उपेंद्र कुशवाहा का बड़ा बयान — किसी पद के लिए RLM का अस्तित्व दांव पर नहीं लगाएंगे

पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों राष्ट्रीय लोक मोर्चा यानी RLM और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को लेकर सियासी गलियारों में खूब चर्चा हो रही है। एक तरफ जहाँ कुशवाहा अपनी पार्टी को संगठनात्मक रूप से मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ RLM के BJP में विलय और MLC सीट को लेकर उठे सवालों ने बिहार की राजनीति को गरमा दिया है।

आलोक सिंह फिर बने RLM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष
राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने बिहार में संगठन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए आलोक सिंह को एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसकी घोषणा राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को आयोजित एक संगठनात्मक कार्यक्रम के दौरान की। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी। इस दौरान दोनों दावेदारों ने मंच से ही अंतिम फैसले का अधिकार उपेंद्र कुशवाहा को सौंप दिया। इसके बाद कुशवाहा ने आलोक सिंह के नाम की घोषणा की, जिसे कार्यकर्ताओं ने तालियों से स्वागत किया।इसके साथ ही पार्टी ने कई अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियाँ भी कीं
प्रशांत पंकज और सुभाष चंद्रवंशी को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया।
हिमांशु पटेल को प्रधान महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी।

22 लाख से अधिक सदस्य — RLM का दावा
उपेन्द्र कुशवाहा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि RLM की सदस्यता अभियान लगातार सफल हो रहा है और अब तक 22 लाख से अधिक लोग पार्टी से जुड़ चुके हैं। उन्होंने इसे पार्टी की बढ़ती स्वीकार्यता और जन समर्थन का संकेत बताया।
साथ ही उन्होंने बताया कि बिहार के 38 जिलों में से 32 जिलों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत जिला अध्यक्षों का चुनाव सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। शेष बचे जिलों में भी जल्द यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।


MLC सीट नहीं मिली — फिर भी कुशवाहा का रुख साफ
बिहार में 18 जून को होने वाले MLC चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। NDA की 10 सीटों में से RLM को एक भी सीट नहीं मिली। इसी के बाद मीडिया ने कुशवाहा से सीधा सवाल किया कि क्या RLM का BJP में विलय हो सकता है?
इस पर उपेंद्र कुशवाहा ने बेबाकी से जवाब दिया —
“किसी भी पद के लिए RLM का अस्तित्व दांव पर नहीं लगाया जा सकता। पार्टी का अस्तित्व सर्वोपरि है।”
यह बयान आते ही सियासी गलियारों में इसकी चर्चा शुरू हो गई। माना जा रहा है कि MLC सीट न मिलने की नाराजगी इस बयान के पीछे झलक रही है।

संगठन मजबूत है — लेकिन जमीनी हकीकत क्या?
पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के नतीजे RLM के लिए उत्साहजनक नहीं रहे। खुद उपेंद्र कुशवाहा भी उन नतीजों से संतुष्ट नहीं दिखे थे। तभी से वे लगातार पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में जुटे हैं — चाहे सदस्यता अभियान हो, जिला अध्यक्षों की नियुक्ति हो या प्रदेश संगठन का पुनर्गठन। लेकिन असली सवाल यह है कि RLM की यह संगठनात्मक मजबूती NDA के अन्य घटक दलों को और विपक्ष को कितनी गंभीरता से लेगी? क्या यह सदस्यता अभियान और नियुक्तियाँ चुनावी जमीन पर असर दिखा पाएंगी? इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा।

निष्कर्ष:
उपेंद्र कुशवाहा एक तरफ पार्टी को मजबूत करने का संदेश दे रहे हैं और दूसरी तरफ BJP के साथ अपनी शर्तों पर रिश्ता कायम रखने का इरादा भी जता रहे हैं। MLC सीट न मिलना और विलय के सवाल पर कड़ा जवाब — यह दोनों बातें साफ करती हैं कि कुशवाहा अभी NDA में रहते हुए भी अपनी अलग पहचान बनाए रखना चाहते हैं। बिहार की राजनीति में आने वाले दिन RLM के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं।

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