देश में सोशल मीडिया और सरकार के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नीट यूजी पेपर लीक मामले और परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर युवाओं के लिए साझा किया गया एक वीडियो फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अचानक उपलब्ध नहीं रहा। इस घटना के सामने आते ही केंद्र सरकार सख्त हो गई और मेटा कंपनी से जवाब तलब किया गया।
क्या था पूरा मामला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ दिन पहले युवाओं को संबोधित करते हुए एक वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में उन्होंने कहा था कि सरकार परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए और अधिक सख्त कदम उठाएगी। इसके साथ ही उन्होंने फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन और पेपर लीक मामलों में कड़ी सजा के प्रावधान का भी जिक्र किया था।
हालांकि, कुछ समय बाद भारत में बड़ी संख्या में यूजर्स को यह वीडियो दिखना बंद हो गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, वीडियो की जगह एक सूचना दिखाई दे रही थी। मंगलवार को देर रात लगभग 1:25 बजे फेसबुक पर वीडियो के साथ दिए गए विकल्प पर क्लिक करने पर एक नोटिस सामने आया, जिसमें बताया गया था कि किसी कानूनी अनुरोध के अनुपालन में इस सामग्री को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है।
सरकार ने लिया संज्ञान, मेटा को किया तलब
जैसे ही यह मामला सार्वजनिक हुआ, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इसे गंभीरता से लिया। मंत्रालय ने मेटा के वैश्विक पब्लिक पॉलिसी अधिकारियों को स्पष्टीकरण के लिए तलब किया। सूत्रों के मुताबिक इंस्टाग्राम के वैश्विक प्रमुख से भी इस संबंध में जवाब मांगा गया था।
मेटा ने बताई तकनीकी गड़बड़ी, और मांगी माफी
विवाद बढ़ने के बाद मेटा की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया गया। कंपनी ने इसे एक तकनीकी खामी बताते हुए इसके लिए खेद व्यक्त किया। मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद वीडियो को दोबारा उपलब्ध करा दिया गया, और प्रधानमंत्री के छात्रों से जुड़े अन्य वीडियो भी सामान्य रूप से दिखाई देने लगे।
हालांकि, सूत्रों के मुताबिक सरकार मेटा की इस सफाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिख रही है। यह पहला मामला नहीं है जब मेटा प्लेटफॉर्म्स — फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप — भारत में डिजिटल नियमों के पालन या कंटेंट मॉडरेशन को लेकर विवादों में रहे हों।
राजनीतिक और डिजिटल नीति पर सवाल
यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब देश में नीट पेपर लीक मुद्दे को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गरम है। संसद में भी विपक्षी दलों ने परीक्षा प्रणाली और सरकार की जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के वीडियो का अस्थायी रूप से हट जाना, बड़ी टेक कंपनियों की भारत में जवाबदेही और डिजिटल कंटेंट नियमन को लेकर एक नई बहस को जन्म देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी किसी सोशल मीडिया कंपनी को सरकार या पुलिस से नोटिस मिलता है, तो कंपनी के भारत में तैनात नोडल अधिकारी और कानूनी अनुपालन टीम पहले यह जांचती है कि नोटिस वैध है या नहीं, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई होती है। इस पूरे प्रकरण में मेटा की आंतरिक प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
आगे क्या
फिलहाल वीडियो को बहाल कर दिया गया है, लेकिन सरकार की ओर से मेटा से आगे और स्पष्टीकरण मांगे जाने की संभावना जताई जा रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस घटना के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए भारत में कंटेंट मॉडरेशन नियमों को लेकर कोई नई नीति या दिशानिर्देश सामने आते हैं।
(नोट: इस रिपोर्ट में शामिल तथ्य विभिन्न समाचार स्रोतों की रिपोर्टिंग पर आधारित हैं। मामले से जुड़े आधिकारिक बयान आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।)
