बिहार विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक कोटे की 8 सीटों का कार्यकाल 16 नवंबर 2026 को खत्म हो रहा है। राजद ने 6 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं, जबकि भाजपा-जदयू अभी मंथन में हैं। जनसुराज पार्टी NDA के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है।
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर क्यों मच रहा है सियासी घमासान
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर इस साल चुनाव होने जा रहा है। इनमें 4 सीटें स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की हैं और 4 सीटें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की। पटना, तिरहुत, कोसी और दरभंगा स्नातक क्षेत्र से जुड़ी हैं, जबकि पटना, सारण, तिरहुत और दरभंगा शिक्षक क्षेत्र से। ये आठों सीटें मिलाकर बिहार के करीब 78% हिस्से को कवर करती हैं और 30 जिलों के मतदाता इनमें वोट डालेंगे।
इन सीटों पर वर्तमान MLC का कार्यकाल 16 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। समाचार एजेंसी भाषा की एक रिपोर्ट के मुताबिक इन सीटों का कार्यकाल नवंबर के मध्य में समाप्त होने से पहले मतदान कराए जाने की संभावना है। यानी चुनाव आयोग को नवंबर के मध्य तक पूरी प्रक्रिया — नामांकन, जांच, वापसी और मतदान — पूरी करनी होगी।
बांकीपुर उपचुनाव में जनसुराज पार्टी की मजबूत मौजूदगी के बाद अब पूरे बिहार की नजर इन 8 सीटों पर टिक गई है। प्रशांत किशोर ने ऐलान किया है कि वे इन सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे, जबकि राजद पहले ही 6 सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर चुका है।

कब होगी मतदान की तारीखों की औपचारिक घोषणा
अभी तक बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार (Bihar State Election Authority) की ओर से इन 8 सीटों के लिए विस्तृत निर्वाचन कार्यक्रम — यानी अधिसूचना, नामांकन, जांच और मतदान की सटीक तारीखें — औपचारिक रूप से जारी नहीं की गई हैं। हालांकि सभी दलों की तैयारियां जोरों पर हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार इन आठों सीटों पर इसी साल नवंबर में चुनाव कराए जाने हैं, हालांकि अभी चुनाव की सटीक तारीखों का ऐलान होना बाकी है।
चूंकि मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 16 नवंबर को खत्म हो रहा है, इसलिए संवैधानिक बाध्यता के तहत चुनाव आयोग को इससे पहले ही पूरी प्रक्रिया संपन्न करानी होगी। इसी वजह से राजद जैसे दलों ने तारीखों के ऐलान का इंतजार किए बगैर ही अपने प्रत्याशी पहले घोषित कर दिए, ताकि उम्मीदवारों को प्रचार के लिए ज्यादा समय मिल सके।
गौरतलब है कि इससे पहले इसी साल जून 2026 में बिहार विधान परिषद की विधानसभा-निर्वाचित कोटे की 10 सीटों (जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की खाली हुई सीट का उपचुनाव भी शामिल था) पर चुनाव हो चुका है। उस चुनाव में 18 जून को मतदान हुआ था। अब यह दूसरा बड़ा MLC चुनाव है जो इसी वर्ष स्नातक और शिक्षक कोटे की सीटों के लिए होने जा रहा है।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की 4 सीटें: कहां किसकी टक्कर
पटना: जदयू के नीरज कुमार यहां से हैट्रिक लगा चुके एमएलसी हैं। इस बार उनका मुकाबला डॉ. अनुज सिंह से हो सकता है, जो 2025 विधानसभा चुनाव में जनसुराज के टिकट पर नवादा से लड़े थे। राजद ने दिलीप कुमार को टिकट दिया है, जबकि जनसुराज डॉ. दिव्या ज्योति को उतार सकती है।
तिरहुत: निर्दलीय बंशीधर बृजवासी — जो शिक्षकों की लड़ाई लड़ते हुए अपनी नौकरी गंवा चुके हैं — फिर मैदान में होंगे। जदयू अभिषेक झा को मौका दे सकती है, या फिर देवेश चंद्र ठाकुर खुद उतर सकते हैं। राजद ने रश्मि विनायक गौतम को उम्मीदवार बनाया है।
कोसी: भाजपा के डॉ. एनके यादव मौजूदा एमएलसी हैं। इस सीट पर जदयू के डॉ. अजय कुमार सिंह की चर्चा है, जबकि भाजपा नेता दिलीप जायसवाल अपने किसी करीबी को टिकट दिला सकते हैं। राजद ने नितेश कुमार को उतारा है।
दरभंगा: निर्दलीय सर्वेश कुमार मौजूदा एमएलसी हैं। छात्र नेता दिलीप कुमार के यहां से चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है। राजद ने अनिल कुमार झा को प्रत्याशी बनाया है।

तेजस्वी की रणनीति और प्रशांत किशोर की चुनौती
राजद नेता तेजस्वी यादव ने तारीखों के औपचारिक ऐलान से पहले ही 6 प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए, और दो सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ दीं। इससे राजद उम्मीदवारों को मतदाताओं के बीच जाने के लिए ज्यादा समय मिल गया है — पटना शिक्षक सीट से संजीव सिंह हों या सारण से जयराम यादव, तेजस्वी ने इलाके के मजबूत चेहरों को मौका दिया है।
दूसरी ओर भाजपा और जदयू अभी मंथन में ही हैं। पटना सीट पर नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच खींचतान चल रही है। वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी के मुताबिक, 8 में से 2 सीटों पर महागठबंधन, 1 पर जनसुराज-समर्थित और 1 पर निर्दलीय का कब्जा है, ऐसे में NDA के सामने अपनी सीटिंग सीटें बचाने की चुनौती है। उनका मानना है कि इस बार NDA को राजद या कांग्रेस से नहीं बल्कि जनसुराज से खतरा है, क्योंकि MLC चुनाव में जीत का सबसे बड़ा आधार ज्यादा से ज्यादा वोटर बनाना होता है, और जनसुराज ने इस दिशा में काफी काम किया है।
अगला एमएलसी चुनाव कब और किन सीटों पर
बिहार विधान परिषद की सदस्यता अलग-अलग कोटे से भरी जाती है — विधानसभा-निर्वाचित कोटा, स्नातक निर्वाचन क्षेत्र, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, स्थानीय निकाय कोटा और राज्यपाल-मनोनीत सदस्य। हर सदस्य का कार्यकाल 6 साल का होता है, और अलग-अलग कोटे के सदस्यों का कार्यकाल अलग-अलग समय पर खत्म होता है, इसलिए हर साल किसी न किसी कोटे से उपचुनाव या नियमित चुनाव होते रहते हैं।
इसी साल जून 2026 में विधानसभा-निर्वाचित कोटे की 10 सीटों (कुमुद वर्मा, गुलाम गौस, मो. फारूक, भीष्म साहनी, संजय प्रकाश, समीर कुमार सिंह, सुनील कुमार सिंह सहित) पर पहले ही चुनाव हो चुका है, और अब नवंबर में स्नातक-शिक्षक कोटे की इन 8 सीटों पर चुनाव होने जा रहा है। इसके बाद इन्हीं 8 सीटों का अगला नियमित चुनाव सामान्यतः 6 साल बाद, यानी 2032 के आसपास होगा — बशर्ते बीच में कोई सीट इस्तीफे, निधन या अन्य वजह से खाली न हो और उपचुनाव की नौबत न आए।
वहीं विधानसभा-कोटे और स्थानीय निकाय कोटे की बाकी सीटों का कार्यकाल अलग-अलग तारीखों पर पूरा होता रहेगा, जिसके लिए बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार समय-समय पर अलग अधिसूचना जारी करता है। सटीक भावी सीटों और तारीखों की पुष्टि के लिए आधिकारिक निर्वाचन कैलेंडर देखना जरूरी होगा, जो चुनाव नजदीक आने पर जारी होता है।
निष्कर्ष
बिहार विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक कोटे की 8 सीटों का चुनाव इस बार सिर्फ पार्टियों की परंपरागत लड़ाई नहीं, बल्कि प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी के उभार की भी परीक्षा है। राजद ने समय रहते प्रत्याशी घोषित कर बढ़त बनाने की कोशिश की है, जबकि NDA अभी अंदरूनी खींचतान से जूझ रहा है। मतदान की औपचारिक तारीखें भले ही अभी घोषित नहीं हुई हैं, लेकिन 16 नवंबर की समय-सीमा तय है, इसलिए आने वाले हफ्तों में चुनावी सरगर्मी और तेज होगी। इन 8 सीटों के नतीजे आगे बिहार की सियासत में जनसुराज की असली ताकत का पैमाना भी तय करेंगे।
Also Read: बिहार MLC चुनावः पटना स्नातक सीट पर JDU में घमासान, अनंत सिंह बनाम नीरज कुमार की जंग तेज
