पटना में तालीमी मरकज शिक्षा सेवकों का धरना जारी, वेतनमान और अनुकंपा नियुक्ति समेत 6 मांगों को लेकर प्रदर्शन

पटना: बिहार में कार्यरत शिक्षा सेवक और तालीमी मरकज के कर्मी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पटना के गर्दनीबाग में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। बिहार प्रदेश शिक्षा सेवक संघ और तालीमी मरकज महासंघ के बैनर तले यह प्रदर्शन 28 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया गया है। धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने वेतनमान लागू करने, चार महीने के बकाया मानदेय का भुगतान करने, अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति देने और राजकीय कर्मी का दर्जा देने समेत छह प्रमुख मांगें उठाई हैं। प्रदर्शन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से सैकड़ों की संख्या में शिक्षा सेवक और तालीमी मरकज के कर्मी शामिल हुए हैं।

17 वर्षों से काम कर रहे शिक्षा सेवक, वेतनमान की मांग

प्रदर्शन कर रहे शिक्षा सेवकों का कहना है कि वे पिछले 17 वर्षों से बिहार के शिक्षा विभाग के अंतर्गत काम कर रहे हैं। इनका मुख्य कार्य वंचित और अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को शिक्षा से जोड़ना, उन्हें स्कूल जाने के लिए तैयार करना और महिलाओं को साक्षर बनाना है। इसके बावजूद उन्हें अब तक नियमित वेतनमान और राजकीय कर्मी का दर्जा नहीं मिला है।
मोतिहारी जिले के मेसी प्रखंड से आए शिक्षा सेवक मोहम्मद हिदायतुल्लाह ने बताया कि वे वर्ष 2009 से इस कार्य में लगे हुए हैं। उनके अनुसार, शिक्षा सेवकों को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक काम करना पड़ता है, लेकिन इसके बदले उन्हें महज 22,000 रुपये मानदेय मिलता है। उन्होंने बताया कि पिछले चार महीने से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। इससे शिक्षा सेवकों और उनके परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

हिदायतुल्लाह के मुताबिक, शिक्षा सेवकों को न केवल वेतनमान की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि उनके मृत साथियों के परिजनों को भी अब तक अनुकंपा का लाभ नहीं मिला है। उनका कहना है कि आर्थिक तंगी के कारण कई परिवारों के सामने बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो गया है।

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चार महीने से मानदेय नहीं मिलने से आर्थिक संकट

धरने का नेतृत्व कर रहे प्रदेश अध्यक्ष विनोद रजक ने कहा कि शिक्षा सेवक पिछले 17 वर्षों से बिहार में शिक्षा का अलख जगाने का काम कर रहे हैं। इसके बावजूद उनकी मांगों पर अब तक उचित कार्रवाई नहीं हुई है।

संघ के अनुसार, पिछले चार से पांच महीने से मानदेय का भुगतान नहीं होने के कारण शिक्षा सेवकों के परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, परिवार के सदस्यों का इलाज और दैनिक जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।

संघ अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होती हैं, तब तक पटना में धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।

मृत शिक्षा सेवकों के परिजनों को अनुकंपा का लाभ देने की मांग

शिक्षा सेवकों की प्रमुख मांगों में मृत कर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी और आर्थिक सहायता देना भी शामिल है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सेवा के दौरान कई शिक्षा सेवकों की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके परिवारों को अब तक अनुकंपा का लाभ नहीं मिला है।

संघ के पदाधिकारियों ने दावा किया कि पिछले कुछ समय में बड़ी संख्या में शिक्षा सेवकों की मृत्यु हुई है। उनके आश्रित आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में सरकार को मृत कर्मियों के परिवारों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के साथ उचित आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करानी चाहिए।

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छह सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन

पटना के गर्दनीबाग में धरना दे रहे शिक्षा सेवकों ने अपनी छह प्रमुख मांगों को लेकर सरकार से कार्रवाई की अपील की है। इनमें शामिल हैं:

  • वेतनमान लागू करना: शिक्षा सेवकों और तालीमी मरकज कर्मियों को उचित वेतनमान दिया जाए और समान काम के लिए समान वेतन की मांग पर विचार किया जाए।
  • बकाया मानदेय का भुगतान: पिछले चार महीने से लंबित मानदेय का भुगतान जल्द से जल्द किया जाए।
  • अनुकंपा का लाभ: मृत शिक्षा सेवकों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी और उचित लाभ दिया जाए।
  • नियमावली में संशोधन: शिक्षा सेवकों की सेवा शर्तों में संशोधन कर उन्हें विद्यालयों में समायोजित किया जाए और शिक्षक का दर्जा देने की मांग पर कार्रवाई की जाए।
  • समग्र शिक्षा से जोड़ना: शिक्षा सेवकों को जन शिक्षा विभाग से हटाकर समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत लाया जाए।
  • राजकीय कर्मी का दर्जा: लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षा सेवकों को राजकीय कर्मी का दर्जा दिया जाए। इसके साथ ही सेवा अवधि को 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग भी की गई है।

भिक्षाटन कर जताया विरोध, विधानसभा और न्यायालय तक जाने की चेतावनी

संघ की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 1 अक्टूबर को धरने के चौथे दिन प्रदर्शनकारियों ने भिक्षाटन कार्यक्रम भी आयोजित किया था। इसके माध्यम से उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति और लंबित मानदेय की समस्या को सामने रखा।

वहीं, धरने में शामिल संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने आगामी दिनों में बिहार विधानसभा और मुख्यमंत्री आवास के घेराव की रणनीति बनाने की बात कही है। जरूरत पड़ने पर अपनी मांगों को लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाने की भी बात कही गई है।

सरकार से वार्ता और मांगों पर कार्रवाई का इंतजार

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी मांगों से संबंधित जानकारी मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री सचिवालय और शिक्षा विभाग को दी है। इसके बावजूद अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, उन्होंने संबंधित अधिकारियों से भी बातचीत की है, लेकिन उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।

फिलहाल पटना के गर्दनीबाग में शिक्षा सेवकों का धरना जारी है। 4 अक्टूबर तक प्रस्तावित इस प्रदर्शन में आगे की रणनीति को लेकर भी चर्चा हो रही है। अब देखना होगा कि बिहार सरकार शिक्षा सेवकों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और लंबे समय से लंबित मानदेय तथा अन्य समस्याओं का समाधान कब तक हो पाता है।

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