पटना: बिहार विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव और उपचुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यूनाईटेड) ने अपने-अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी। दोनों दलों ने चार-चार नामों की घोषणा की है, लेकिन इस घोषणा के साथ ही एनडीए गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
BJP की सूची में चार नाम
भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने बिहार से चार उम्मीदवारों को अपनी स्वीकृति प्रदान की है।
1. श्री पवन सिंह (Pawan Singh)
2. डॉ. संजय मयूख (Dr. Sanjay Mayukh)
3. श्री अनिल कुमार ठाकुर (Anil Kumar Thakur)
4. श्रीमती शीला पंडित (Sheela Pandit)

JDU की सूची में भी चार उम्मीदवार
बिहार प्रदेश जनता दल (यूनाईटेड) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने जारी सूची में चार नामों की घोषणा की
1. श्री निशान्त — जिला पटना (द्विवार्षिक चुनाव)
2. श्रीमती भारती मेहता — जिला मधुबनी (द्विवार्षिक चुनाव)
3. श्रीमती शिवरानी देवी प्रजापति — जिला पश्चिम चम्पारण (द्विवार्षिक चुनाव)
4. श्री ललन प्रसाद — जिला शेखपुरा (उपचुनाव)

कुल 10 सीटें, NDA की 8 आंकड़ों का गणित
बिहार विधान परिषद की कुल 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव और एक सीट पर उपचुनाव होना है। यानी कुल 10 सदस्य चुने जाएंगे। BJP की चार और JDU की चार — NDA के खाते में आठ सीटें स्पष्ट दिख रही हैं।
शेष बची दो सीटों को लेकर चर्चा गर्म है। आंकड़ों के हिसाब से —एक सीट राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM — उपेंद्र कुशवाहा) के खाते में जाती दिख रही है। एक सीट विपक्ष — संभवतः राष्ट्रीय जनता दल (RJD) — के पाले में जा सकती है।
LJP निराश, लेकिन RLM का दांव कंफर्म? जहां तक लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की बात है, इस बार उन्हें निराशा हाथ लगती दिख रही है। BJP और JDU की चार-चार सीटों की सीधी घोषणा के बाद LJP रामविलास को इस बंटवारे में कोई सीट नहीं दिखी।
वहीं RLM यानी उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के लिए एक सीट लगभग तय मानी जा रही है। इसकी बड़ी वजह है — उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक कुशवाहा इस समय मंत्री हैं, लेकिन वे विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। संवैधानिक प्रावधान के तहत मंत्री बने रहने के लिए छह महीने के भीतर किसी न किसी सदन का सदस्य होना अनिवार्य है। ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा के खाते में एक MLC सीट जाना लगभग तय माना जा रहा है।
पवन सिंह की राह साफ —
पार्टी को बताया माँ समान। इस पूरी घोषणा में सबसे बड़ी चर्चा पवन सिंह को लेकर है। BJP ने उन्हें MLC प्रत्याशी घोषित किया है। गौरतलब है कि पवन सिंह पहले लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं, फिर उनके राज्यसभा जाने की अटकलें लगीं, और अब विधान परिषद में उन्हें जगह मिली है। सूची जारी होने के बाद पवन सिंह BJP के वरिष्ठ नेता संजय जायसवाल का धन्यवाद करने पहुंचे।
उन्होंने कहा —
“पार्टी हमारे लिए माँ के समान है। मैं पार्टी और समाज के लिए निष्ठा भाव से कार्य करूंगा।”
इस बयान के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। जो पवन सिंह कभी लोकसभा के रण में थे, वे अब विधान परिषद के रास्ते बिहार की राजनीति में स्थायी जगह बनाने की ओर अग्रसर हैं। उनका MLC बनना अब लगभग तय माना जा रहा है।
विशेष: क्यों अहम है यह चुनाव?
बिहार विधान परिषद NDA सरकार के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस चुनाव के ज़रिए सरकार अपने विश्वस्त नेताओं, कार्यकर्ताओं और जातीय समीकरण साधने वाले चेहरों को सदन में जगह देती है। BJP की सूची में महिला (शीला पंडित), चिकित्सक (डॉ. संजय मयूख) और लोकप्रिय चेहरे (पवन सिंह) — तीनों का संतुलन दिखता है।

