पटना में महागठबंधन का राजभवन मार्च: तेजस्वी आगे, कांग्रेस पीछे; क्या दिखा गठबंधन में मतभेद?

पटना: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर महागठबंधन ने गुरुवार को पटना में राजभवन मार्च किया। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अगुवाई में निकले इस मार्च में VIP प्रमुख मुकेश सहनी, वाम दलों के नेता और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम समेत महागठबंधन के नेता शामिल हुए। हालांकि, मार्च के दौरान नेताओं के आगे बढ़ने के क्रम और कांग्रेस नेताओं की अपेक्षाकृत बाद में सक्रिय मौजूदगी को लेकर महागठबंधन के अंदर तालमेल पर राजनीतिक चर्चा जरूर शुरू हो गई।

राजभवन मार्च के दौरान बैरिकेडिंग पार करते तेजस्वी यादव

तेजस्वी निकले आगे, कांग्रेस की मौजूदगी दिखी बाद में

राजभवन मार्च की शुरुआत विधानसभा के सामने स्थित सप्तमूर्ति के पास से हुई। सुबह करीब 10:20 बजे के आसपास तेजस्वी यादव के साथ महागठबंधन के कई घटक दलों के नेता मौके पर पहुंचे। इनमें VIP प्रमुख मुकेश सहनी और वामपंथी दलों के नेता शामिल थे।

ग्राउंड पर मौजूद तस्वीरों और घटनाक्रम में तेजस्वी यादव अन्य नेताओं के साथ आगे बढ़ते दिखाई दिए। दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और कांग्रेस के कार्यकर्ता बाद के चरण में मार्च में सक्रिय रूप से दिखाई दिए।

यहीं से राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा कि क्या महागठबंधन के सभी घटक दलों के बीच आंदोलन को लेकर समान स्तर का समन्वय है?

हालांकि, इसे महागठबंधन में टूट या दरार का निर्णायक प्रमाण कहना जल्दबाजी होगी। राजेश राम बाद में मार्च में शामिल हुए और महागठबंधन के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे। इसलिए इस पूरे घटनाक्रम को फिलहाल गठबंधन के अंदर तालमेल को लेकर उठे सवाल के रूप में देखना ज्यादा उचित है।

महागठबंधन राजभवन मार्च 8 अक्टूबर

तेजस्वी ने एक के बाद एक बैरिकेडिंग पार की

मार्च के दौरान राजभवन जाने वाले रास्ते पर पुलिस की ओर से कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था के तहत पांच लेयर तक बैरिकेडिंग की गई थी।

तेजस्वी यादव प्रदर्शनकारियों के साथ आगे बढ़े और पुलिस की बैरिकेडिंग तक पहुंचे। इस दौरान वह बैरिकेडिंग पर चढ़ते भी दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की, लेकिन तेजस्वी लगातार आगे बढ़ते रहे।

इसके बाद पुलिस ने तेजस्वी यादव, मुकेश सहनी, मीसा भारती समेत कई नेताओं को अपने साथ लिया और उन्हें राज्यपाल से मुलाकात के लिए आगे ले जाया गया।

ग्राउंड पर इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती थी और प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच कई जगहों पर धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।

राजभवन पहुंचा महागठबंधन का प्रतिनिधिमंडल

प्रदर्शन के बाद महागठबंधन के नेताओं का प्रतिनिधिमंडल राजभवन पहुंचा और राज्यपाल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने SIR, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं।

महागठबंधन की मुख्य मांग CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। विपक्ष का आरोप है कि SIR के जरिए मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए हैं। विपक्ष बिहार में दोबारा चुनाव कराने की मांग भी उठा रहा है।

वहीं चुनाव आयोग और सत्तापक्ष विपक्ष के इन आरोपों को स्वीकार नहीं करते हैं। ऐसे में SIR को लेकर विवाद फिलहाल राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर जारी है।

राजभवन मार्च के दौरान तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी

राज्यपाल से मिलने के बाद तेजस्वी का तीखा हमला

राज्यपाल से मुलाकात के बाद तेजस्वी यादव ने प्रशासन और चुनाव आयोग पर जमकर निशाना साधा।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल से मिलने के लिए पहले से समय लिया गया था, इसके बावजूद प्रदर्शन के रास्ते में भारी बैरिकेडिंग और हथियारबंद पुलिस बल की तैनाती की गई।

तेजस्वी ने प्रदर्शन के दौरान AK-47 की मौजूदगी का भी जिक्र किया और सवाल उठाया कि जब जनप्रतिनिधि शांतिपूर्ण तरीके से राज्यपाल से मिलने जा रहे थे तो ऐसी सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत क्यों पड़ी।

हालांकि, AK-47 की तैनाती को लेकर तेजस्वी का बयान एक राजनीतिक आरोप है। इसे खबर में पुलिस द्वारा गोली चलाने की तैयारी के तथ्य के रूप में पेश नहीं किया गया है।

भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार

ज्ञानेश कुमार पर तेजस्वी के गंभीर आरोप

राज्यपाल से मुलाकात के बाद तेजस्वी यादव ने CEC ज्ञानेश कुमार पर बेहद तीखा हमला बोला। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कई आपत्तिजनक और गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए तथा उनके इस्तीफे की मांग दोहराई।

तेजस्वी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार इस पूरे विवाद में केवल एक चेहरा हैं और उनकी लड़ाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सरकार की नीतियों के खिलाफ भी है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए महागठबंधन की लड़ाई जारी रहेगी और वह पुलिस कार्रवाई या जेल से डरने वाले नहीं हैं।

इन बयानों को तेजस्वी यादव के राजनीतिक आरोप और बयान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। इनके समर्थन या खंडन का स्वतंत्र निष्कर्ष इस खबर में नहीं निकाला जा रहा है।

मार्च ने महागठबंधन के अंदर तालमेल पर भी सवाल खड़े किए

इस पूरे प्रदर्शन का एक राजनीतिक पहलू महागठबंधन के अंदर आपसी समन्वय को लेकर भी सामने आया।

एक तरफ तेजस्वी यादव, मुकेश सहनी और वाम दलों के नेता मार्च में आगे बढ़ते दिखाई दिए, वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम बाद के चरण में पहुंचे। राजभवन से बाहर आने के बाद तेजस्वी की मीडिया बातचीत के दौरान भी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी प्रमुखता से दिखाई नहीं दी।

हालांकि, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बाद में मार्च में शामिल हुए और राजभवन जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में भी उनकी मौजूदगी की रिपोर्ट सामने आई है।

लेकिन बिहार में हाल के MLC चुनाव को लेकर RJD और कांग्रेस के अलग-अलग उम्मीदवार मैदान में उतरने के बाद पहले से ही दोनों दलों के बीच सीटों और समन्वय को लेकर राजनीतिक चर्चा चल रही है। ऐसे में पटना के इस मार्च के दौरान दिखाई दिया घटनाक्रम उन सवालों को फिर से चर्चा में ले आया है।

MLC चुनाव की सियासत से भी जुड़ रहा मार्च

बिहार में आगामी MLC चुनाव को लेकर महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीटों और उम्मीदवारों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक रुख सामने आया है।

RJD और कांग्रेस के अलग-अलग सीटों पर उम्मीदवार उतारने की स्थिति ने विपक्षी गठबंधन के अंदर सीट बंटवारे और समन्वय को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

ऐसे में CEC के खिलाफ संयुक्त आंदोलन महागठबंधन के लिए एक साझा राजनीतिक मंच जरूर बनाता है, लेकिन जमीन पर अलग-अलग दलों की सक्रियता का स्तर राजनीतिक विश्लेषण का विषय बना हुआ है।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली प्रदर्शन में राहुल गांधी

दिल्ली से पटना तक CEC के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का आंदोलन केवल बिहार तक सीमित नहीं है। दिल्ली में भी INDIA ब्लॉक के नेताओं और विपक्षी दलों की ओर से प्रदर्शन किए गए हैं।

पटना में गुरुवार का मार्च इसी व्यापक राजनीतिक अभियान का हिस्सा रहा। बिहार में महागठबंधन ने पहले चरण में प्रखंड स्तर पर प्रदर्शन और उसके बाद जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रम आयोजित करने का ऐलान किया था। 8 अक्टूबर को पटना में राजभवन मार्च किया गया।

देश के अन्य हिस्सों में भी CEC के खिलाफ विपक्षी प्रदर्शन सामने आए हैं। हालांकि, तेजस्वी यादव के इस दावे कि जहां-जहां महागठबंधन की सरकार है, वहां सभी जगह एक ही तरह का प्रदर्शन हुआ।

राहुल गांधी का निमंत्रण, दिल्ली में प्रदर्शन की तैयारी

राजभवन से निकलने के बाद तेजस्वी यादव ने आगे की रणनीति को लेकर भी बड़ा संकेत दिया। उन्होंने कहा कि उनकी राहुल गांधी से बात हुई है और उन्हें दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। तेजस्वी ने कहा कि विपक्षी नेता दिल्ली जाएंगे और राष्ट्रपति भवन जाकर भी अपनी बात रखेंगे।

तेजस्वी यादव के इस बयान से साफ है कि बिहार में राजभवन मार्च के बाद INDIA गठबंधन का यह विरोध अब दिल्ली तक ले जाने की तैयारी है। दिल्ली में विपक्ष पहले से ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR के मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहा है।

क्या CEC ज्ञानेश कुमार को आसानी से हटाया जा सकता है?

यह पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक सवाल है।

संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने जैसी है। CEC को केवल सरकार के प्रशासनिक आदेश से हटाया नहीं जा सकता।

उन्हें हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना होता है। हटाने के आधार में सिद्ध कदाचार (proved misbehaviour) या अक्षमता (incapacity) शामिल हैं। प्रस्ताव को दोनों सदनों में कुल सदस्य संख्या के बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है। इसके बाद राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी करते हैं।

इसलिए “CEC को हटाने के लिए महाभियोग लाया जा सकता है” कहना सामान्य राजनीतिक भाषा में समझने योग्य है, लेकिन संवैधानिक रूप से इसे संसद द्वारा हटाने की विशेष प्रक्रिया कहना अधिक सटीक होगा।

दिलचस्प बात यह है कि मार्च 2026 में भी CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष की ओर से नोटिस दिए गए थे, जिन्हें अप्रैल में लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति ने खारिज कर दिया था।

वहीं हाल में सुप्रीम कोर्ट ने भी CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग वाली याचिका पर तत्काल अंतरिम राहत नहीं दी, लेकिन मामले में नोटिस जारी किया है।

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अब आगे क्या?

पटना का राजभवन मार्च तत्काल तौर पर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या पद से हटने की स्थिति पैदा नहीं करता। लेकिन इस प्रदर्शन ने विपक्ष की राजनीतिक रणनीति को जरूर स्पष्ट किया है।

एक तरफ SIR और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष का आंदोलन तेज हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीटों और राजनीतिक समन्वय को लेकर भी सवाल बने हुए हैं।

पटना में तेजस्वी यादव का बैरिकेडिंग पार कर आगे बढ़ना, पुलिस की भारी तैनाती और उसके बाद राजभवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात—ये सभी घटनाक्रम इस प्रदर्शन के प्रमुख हिस्से रहे।

अब देखना यह होगा कि CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष अपनी मांग को सड़क से संसद तक किस तरह आगे बढ़ाता है और महागठबंधन के घटक दल इस मुद्दे पर कितनी मजबूती से एक साथ दिखाई देते हैं।

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