बिहार में बनेंगे आठ रोपवे: पटना-सोनपुर से गया-कैमूर तक, जानें पूरी लिस्ट

पटना: बिहार में धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान बनाने के लिए राज्य सरकार रोपवे नेटवर्क को बड़े पैमाने पर विस्तार देने जा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने दो नए रोपवे बनाने की घोषणा की है, जबकि चार रोपवे पहले से निर्माणाधीन हैं और दो रोपवे वर्तमान में संचालित हैं। इस तरह आने वाले वर्षों में राज्य में कुल आठ रोपवे चालू हो जाएंगे।


नए घोषित दो रोपवे

1. पटना मरीन ड्राइव से सोनपुर हरिहरनाथ मंदिर:
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि पटना के मरीन ड्राइव से सोनपुर स्थित हरिहरनाथ मंदिर तक रोपवे बनाया जाएगा। इसका प्रोजेक्ट तैयार हो चुका है। अभी श्रद्धालु महात्मा गांधी सेतु या जेपी सेतु के जरिए सड़क मार्ग से सोनपुर पहुंचते हैं। जेपी सेतु के समानांतर एक नया चार लेन पुल भी निर्माणाधीन है।
रोपवे बनने से मिनटों में गंगा नदी पार कर पटना से सोनपुर पहुंचा जा सकेगा। यह वाराणसी के रोपवे जैसा फ्लैट रोपवे होगा। इससे सोनपुर और हाजीपुर क्षेत्र में होटल, रेस्तरां और व्यावसायिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार यहां 33,000 एकड़ में हरिहरनाथपुर नाम से नई सैटेलाइट टाउनशिप भी बसाने जा रही है। पटना मरीन ड्राइव से हरिहरनाथ मंदिर की दूरी करीब 7 किलोमीटर है।

2. भागलपुर के कहलगांव में गंगा के टापुओं तक रोपवे:
भागलपुर जिले के कहलगांव में गंगा नदी के बीच स्थित तीन पहाड़ी टापुओं तक भी रोपवे बनाया जाएगा। इन टापुओं पर शांति बाबा मंदिर, पंजाबी बाबा मंदिर, बंगाली बाबा मंदिर, अष्टावक्र मंदिर और बाबा बटेश्वरनाथ शिव मंदिर जैसे प्राचीन मंदिर स्थित हैं। अभी यहां पहुंचने का एकमात्र साधन नाव है। पर्यटन बढ़ाने के मकसद से सरकार ने यहां रोपवे बनाने का निर्णय लिया है।

निर्माणाधीन चार रोपवे

गयाजी प्रेतशिला रोपवे: पिंडदान के लिए प्रेतशिला पहाड़ी पर चढ़ने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह रोपवे बनाया जा रहा है। इसे 20 दिसंबर 2016 को स्वीकृति मिली थी और 14 अगस्त 2022 से काम शुरू हुआ। जून 2026 तक काम पूरा होना था, लेकिन अब तक 84 प्रतिशत काम ही हो सका है। इस पर 1,048.76 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। ASI, पर्यावरण मंजूरी (EIA) और स्टेज-2 क्लीयरेंस मिलने में देरी के चलते प्रोजेक्ट पिछड़ गया।

जहानाबाद वाणावर पहाड़ रोपवे: मखदुमपुर प्रखंड के वाणावर पहाड़ पर बाबा सिद्धनाथ मंदिर तक बन रहे इस रोपवे को स्वीकृति मिली थी और 16 जुलाई 2022 से निर्माण शुरू हुआ। इस पर 2,392.47 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। 30 जून 2026 तक काम पूरा होना था, अब तक 92 प्रतिशत काम हो चुका है और ट्रायल भी हो चुका है। सावन के बाद इसे शुरू किए जाने की संभावना है। वाणावर को “मगध का हिमालय” भी कहा जाता है।

कैमूर मुंडेश्वरी मंदिर रोपवे: पवरा पहाड़ी पर 600 फीट ऊंचाई पर स्थित प्राचीन मुंडेश्वरी मंदिर तक रोपवे को 2 नवंबर 2016 को स्वीकृति मिली थी। इसे 2020 में पूरा होना था, फिर समयसीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर 2024 की गई, लेकिन अब तक निर्माण शुरू नहीं हो सका। 10 अप्रैल 2026 की बैठक में परियोजना बिहार स्टेट टूरिस्ट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को वापस सौंपने पर सहमति बनी और 21 मई 2026 को पुराना इकरारनामा रद्द कर दिया गया। परियोजना वापसी की प्रक्रिया अभी जारी है।

रोहतास चौरासन मंदिर रोपवे: रोहतास प्रखंड मुख्यालय के पास नर्सरी से चौरासन मंदिर धर्मशाला तक 1,324 मीटर लंबा यह रोपवे 1,265.15 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा है। इससे रोहतासगढ़ किले और रोहितेश्वर धाम तक की 1,400 फीट की कठिन चढ़ाई आसान होगी। 10 फरवरी 2015 को स्वीकृति मिली थी, 25 अगस्त 2020 तक पूरा होना था, लेकिन अब तक आठ बार समयसीमा बढ़ चुकी है। नई डेडलाइन 31 अक्टूबर 2026 है। अभी तक 70 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। दिसंबर 2025 में ट्रायल रन के दौरान अपर टर्मिनल पॉइंट का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ था, जिसके बाद आईआईटी पटना से स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया गया।


वर्तमान में चल रहे दो रोपवे

राजगीर रोपवे: 1969 में स्थापित यह रोपवे जापानी बौद्ध भिक्षु फूजी गुरुजी ने विश्व शांति स्तूप के लिए उपहार स्वरूप स्थापित कराया था। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम इसे रत्नागिरी पहाड़ी पर संचालित करता है। आठ सीटर यह रोपवे जमीन से करीब एक हजार फीट ऊंचाई तक जाता है और यात्रियों को राजगीर की पांच पहाड़ियों — विपुलचक, वैभारगिरी, सोनगिरी, उदयगिरी और रत्नागिरी का दृश्य दिखाता है।

मंदार रोपवे: बांका जिले के बौसी में मंदार पर्वत पर 21 सितंबर 2021 को 377 मीटर लंबा यह रोपवे लगाया गया था। यह चार से पांच मिनट में पहाड़ की चोटी तक पहुंचा देता है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 700 से 800 मीटर है। पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन में इसी पर्वत का उपयोग मथनी के रूप में किया गया था।


धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

राज्य सरकार का मानना है कि इन रोपवे परियोजनाओं से बिहार के प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यवसाय के अवसर बढ़ेंगे और राज्य में पर्यटन उद्योग को नई गति मिलेगी।

(यह रिपोर्ट उपलब्ध सरकारी जानकारी और परियोजना विवरण पर आधारित है।)

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