अपना पक्ष रखा। उनके मुताबिक उस दौरान 450 से ज्यादा पुलिस थानों में आग लगाई गई, सरकारी इमारतों पर हमले हुए और कई पुलिसकर्मियों को जिंदा जला दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे हालात में कानून-व्यवस्था बनाए रखना क्या सुरक्षाबलों की जिम्मेदारी नहीं थी।
उन्होंने यह भी दावा किया कि तख्तापलट के बाद से अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या की जा रही है, उन्हें गायब किया जा रहा है और झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है। हसीना के अनुसार अब तक कम से कम 10 हजार लोग मारे जा चुके हैं या लापता हैं, और 10 लाख से ज्यादा लोगों पर अज्ञात आरोपी बनाकर केस दर्ज हैं। (यह आंकड़े हसीना का अपना दावा हैं, स्वतंत्र स्रोतों से इनकी पुष्टि नहीं होती)

बेटे सजीब वाजेद जॉय और अन्य नेताओं की बात
कार्यक्रम में हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने भी अपनी मां से पहले संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि अगस्त 2024 से हजारों लोग बिना मुकदमे के जेल में बंद हैं, हिरासत में मौतों का सिलसिला अब भी जारी है और मरने वालों में ज्यादातर युवा हैं। जॉय ने संयुक्त राष्ट्र के 1,400 मौतों के आंकड़े और बांग्लादेश सरकार के 800 मौतों के दावे के बीच के फासले पर भी सवाल उठाया।
पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी ने कहा कि पिछले दो साल में देश बुरी तरह बंट गया है और महिलाओं, अल्पसंख्यकों तथा पत्रकारों के खिलाफ हिंसा बढ़ी है। वहीं लेखक-विश्लेषक अबू ओबैदा आरिन ने दावा किया कि हसीना किसी जनादेश के कारण नहीं बल्कि एक राजनीतिक साजिश के चलते निर्वासन में हैं।
पूर्व क्रिकेटर और पूर्व सांसद शाकिब अल हसन भी इस मीटिंग में शामिल रहे। खबरों के मुताबिक बुधवार रात उनके घर में कुछ लोगों ने घुसकर आग लगाने की कोशिश की, जिसकी पुष्टि पुलिस ने की है।

भारत को लेकर क्या कहा
हसीना ने भारत को बांग्लादेश का पुराना और भरोसेमंद दोस्त बताया। उनके मुताबिक 1971 हो, 1975 हो या आज का दौर, भारत हमेशा मुश्किल वक्त में साथ खड़ा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत मित्र देश जरूर है, लेकिन उन्हें अपने लोगों के बीच ही लौटना है।

कैमरा बंद क्यों रखा
हसीना अगस्त 2024 से भारत में हैं और आखिरी बार सार्वजनिक रूप से 5 अगस्त 2024 को ही देखी गई थीं। तब से वे किसी गुप्त ठिकाने पर रह रही हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कैमरे के सामने आने से उनकी लोकेशन या सुरक्षा व्यवस्था उजागर होने का खतरा था। इसके अलावा भारत के विदेश मंत्रालय ने इस निजी आयोजन से खुद को पूरी तरह अलग रखा है, क्योंकि बांग्लादेश पहले ही कह चुका है कि भारत की जमीन से हसीना की राजनीतिक गतिविधियां दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित कर सकती हैं।

बांग्लादेश में प्रतिक्रिया
ढाका सरकार ने इस भाषण के प्रसारण पर पूरी तरह रोक लगा दी थी और प्रिंट, टीवी व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को चेतावनी दी गई थी कि हसीना का भाषण न दिखाया जाए। बांग्लादेश के अखबार प्रोथोम आलो और द डेली स्टार ने संपादकीय के जरिए कहा कि भारत की धरती से हो रही ऐसी राजनीतिक गतिविधियां दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

निष्कर्ष
शेख हसीना की यह दो साल बाद की पहली सार्वजनिक पेशी सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक वापसी की रणनीति का पहला औपचारिक ऐलान मानी जा रही है। कैमरा बंद रखकर, गुप्त ठिकाने से बोलना खुद इस बात का संकेत है कि सुरक्षा और कूटनीतिक जोखिम अब भी बरकरार हैं, लेकिन इसके बावजूद दिसंबर में लौटने की तारीख तय करना बताता है कि वे अब इंतजार की रणनीति छोड़कर टकराव का रास्ता चुन चुकी हैं।
इसका असर सिर्फ बांग्लादेश की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। भारत सरकार ने भले ही इस निजी आयोजन से दूरी बना ली हो, लेकिन ढाका पहले ही भारत की जमीन से हो रही इस तरह की गतिविधियों पर एतराज जता चुका है। यानी आने वाले दिनों में भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर दबाव और बढ़ सकता है, खासकर प्रत्यर्पण की मांग को लेकर।
वहीं बांग्लादेश के भीतर तीन साफ खेमे बन चुके हैं। सरकार जो हसीना को भगोड़ी अपराधी मानती है, छात्र आंदोलन से जुड़ी ताकतें जो चाहती हैं कि वे लौटकर अदालत का सामना करें, और अवामी लीग समर्थक जो उन्हें राजनीतिक स्थिरता का इकलौता विकल्प मानते हैं। ऐसे में दिसंबर में अगर हसीना सच में लौटती हैं, तो यह बांग्लादेश की राजनीति के लिए 2024 के आंदोलन के बाद का सबसे बड़ा मोड़ साबित हो सकता है, और भारत के लिए भी एक नई कूटनीतिक चुनौती।

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