SIR विवाद पर बिहार में सियासी संग्राम, तेजस्वी के लोक भवन मार्च पर सत्ता पक्ष का पलटवार

SIR और मतदाता सूची को लेकर बिहार में सियासी घमासान तेज है। महागठबंधन 7-8 अक्टूबर को प्रदर्शन करेगा और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लोक भवन मार्च होगा। सत्ता पक्ष ने विपक्ष के इस्तीफे की मांग पर पलटवार किया है।

IND BIHAR

SIR पर बिहार में फिर सियासी संग्राम, 8 अक्टूबर को तेजस्वी के नेतृत्व में लोक भवन मार्च; सत्ता पक्ष ने पूछा- आयोग पर भरोसा नहीं तो इस्तीफा क्यों नहीं?

पटना। बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर महागठबंधन ने बिहार में आंदोलन का कार्यक्रम घोषित किया है। वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष की मांग पर पलटवार करते हुए सवाल उठाया है कि यदि विपक्ष को चुनाव आयोग और चुनाव परिणाम पर भरोसा नहीं है तो उसके नेताओं को पहले अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए।

महागठबंधन की ओर से जारी 5 अक्टूबर 2026 के पत्र के मुताबिक, 7 अक्टूबर को सभी प्रखंडों में संयुक्त प्रदर्शन और नरेंद्र मोदी, अमित शाह तथा ज्ञानेश कुमार के पुतले दहन का कार्यक्रम रखा गया है। इसके बाद 8 अक्टूबर को सभी जिलों में प्रदर्शन और पुतला दहन किया जाएगा। उसी दिन पटना में महागठबंधन के नेता, विधायक, विधान पार्षद और प्रदेश पदाधिकारी लोक भवन की ओर मार्च करेंगे और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने की योजना है।

हालिया रिपोर्टों में भी महागठबंधन के 7 और 8 अक्टूबर के कार्यक्रम की पुष्टि हुई है। तेजस्वी यादव ने 5 अक्टूबर को नेताओं के साथ बैठक के बाद आंदोलन का ऐलान किया था।

बिहार विधानसभा, नेता प्रतिपक्ष, तेजस्वी यादव

दिल्ली में भी विपक्ष का चुनाव आयोग तक मार्च

SIR को लेकर विरोध केवल बिहार तक सीमित नहीं है। 6 अक्टूबर को दिल्ली में INDIA गठबंधन के सांसदों ने चुनाव आयोग की ओर मार्च किया। विपक्षी सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। पुलिस ने मार्च को चुनाव आयोग तक पहुंचने से पहले रोक दिया और कुछ नेताओं को हिरासत में लिया गया।

विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव और SIR की प्रक्रिया के दौरान योग्य मतदाताओं के नाम हटाए गए तथा चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं। दूसरी तरफ चुनाव आयोग इन राजनीतिक आरोपों को स्वीकार नहीं करता और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया बताता है।

लोकसभा नेता प्रतिपक्ष: राहुल गांधी

तेजस्वी यादव ने क्या कहा?

तेजस्वी यादव ने SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बिहार में SIR के दौरान मतदाता सूची से सही लोगों के नाम हटाए गए और इसी वजह से विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहा है।

तेजस्वी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और उनके पद से हटाए जाने की मांग भी दोहराई है। 5 अक्टूबर की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद जारी कार्यक्रम के अनुसार, 7 अक्टूबर को प्रखंड स्तर और 8 अक्टूबर को जिला एवं पटना स्तर पर आंदोलन और राजभवन मार्च किया जाना है।

सत्ता पक्ष का पलटवार- आयोग पर भरोसा नहीं तो इस्तीफा क्यों नहीं?

वहीं सत्ता पक्ष विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक अभियान बता रहा है। सत्ता पक्ष की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि यदि विपक्ष चुनाव आयोग की निष्पक्षता और चुनाव परिणाम पर भरोसा नहीं करता और चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाता है, तो उसके नेताओं को पहले अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए।

सत्ता पक्ष का सवाल है कि चुनाव आयोग ने जिन उम्मीदवारों को निर्वाचित घोषित किया और जिन नेताओं को जीत का प्रमाण पत्र दिया, वे उसी चुनावी प्रक्रिया के आधार पर अपने पद पर हैं। ऐसे में विपक्ष एक तरफ चुनाव परिणाम को स्वीकार करता है और दूसरी तरफ उसी चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल कैसे उठा सकता है?                   (यह सत्ता पक्ष का राजनीतिक तर्क है, इसे किसी स्थापित तथ्य या कानूनी निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।)

कुंतल कृष्ण: भाजपा प्रदेश प्रवक्ता

विपक्ष का जवाब- मुश्किलों के बावजूद चुनाव जीता

दूसरी तरफ विपक्ष की ओर से इसका जवाब भी सामने आया है। आरजेडी की ओर से तर्क दिया गया कि चुनाव के दौरान जिन परिस्थितियों और कथित बाधाओं का सामना विपक्ष ने किया, उनके बावजूद उसके उम्मीदवार चुनाव जीतकर आए हैं। इसलिए यदि किसी को इस्तीफा देना चाहिए तो विपक्ष नहीं बल्कि चुनाव आयोग और सत्ता पक्ष को जवाब देना चाहिए।

विपक्ष SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटने और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को अपनी मुख्य आपत्ति बता रहा है।

राजद मुख्य प्रवक्ता: शक्ति सिंह यादव

SIR में वास्तव में क्या हुआ था?

यहां तथ्य और राजनीतिक आरोप के बीच अंतर समझना जरूरी है। बिहार में 2025 में हुए SIR के दौरान 24 जून 2025 को करीब 7.89 करोड़ मतदाता थे। चुनाव आयोग के अनुसार ड्राफ्ट सूची में करीब 65 लाख नाम शामिल नहीं हो पाए, जबकि दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद करीब 21.53 लाख पात्र मतदाता जोड़े गए और अंतिम सूची में लगभग 7.42 करोड़ मतदाता रहे।

चुनाव आयोग के मुताबिक हटाए गए नामों में मृत मतदाता, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके लोग और डुप्लीकेट प्रविष्टियां शामिल थीं। दूसरी तरफ विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हुए। इसलिए “65 लाख नाम हटे” एक आधिकारिक आंकड़ा है, लेकिन “इनमें सभी या बड़ी संख्या में नाम राजनीतिक कारणों से काटे गए”                          (यह राजनीतिक आरोप है, प्रमाणित तथ्य नहीं।)

ज्ञानेश कुमार कौन हैं?

ज्ञानेश कुमार वर्तमान में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार उन्होंने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था।

SIR और मतदाता सूची को लेकर उनके खिलाफ विपक्ष लगातार राजनीतिक और सार्वजनिक अभियान चला रहा है। वहीं चुनाव आयोग ने विपक्ष के कई आरोपों का खंडन भी किया है। हाल में Form 6 को लेकर लगाए गए आरोपों को भी आयोग ने भ्रामक बताया है।

Gyanesh Kumar, Chief Election Commissioner

8 अक्टूबर को क्या होगा?

महागठबंधन के जारी कार्यक्रम के अनुसार:

  • 7 अक्टूबर: सभी प्रखंडों में संयुक्त आक्रोश मार्च और पुतला दहन।
  • 8 अक्टूबर: सभी जिलों में प्रदर्शन और पुतला दहन।
  • 8 अक्टूबर: पटना में महागठबंधन के नेता, विधायक, विधान पार्षद और पदाधिकारी लोक भवन की ओर मार्च करेंगे।
  • राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई/हटाने की मांग रखी जाएगी।

यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि बिहार के राजभवन का आधिकारिक नाम अब “बिहार लोक भवन” है। बिहार राज्यपाल सचिवालय की 1 दिसंबर 2025 की अधिसूचना में राजभवन, बिहार को सभी आधिकारिक उद्देश्यों के लिए “बिहार लोक भवन” नामित किया गया था।

आगे क्या?

SIR को लेकर अब लड़ाई केवल चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं दिख रही है। दिल्ली में विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन के बाद बिहार में भी 7 और 8 अक्टूबर के कार्यक्रमों से राजनीतिक तापमान बढ़ने की संभावना है।

एक तरफ विपक्ष SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लोकतंत्र से जोड़कर आंदोलन कर रहा है, तो दूसरी तरफ सत्ता पक्ष विपक्ष से ही सवाल पूछ रहा है कि यदि चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है तो चुनाव से मिले जनप्रतिनिधि पदों को स्वीकार क्यों किया गया?

अब नजर 8 अक्टूबर के लोक भवन मार्च पर रहेगी और यह भी महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष अपने ज्ञापन में क्या मांग रखता है तथा सरकार और चुनाव आयोग की ओर से उसका क्या जवाब आता है।

नोट: SIR में मतदाता सूची से नाम हटने के आंकड़े और चुनाव आयोग की प्रक्रिया तथ्यात्मक रिकॉर्ड का हिस्सा हैं, जबकि “वोट चोरी”, “धांधली” या आयोग के किसी राजनीतिक दल के पक्ष में काम करने जैसे दावे संबंधित नेताओं के आरोप हैं। इन्हें खबर में आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

Leave a Comment