पटना की बड़ी पटन देवी का हवन कुंड क्यों नहीं भरता? पुजारियों ने बताई मान्यता

पटना सिटी स्थित मां बड़ी पटन देवी मंदिर में नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर में आस्था का एक प्रमुख केंद्र यहां स्थित हवन कुंड भी है। पुजारियों के अनुसार, इस कुंड में साल भर हवन होता है, लेकिन यह सामान्य तौर पर राख से भरता नहीं है। आश्विन नवरात्र के दौरान हवन कुंड में राख का स्तर ऊपर तक पहुंच जाता है और बाद में धीरे-धीरे नीचे चला जाता है। इस परंपरा को लेकर स्थानीय स्तर पर पाताल लोक से संबंध की धार्मिक मान्यता प्रचलित है। हालांकि, इस मान्यता की वैज्ञानिक पुष्टि का कोई प्रमाण इस ग्राउंड रिपोर्ट में सामने नहीं आया है।

इंड बिहार की ग्राउंड रिपोर्ट में पुजारियों ने हवन कुंड से जुड़ी परंपरा और मान्यताओं के बारे में बताया। वहीं, मंदिर पहुंचीं महिला श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था साझा की। नवरात्र के दौरान आग से बचाव और आपात स्थिति से निपटने के लिए अग्निशमन विभाग की तैयारियों की जानकारी भी सामने आई।

पटना सिटी बड़ी पटन देवी मंदिर हवन कुंड की तस्वीर

सालभर होता है हवन, फिर भी नहीं भरता हवन कुंड! आखिर क्या है इसका रहस्य?

मंदिर के हवन कुंड को लेकर बड़े पुजारी कृष्णा गिरी ने बताया कि यहां साल के 365 दिन हवन होता है। उनके अनुसार, सामान्य दिनों में हवन कुंड में राख का स्तर एक समान बना रहता है, जबकि आश्विन नवरात्र में यह स्तर लगभग पांच से छह फीट तक ऊपर आ जाता है। विशेष रूप से नवरात्र की नवमी को बड़ी संख्या में श्रद्धालु हवन करते हैं।
कृष्णा गिरी के मुताबिक, नवरात्र में राख का स्तर ऊपर आने के बाद दो दिनों के भीतर धीरे-धीरे नीचे चला जाता है।

उन्होंने बताया कि कुंड की नियमित सफाई के लिए राख को बाहर निकालने की कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं होती। उनके अनुसार, हवन के बाद बची भभूत कुंड के भीतर ही रह जाती है।

हवन कुंड के भरने और फिर खाली दिखाई देने के पीछे क्या प्रक्रिया है, इस बारे में पुजारी ने किसी निश्चित भौतिक कारण की जानकारी नहीं दी। उन्होंने इसे धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा विषय बताया।

पुजारी कृष्णा गिरी और श्रद्धालु

पाताल लोक से जुड़ा है हवन कुंड? पुजारियों ने बताई प्रचलित मान्यता

छोटे पुजारी राजन गिरी ने भी हवन कुंड को लेकर प्रचलित मान्यता का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मंदिर की स्थापना के समय से ही यह हवन कुंड मौजूद है। उनके अनुसार, नवरात्र के दौरान हवन की राख कुंड में ऊपर तक पहुंच जाती है, लेकिन बाद में वह नीचे समा जाती है और यह स्पष्ट नहीं होता कि वह कहां चली जाती है।

राजन गिरी ने कहा कि हवन कुंड की सफाई के दौरान राख को बाहर निकालने के बजाय आसपास के हिस्से की सफाई की जाती है। उन्होंने कुंड के भीतर आग होने के कारण उसमें हाथ डालकर सफाई करने को भी उचित नहीं बताया।

स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार, हवन कुंड का संबंध पाताल लोक से जोड़ा जाता है। हालांकि, यह धार्मिक विश्वास है। इस रिपोर्ट के दौरान ऐसा कोई स्वतंत्र वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया, जिसके आधार पर हवन कुंड के पाताल लोक से जुड़े होने या राख के नीचे जाने की प्रक्रिया की पुष्टि की जा सके।

मां बड़ी पटन देवी मंदिर में तीन शक्तियों की उपासना

पटना सिटी स्थित बड़ी पटन देवी मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। प्रचलित धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह 51 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि माता सती की दाहिनी जंघा का अवशेष इसी स्थान पर गिरा था। इसी वजह से मंदिर को विशेष धार्मिक महत्त्व प्राप्त है।

पटना सिटी, शक्तिपीठ पटन देवी मंदिर मुख्य दरवाजा

मंदिर में मां महाकाली, मां महालक्ष्मी और मां महासरस्वती की उपासना होती है। श्रद्धालु इन तीनों देवियों के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। नवरात्र के दौरान यहां भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। हालांकि, मंदिर में वर्ष भर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है।

मंदिर के पुजारियों के अनुसार, यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पूजा करते हैं। हवन कुंड भी इसी धार्मिक परंपरा का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।

श्रद्धालुओं को मां पर भरोसा, मनोकामना पूरी होने की रखती हैं उम्मीद

मंदिर में पूजा करने पहुंचीं महिला श्रद्धालुओं ने भी अपनी आस्था के बारे में बताया। एक महिला श्रद्धालु ने कहा कि मां बड़ी पटन देवी शक्तिशाली हैं और यहां आने वाले भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।

पटना सिटी, दुर्गा मूर्ति

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने हवन कुंड को कभी राख से पूरी तरह भरते देखा है, तो उन्होंने बताया कि उनकी जानकारी में यह कुंड भरता नहीं है और इसमें हवन होता रहता है।

स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए हवन कुंड केवल पूजा की जगह नहीं, बल्कि मंदिर की परंपरा और धार्मिक विश्वास का हिस्सा भी है। यहां आने वाले भक्त पूजा-अर्चना करते हैं, मनोकामनाएं मांगते हैं और मां का आशीर्वाद लेकर लौटते हैं।

नवरात्र में अग्निशमन विभाग अलर्ट, पंडालों में फायर वॉलंटियर तैनात

नवरात्र के दौरान मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने के बीच अग्नि सुरक्षा की तैयारियां भी की गई हैं। अग्निशमन विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, बड़े पूजा पंडालों में फायर वॉलंटियर तैनात किए गए हैं। उनकी पहचान के लिए विशेष जैकेट भी उपलब्ध कराए गए हैं।

फायर डिपार्टमेंट (BFS) की एएसपी कामिनी वाला अधिकारी के साथ।

अग्निशमन विभाग की अधिकारी कामिनी वाला (एएसपी, फायर डिपार्टमेंट—BFS, उपलब्ध जानकारी के अनुसार) ने बताया कि पूजा समिति के सदस्यों के साथ मिलकर फायर वॉलंटियर तैयार किए गए हैं। आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई के लिए अग्निशमन वाहन और कर्मियों को भी तैयार रखा गया है।

उन्होंने बताया कि बड़े पंडालों में कर्मियों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही जनरेटर को पंडालों से दूर रखने जैसे सुरक्षा निर्देशों का पालन कराने के लिए आयोजकों से शपथ पत्र भी लिए गए हैं। लोगों को आग से बचाव के उपायों की जानकारी देने के लिए निर्देशों वाले पर्चे भी बांटे जा रहे हैं।

अग्निशमन विभाग की इन तैयारियों का उद्देश्य पूजा के दौरान आग लगने जैसी किसी भी आपात स्थिति में नुकसान को कम करना और समय पर राहत उपलब्ध कराना है।

संकरी गलियों के बावजूद मंदिर तक पहुंचने के कई रास्ते

ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं की आवाजाही और व्यवस्थाएं देखने को मिलीं। मंदिर तक पहुंचने के लिए अलग-अलग दिशाओं से रास्ते हैं, हालांकि कुछ रास्ते संकरे हैं। नवरात्र के दौरान इन रास्तों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

बड़ी पटन देवी मंदिर में श्रद्धालुओं का कतार

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की ओर से लोगों को क्रमबद्ध तरीके से धीरे-धीरे मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा था। इससे श्रद्धालुओं की आवाजाही व्यवस्थित रखने में मदद मिल रही थी।

मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं को पानी और शरबत पिलाने वाले लोग भी दिखाई दिए। धार्मिक आयोजन के दौरान इस तरह की सेवा से दर्शन के लिए आने वाले लोगों को राहत मिलती है। ग्राउंड रिपोर्ट के समय मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई भी दिखाई दी।

आस्था और परंपरा का केंद्र है हवन कुंड

मां बड़ी पटन देवी मंदिर का हवन कुंड श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच लंबे समय से आस्था का विषय रहा है। पुजारियों ने इसके साल भर उपयोग में आने और नवरात्र के दौरान राख का स्तर ऊपर पहुंचने की परंपरा के बारे में बताया। वहीं, श्रद्धालु इसे मां की शक्ति और मंदिर की धार्मिक महत्ता से जोड़कर देखते हैं।

बड़ी पटन देवी मंदिर परिसर

हालांकि, हवन कुंड में राख का स्तर बदलने के पीछे की प्रक्रिया की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच या पुष्टि इस ग्राउंड रिपोर्ट में नहीं की गई है। इसलिए पाताल लोक से संबंध की बात को धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

नवरात्र के दौरान मंदिर में पूजा-अर्चना, हवन और श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच अग्नि सुरक्षा तथा भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था भी अहम है। अग्निशमन विभाग की तैयारियों और प्रशासन की ओर से नियंत्रित प्रवेश की व्यवस्था का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित तरीके से दर्शन उपलब्ध कराना है।

इंड बिहार की ग्राउंड रिपोर्ट में बड़ी पटन देवी मंदिर की धार्मिक मान्यता, हवन कुंड से जुड़ी परंपरा, श्रद्धालुओं की आस्था और नवरात्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीर सामने आई।

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