लोकसभा में पेपर लीक रोकने से जुड़े संशोधन विधेयक पर हुई लंबी चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को नीट यूजी 2026 परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों के खिलाफ चले छात्र आंदोलन का सीधा नतीजा बताया।
“एक प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचाया”
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार ने एक प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया। उनका आरोप था कि करोड़ों युवाओं के दबाव के चलते सरकार को झुकना पड़ा और अब सरकार को आंदोलन के दौरान दिए गए सभी आश्वासन संसद के सामने सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब धर्मेंद्र प्रधान मंत्री पद छोड़ने के बाद संसद पहुंचे तो उनका स्वागत हुआ, लेकिन इस फैसले से सदन के कई सदस्यों ने राहत की सांस ली होगी।
छात्र आंदोलन को बताया ऐतिहासिक
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा कि यह पहला ऐसा छात्र आंदोलन था जिसमें केवल छात्र ही नहीं, बल्कि उनके माता-पिता भी खुलकर साथ आए। उनके मुताबिक लगभग 20 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी, और परिवारों को जोड़ लिया जाए तो करोड़ों लोग इस मुद्दे से सीधे प्रभावित हुए। उन्होंने 2020-21 के किसान आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह चुनाव नजदीक आने पर सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े थे, उसी तरह छात्रों के दबाव में भी सरकार को झुकना पड़ा।
पेपर लीक और NTA आउटसोर्सिंग पर सवाल
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार ने 2024 में भी पेपर लीक रोकने के लिए कानून बनाया था, फिर भी नीट यूजी 2026 जैसी परीक्षा में कथित पेपर लीक कैसे हुआ। उन्होंने दरोगा भर्ती, जूनियर इंजीनियर भर्ती, यूपीटीईटी, हाईस्कूल-इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा और सिपाही भर्ती सहित कई परीक्षाओं का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि बीते दस वर्षों में कई परीक्षाएं अदालत के हस्तक्षेप के बाद रद्द करनी पड़ीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में आउटसोर्स व्यवस्था अपनाई गई है, और विपक्ष को आशंका है कि कहीं इसी तरह पूरी सरकार ही आउटसोर्स न हो जाए।
स्कूल बंदी और शिक्षा व्यवस्था पर आरोप
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद शिक्षा, परीक्षा और विश्वविद्यालयों की व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया कि देश में एक लाख से अधिक सरकारी प्राथमिक विद्यालय बंद हुए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 26,386 स्कूल अकेले उत्तर प्रदेश में बंद किए गए। उनके अनुसार इसका सबसे ज्यादा नुकसान गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग के बच्चों को हुआ है। उन्होंने 69 हजार शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी का आरोप भी दोहराया, जिसके प्रभावित अभ्यर्थी वर्षों से अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं।
किरेन रिजिजू के साथ हुई तीखी बहस
बहस के दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अखिलेश यादव से पूछा कि छात्रों की बात सुनकर संसद में विधेयक लाना बेहतर है या आंदोलन को कुचलने के लिए आपातकाल लगाना। इसके जवाब में अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने आपातकाल नहीं देखा, लेकिन दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आंसू गैस, बैरिकेडिंग और नुकीले अवरोधों का इस्तेमाल देखा है, जो किसी आपातकाल से कम नहीं था।
(नोट: इस रिपोर्ट में शामिल बयान और आरोप संबंधित सांसद के लोकसभा में दिए गए वक्तव्य पर आधारित हैं। यह उनके व्यक्तिगत आरोप और दावे हैं, इनकी पुष्टि सरकार या संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया के बाद ही हो सकती है।)
